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बुधवार, 29 सितंबर 2010

विचलित है मन

कृष्ण कराओ पुनः
अपने विराट स्वरुप का दर्शन
विचलित है मन
आसन्न एक परिवर्तन
गीता का भाष्य
पठनीय पाठ्य
पूरित परिपथ
निश्चित दर्शनीय
एक और अग्निपथ
पिटती परंपराओं की लकीरें
क्या खोल पायेगी
उन शहीदों की तकदीरें
जिन्होंने सहर्ष
किया था जीवन अर्पण
उनकी विधवाएं मांजती
आज इन नेताओं के घर बर्तन
बच्चे जिनके चाटते
इनके आज जूठन
सरकारी अनुदानों हेतु
लगाते चक्कर
खाते टक्कर पे टक्कर
भूखे भेड़ियों का बन गयी शिकार
अस्मत हो गई तार -तार
बिक गए घर-द्वार
आज भी जोहती निराला की वह तोड़ती पत्थर
अपना पालनहार !!

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

हिंदी दिवस

हिंदी दिवस की
एक और उत्सव
पूछता पुनः एक बार अपना भावार्थ
विस्मृत युगबोध का यथार्थ
कल्पित
स्तित्वाहिनता का आभास
निरंतर प्रसरित पावन प्रकाश
लक्षित
एक पुनर्जागरण
याकि करना वैराग्य का वरण
जागृत
चेतना की शिखार्यात्रा
यदि हो विवेक की लाघुमात्र
अलाम्बित एक नूतन प्रभात
विलंबित
राग्यमिनी से गुजित
धवल आकाश
होगी रंगीन पुनः
सुरमई शाम
चमकेगा छितिज पर
आर्यावर्त का क्या नाम
याकि छिरेगी
एक और बहस
es यथार्थ पर
सत्य से दूर
मद से चूर
प्रारंभ होगी
एक और नई
यात्रा अंतहीन
pidit दिन और मलिन



सोमवार, 27 सितंबर 2010

आज भी धन्नी नहीं बिक सका

लेबरो की मंडी में
सुबह से शाम हो गयी
दिन तक़रीबन ढल गयी
पर आज भी धन्नी नहीं बिका
एक भी पैसा नहीं वो कमा सका
सामने मुनिया का
बुखार से तपता चेहरा हूम रहा था
जिससे सुबह hi उसने कहा था
आज वो जरुर दावा लेकर आयेगा
और पपू की फ़ीस भी दे पायेगा
ताकि वो पढ़ कर बड़ा आदमी बनेगा
हमरे दुखो को वो हारेगा
सोचते सोचते उसकी अखे भर आई
wah रे किस्मत की माई
काम के तलश में साथ लायी
रोटिय भी सुख चुकी थी
शाम एकदम ढल चुकी थी
थका हरा वो चल pada घर की और
तन में तनिक भी नहीं था जोर
सूखे pero की माफिक वो
रस्ते से बेखबर चला जा रहा था
उधर से एक ट्रक तेजी से आ रहा था
उसने समाप्त कर दिया धन्नी का जीवन
उसके बच्चो को कर गया
अनाथ आजीवन

शनिवार, 25 सितंबर 2010

माँ की गोद

एक दिन माँ की गोद में

रख कर सर

मैं सो रहा था बाखबर

नीद के आगोश में

हो गया था तन
कल से ही था बेचन ये मन

माँ गुनगुना रही थी प्यारी लोरियां

मेरे सर पे घुमाती अपनी बहिया

एकाएक माँ के लोरियों में से

दर्द की आवाज आई

मैंने कहा क्या हुआ माई

उसने कहा कुछ नहीं बेटा

शायद किसी का है तोता

तभी मने देखा गोद दस निचे से

रक्त की धर

मई हो गया bajar

सोचा वह रे माँ

कैसी है तुम्हारी दुनिया

पर आज के बेटे क्या समझेगे

की क्या होती है पुरनिया

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

सृजनात्मक लेखन कार्यशाला हेतु ब्लॉगरों से प्रविष्टि आमंत्रित

रायपुर । रचनाकारों की संस्था, प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा देश के उभरते हुए कवियों/लेखकों/निबंधकारों/कथाकारों/लघुकथाकारों/ब्लॉगरों को देश के विशिष्ट और वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा साहित्य के मूलभूत सिद्धातों, विधागत विशेषताओं, परंपरा, विकास और समकालीन प्रवृत्तियों से परिचित कराने, उनमें संवेदना और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने, प्रजातांत्रिक और शाश्वत जीवन मूल्यों के प्रति उन्मुखीकरण तथा स्थापित लेखक तथा उनके रचनाधर्मिता से तादात्मय स्थापित कराने के लिए अ.भा.त्रिदिवसीय (13, 14, 15 नवंबर, 2010) सृजनात्मक लेखन कार्यशाला का आयोजन बिलासपुर में किया जा रहा है । इस अखिल भारतीय स्तर के कार्यशाला में देश के 75 नवोदित/युवा रचनाकारों को सम्मिलित किया जायेगा ।


संक्षिप्त ब्यौरा निम्नानुसार है-
प्रतिभागियों को 20 अक्टूबर, 2010 तक अनिवार्यतः निःशुल्क पंजीयन कराना होगा । पंजीयन फ़ार्म संलग्न है ।
प्रतिभागियों का अंतिम चयन पंजीकरण में प्राप्त आवेदन पत्र के क्रम से होगा ।
पंजीकृत एवं कार्यशाला में सम्मिलित किये जाने वाले रचनाकारों का नाम ई-मेल से सूचित किया जायेगा ।
प्रतिभागियों की आयु 18 वर्ष से कम एवं 40 वर्ष से अधिक ना हो ।
प्रतिभागियों में 5 स्थान हिन्दी के स्तरीय ब्लॉगर के लिए सुरक्षित रखा गया है ।
प्रतिभागियों को संस्थान/कार्यशाला में एक स्वयंसेवी रचनाकार की भाँति, समय-सारिणी के अनुसार अनुशासनबद्ध होकर कार्यशाला में भाग लेना अनिवार्य होगा ।
प्रतिभागी रचनाकारों को प्रतिदिन दिये गये विषय पर लेखन-अभ्यास करना होगा जिसमें वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा मार्गदर्शन दिया जायेगा ।
कार्यशाला के सभी निर्धारित नियमों का आवश्यक रूप से पालन करना होगा ।
प्रतिभागियों को सैद्धांतिक विषयों के प्रत्येक सत्र में भाग लेना अनिवार्य होगा । अपनी वांछित विधा विशेष के सत्र में वे अपनी इच्छानुसार भाग ले सकते हैं ।
प्रतिभागियों के आवास, भोजन, स्वल्पाहार, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह की व्यवस्था संस्थान द्वारा किया जायेगा ।
प्रतिभागियों को कार्यशाला में संदर्भ सामग्री दी जायेगी ।
प्रतिभागियों को अपना यात्रा-व्यय स्वयं वहन करना होगा ।
प्रतिभागियों को 12 नवंबर, 2010 शाम 5 बजे के पूर्व कार्यशाला स्थल - बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में अनिवार्यतः उपस्थित होना होगा । पंजीकृत/चयनित प्रतिभागी लेखकों को कार्यशाला स्थल (होटल) की जानकारी, संपर्क सूत्र आदि की सम्यक जानकारी पंजीयन पश्चात दी जायेगी ।
प्रस्तावित/संभावित विषय एवं विशेषज्ञ लेखक
दिनाँक 13 नवंबर, 2010
रचना की दुनिया – दुनिया की रचना – श्री चंद्रकांत देवताले – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी – प्रभाकर श्रोत्रिय
रचना में यथार्थ और कल्पना – श्री राजेन्द्र यादव – नीलाभ – केदारनाथ सिंह
रचना और प्रजातंत्र – श्री अखिलेश – रघुवंशमणि – परमानंद श्रीवास्तव
रचना और भारतीयता – श्री नंदकिशोर आचार्य – श्री अरविंद त्रिपाठी – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
रचना : महिला, दलित और आदिवासी –– सुश्री अनामिका - कात्यायनी - मोहनदास नैमिशारण्य
रचना और मनुष्यता के नये संकट - श्री विनोद शाही- श्रीप्रकाश मिश्र – सीताकांत महापात्र
दिनाँक 14 नवंबर, 2010
रचना और संप्रेषण – श्री कृष्ण मोहन – ज्योतिष जोशी – मधुरेश
शब्द, समय और संवेदना – श्री नंद भारद्वाज - श्रीभगवान सिंह – ए.अरविंदाक्षन
कविता की अद्यतन यात्रा – श्री वीरेन्द्र डंगवाल – ओम भारती - अशोक बाजपेयी
कविता - छंद और लय – श्री दिनेश शुक्ल – राजेन्द्र गौतम – डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र
कैसा गीत कैसे पाठक ? - श्री राजगोपाल सिंह – यश मालवीय – माहेश्वर तिवारी
कहानी-विषयवस्तु, भाषा, शिल्प – श्री शशांक – डॉ. परदेशीराम वर्मा – गोविन्द मिश्र
दिनाँक 15 नवंबर, 2010
कहानी की पहचान – सुश्री उर्मिला शिरीष - सूरज प्रकाश – सतीश जायसवाल

लघुकथा क्या ? लघुकथा क्या नहीं ? – श्री अशोक भाटिया – फ़ज़ल इमाम मल्लिक - बलराम
आलोचना क्यों, आलोचना कैसी? श्री शंभुनाथ – डॉ. रोहिताश्व - विजय बहादुर सिंह
ललित निबंध : कितना ललित-कितना निबंध – श्री नर्मदा प्रसाद उपा.-अष्टभुजा शुक्ल – डॉ.श्रीराम परिहार
(अंतिम नाम निर्धारण स्वीकृति/अस्वीकृति उपरांत)

संपर्क सूत्र
जयप्रकाश मानस
कार्यकारी निदेशक
प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, छत्तीसगढ़
एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा, रायपुर, छत्तीसगढ – 492001
ई-मेल-pandulipipatrika@gmail.com
मो.-94241-82664
बिलासपुर
श्री सुरेन्द्र वर्मा, मो.-94255-70751
श्री राजेश सोंथलिया, 9893048220
पंजीयन हेतु आवेदन पत्र फार्म नमूना
01. नाम -
02. जन्म तिथि व स्थान (हायर सेंकेंडरी सर्टिफिकेट के अनुसार) -
03. शैक्षणिक योग्यता –
04. वर्तमान व्यवसाय -
05. प्रकाशन (पत्र-पत्रिकाओं के नाम) –
06. प्रकाशित कृति का नाम –
07. ब्लॉग्स का यूआरएल – (यदि हो तो)
08. अन्य विवरण ( संक्षिप्त में लिखें)
09. पत्र-व्यवहार का संपूर्ण पता (ई-मेल सहित) –
हस्ताक्षर

(जयप्रकाश मानस द्वारा प्रेषित प्रेस-विज्ञप्ति)

मंगलवार, 14 सितंबर 2010

हिंदी दिवस पर एक सन्देश...

आज हिंदी दिवस है. अपने देश में हिंदी की क्या स्थिति है, यह किसी से छुपा नहीं है. हिंदी को लेकर तमाम कवायदें हो रही हैं, पर हिंदी के नाम पर खाना-पूर्ति ज्यादा हो रही है. जरुरत है हम हिंदी को लेकर संजीदगी से सोचें और तभी हिंदी पल्लवित-पुष्पित हो सकेगी...! ''हिंदी-दिवस'' की बधाइयाँ !!

रविवार, 12 सितंबर 2010

अंध विश्वाश और उसका प्रचार

आज धर्म के नाम पर कुछ धर्म के कथित ठेकेदार अन्धविसवासी प्रवृति को नये-नये कलेवर में बढ़ावा दे रहे हैं। परिणाम स्वरूप अंधविश्वास से ओत प्रोत व्यक्ति धर्म के कथित ठेकेदारों द्वारा प्रस्तुत घटनाओं अथवा कथनों पर स्व-विवेक से काम न लेकर सुझायी गयी बातों पर पूर्ण विश्वास कर लेते हैं। वे कथित सुझायी गयी बातों पर तनिक भी विचार नही करते कि उक्त के अनुपालन में उनका वांछित लाभ होगा अथवा नुकसान। वे तो बस अपने कथित ”गुरू अथवा महाराज “ की बातों से प्रभावित होकर श्वयम के द्वारा ही उत्पन्न की गयी मुसीबतों/ समस्याओं से बचने के लिए सुझाये गये रास्ते पर चल पड़ते हैं। उन्हें पूर्ण विश्वास होता है कि उक्त सुझाये गये पथ पर ही उन्हें वाछित लाभ होगा अन्यथा उन्हें कठोर यातना सहनी होगी।ऎसी ही प्रवृति से ग्रसित व्यक्ति की क्रिया कलापों के परिणाम स्वरूप मेरे घर के दरवाजे पर करीब 10-12 पर्चे ड़ाले गये जो दरवाजे पर नाली की तरफ बिखरे हुए पाये गये। कौतुहल वश मैंने उन्हें उठाकर पढ़ा। उक्त पर्चों पर मजमून कुछ इस प्रकार था तथा पर्चे के बीच में श्री सांई बाबा की तस्वीर भी छापी गयी थी।सांई बाबा का अद्भुत चमत्कारमद्रास शहर के पास सांई बाबा के मंदिर में एक भयानक दृष्य देखा गया, उस मंदिर मेें पुजारी पूजा कर रहा था । अचानक एक सर्प निकला उसे देखकर पुजारी डर गया। सर्प कन्या के रूप में आकर बोली डरने की कोई बात नही, जो कहती हूँ ध्यान से सुनो। मैं थोड़े दिन में पृथ्वी पर अवतार लूगीं जो धर्म का नास करते हैं उसका नास करूगीं। जो मेरे नाम का 100 पर्चे छपवाकर बांटेगा, 24 दिनों के अन्दर मेैं उसकी मनोकामना पूर्ण करूगीं,जो आज कल करके 24 दिन बितायेगा, उसका बड़ा नुकसान होगा।इतना कहकर सर्प रूपी कन्या 2 फुट पीछे हटकर अन्र्तध्यान हो गयी। यह खबर सुनकर मुम्बई के एक आदमी ने 2000 पर्चे छपवाकर बांटे तो उसे 51 लाख रूपय की लाटरी निकली। धनबाद के एक रिक्षा चालक ने 6000 पर्चे बांटे तो उसे आठ दिन में हीरों से भरा कलष मिला। एक बेरोजगार लड़का पर्चे छपवाने की सोच रहा था कि उसकी नौकरी लग गयी । उसने 1000 पर्चा छपवाकर बांटा।एक आदमी ने उसे झूठा समझकर फाड़ दिया तो उसका लड़का मर गया। आगरा के बाबू लाल गुप्ता को पर्चा मिला तो उसने सोचने में ही एक महीना बिता दिया, उसे ब्यापार में काफी नुकसान हुआ और उसकी पत्नी मर गयी। यह सुनकर बानतला गाँव के 5 भाईयों ने 1200 पर्चा बांटा तो एक घंटे के अन्दर 15 लाख की लाटरी मिली और उन्होने एक मंदिर बनवाने की सोची।।। जय सांई बाबा की जय ।।इस पर्चे को पढ़ने पर छापे गये तथ्यों के सार को इस प्रकार विश्लेशित किया जा सकता है। - क्या घटना का उल्लेख करने वाला व्यक्ति घटनाओं की पूरी जानकारी रखता है ?- क्या उसके द्वारा घटनाओं की सत्यता की पुश्टि की गयी है ? - जब उस सर्प कन्या द्वारा मात्र 100 पर्चे ही छपवाने पर मनोकामना पूर्ण करने का आष्वासन दिया गया था तो उल्लिखित व्यक्तियों ने क्रमशः 2000, 6000,1000 एवं 1200 पर्चे क्यों छपवाये ?- पर्चे छपवाने वालों को क्रमशः 51 लाख रूपये की लाटरी, हीरों से भरा कलश, एक बेरोजगार को नौकरी तथा पांच भाईयों को 15 लाख रूपये की लाटरी का लाभ मिला। उक्त की पुष्टि क्या निवेदक द्वारा की गयी ?- निवेदक को क्या लाभ मिला इसका उल्लेख क्यों नही किया गया ?- पर्चा झूठा समझकर फाड़ने वाले का लड़का मर गया। क्या सांई बाबा इतने कठोर हृदय के हैं कि पर्चे न छपवाने पर वे किसी की जान भी ले सकते हैं ? जबकि मेरे संज्ञान के अनुसार श्री सांई बाबा बहुत ही उदार एवं सहज प्रवृति के तथा सर्व जन कल्याण की कामना रखने वाले सात्विक विचारों और सभी धर्माें को मानने वाले अवतारिक सख्शियत देव पुरूष थे, जो आज भी चमत्कारिक रूप से सर्व जन कल्याण कर रहे हैं। ऐसे पर्चे छपवाकर निवेदक समाज को क्या सन्देश देना चाहता है, यह पूर्णतयः स्पश्ट है। यह संदेश लोगों मेंअंधविश्वास फैलाकर जन सामान्य की धार्मिक आस्था को चोट पहुँचाकर उसे तनाव ग्रस्त करने का ही मंतव्य रखता है। पर्चे पर मुद्रक का नाम त्रिवेदी प्रिन्टर्स छपा है तथा मोबाइल नंबर भी दिया गया है-9889923509. इस नंबर पर संपर्क करने पर कोई बात ही नही हो पाती है।
एस. आर. भारती

शनिवार, 11 सितंबर 2010

नशे में डूबा युवा वर्ग...


भारतीय समाज हमेशा से ही पूरे विश्व के लिए एक आदर्श और कौतुहल रहा है !सयुइंक्त परिवार में रहने वाले बच्चे बहुत ही संस्कारशील होते है !इसी करण हमारे युवा काफी समय तक कुरीतियों से दूर रहे और अपने आप को नशे से बचाए रखा....परन्तु अब ऐसा नही रहा!सयुंक्त परिवार टूटने लगे है..बच्चे पढने और करियर बनाने बड़े शहरों में जाने लगे है !इन महानगरों में वे अपना सामजस्य नही बना सके,यहाँ की व्यस्त जीवन शैली ने उन्हें तोड़ के रख दिया!
ऐसे में वे विभिन्न प्रकार के नशों के जाल में उलझ कर रह गए !अनुभव की कमी और पहले के कड़े अनुशासन में रहे ये युवा अब अचानक आज़ाद हो गए!शहर की एकल जीवन शैली ने भी इन्हें बढ़ावा दिया जिसके चलते ये नशे की गिरफ्त में फंसते चले गए !अपने व्यस्त कार्यालय समय के बाद वे नशे को ही आराम समझने लगे !आज का युवा परम्परागत नशे नही करता...क्यूंकि शराब बीयर आदि की महक इनकी पोल खोल देती है,इसलिए इन्होने नए नशे तलाश लिए जो आसानी से उपलब्ध है और जिनके सेवन का किसी को पता भी नही चलता....जैसे-आयोडेक्स ,विक्स वेपोरब,व्हाइटनर,दीवारों के पेंट और कफ सिरप! ये नशे हर जगह और कम कीमत में मिल जाते है !इसके बाद नंबर आता है  दुकानों पर मिलने वाली विभिन्न टेबलेट्स जो कई नामों से बेचीं जाती है !ये गोलियां बिना डाक्टर की पर्ची के सब जगह मिल जाती है !केमिस्ट भी कभी तनाव दूर करने तो कभी एकाग्रता बढ़ने के नाम पर इन्हें बेचते है !मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढाई करने वाले अधिकांश बच्चे इन्हें इस्तेमाल करते है !

इन छोटे मोटे नशों को करते करते ये नशे की उस अंधी दुनिया में पहुँच जाते है जहाँ से वापिस आना नामुमकिन है !शहर वसे दूर फार्म हॉउस में होने वाली रेव और कोकटेल पार्टियाँ इनकी मनपसंद जगह बन जाती है !शौक शौक में शुरू हुआ ये खेल अब इनकी आदत बन जाता है !नशे का बढ़ता प्रभाव आखिर एक दिन जान लेकर छोड़ता है !
इन सब से बचने का एकमात्र रास्ता है बच्चों को शुरू से ही नशे के दुष्प्रभाव बताये जाएँ ,टी वी पर नशे से सम्बंधित दृश्य और विज्ञापन प्रतिबंधित किये जाएँ !लगभग सभी शराब कम्पनियां सोडे के नाम पर शराब बेचती है !स्कूलों और कालेज में नशों की जानकारी के बारे में शिक्षा दी जाए तथा जरूरत पड़ने पर नशा मुक्ति केंद्र की भी व्यवस्था हो.......वरना युवाओं को नशे से बचाना मुश्किल हो जायेगा.....!

सोमवार, 6 सितंबर 2010

अरुणेश मिश्र
संपादक की ओर से
सब जन कहत कागज की लेखी । हम हैँ कहत आँखिन की देखी - महान संत कवि कबीर दास का यह कथन हमारा आदर्श है ।इस साइट को प्रारम्भ करने का उद्देश्य साहित्य . संस्कृति . कला . विज्ञान और अन्यान्य विधाओं के साम्प्रतिक रूप से पाठकों को अवगत कराना ही नही अपितु उनकी साझेदारी भी सुनिश्चित कराना है ।इन्कलाब एक खुला मंच है . इसमे प्रत्येक विधा और क्षेत्र के रचनाधर्मियों एवं समीक्षकों के लेखकीय सहयोग का स्वागत है । यह हमारा . आपका , सबका मंच है - जो जहाँ . जैसा . जिस तरह है . प्रस्तुत करने के लिए . और अच्छा बनाने के लिए ।

इन्कलाब.कॉम
inqlaab.com

ईश्वर कहाँ मिलेगा... (कविता : एस. आर. भारती)

देखा है लोगो को
मन्दिर, मस्जिद ,गुरूद्वारे एवं गिरजाघर में
"ईश्वर"को खोजते हुए,
मन्नतों के लिए दर-दर भटकते हुए
वे जानते हैं कि "ईश्वर" वहाँ नहीं मिलेगा
’फिर व्यर्थ क्यों खोजते हैं तुष्टि के लिए’
एक यक्ष प्रश्न ने सिर उठाया
फिर ”ईश्वर“ कहाँ मिलेगा ’
सोचते-सोचते चिन्तन आगोश में खो गया
अचानक अन्र्तमन के पट पर
चलचित्र की तरह कुछ पात्र उभरे
मन ने माना कि ये ही ”ईश्वर“ के रूप हैं
किसान ,माँ ,डाक्टर ,
गिरते को उठाने वाला ,
मरते को बचाने वाला ,
सबकी प्यास बुझाने वाला ,
सबकी भूख मिटाने वाला ,
भटके को राह दिखाने वाला ,
बिछडे़ को मिलवाने वाला ,
गुणगान योग्य है ऐसा गुणवान
यही सुपात्र की नजर में ”भगवान“ है ।

रविवार, 5 सितंबर 2010

शिक्षक दिवस की बधाइयाँ


डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्म-दिवस एवं शिक्षक दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें !!

शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

गाँधी जी पर आधारित हिन्दी फिल्म का शुभारम्भ पोर्टब्लेयर में

आइलैंड फिल्म प्रोडक्शन के द्वारा गाँधी जी पर आधारित एक हिन्दी फिल्म का शुभारम्भ पोर्टब्लेयर में हुआ। फिल्म की कथा, निर्माण एवं निर्देशन नरेश चन्द्र लाल द्वारा किया जा रहा है। कई राष्ट्रीय पुरस्कारों के विजेता श्री लाल की अंडमान आधारित ‘अमृत जल‘ फिल्म चर्चा में रही है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के डाक निदेशक एवं चर्चित साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव ने मुहुर्त क्लैप शाॅट देकर फिल्म का शुभारंभ किया। फिल्म सेंसर बोर्ड, कोलकाता रीजन के सदस्य नंद किशोर सिंह ने मुहुर्त नारियल तोड़ा। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि-” गाँधी जी की प्रासंगिकता सदैव बनी रहेगी और अपने विचारों के कारण वे सदैव जिंदा रहेंगे। काला-पानी कहे जाने वाले अंडमान के द्वीपों में वे भले ही कभी नहीं आएं हों, पर द्वीप-समूहों ने भावनात्मक स्तर पर उन्हें अपने करीब महसूस किया है। जाति-धर्म-भाषा क्षेत्र की सीमाओं से परे जिस तरह द्वीपवासी अपने में एक ‘लघु भारत ‘ का एहसास कराते हैं, वह गाँधी जी के सपनों के करीब है।“ श्री यादव ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के अंडमान से लगाव पर प्रशंसा जाहिर की और आशा व्यक्त की कि ऐसी फिल्में द्वीप-समूहों की ऐतिहासिकता, प्राकृतिक सुन्दरता के साथ-साथ सेलुलर जेल जैसे क्रांति-तीर्थ स्थलों को बढ़ावा देने में भी सफल हांेगी।गौरतलब है कि इस फिल्म में बालीवुड के जाने-माने चेहरे मुकुल नाग, अनुकमल, राजेश जैश, मुम्बई फिल्म उद्योग के मनोज कुमार यादव के अलावा स्थानीय कलाकार गीतांजलि आचार्य, कृष्ण कुमार विश्वेन्द्र, रविन्दर राव, डी0पी0 सिंह, ननकौड़ी के रशीद, पर्सी आयरिश मेयर्श तथा पोर्टब्लेयर महात्मा गाँधी स्कूल के चार बच्चे इस फिल्म में काम करेंगे।

निर्देशक नरेश चंद्र लाल ने बताया कि सेलुलर जेल के बाद महाराष्ट्र के वर्धा स्थित गाँधी आश्रम सेवा ग्राम में भी इस फिल्म की शूटिंग होगी और यह फिल्म दिसम्बर, 2010 में रिलीज होगी।

नरेश चन्द्र लाल, निदेशक - अंडमान पीपुल थिएटर एसोसिएशन, पोर्टब्लेयर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

बुधवार, 1 सितंबर 2010

अब टचस्क्रीन 3डी टीवी ...

जापान के शोधकर्ताओं ने दुनिया का पहला टचस्क्रीन 3डी टीवी बनाने का दावा किया है। इस टीवी में अव्वल तो तस्वीरें एकदम जीवंत होंगी, साथ ही दर्शक इन्हें छूकर इनके होने का अहसास कर सकेंगे।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में वरिष्ठ वैज्ञानिक नोरियो नाकामुरा ने बताया केक की तस्वीर को छूने पर आपको इसके चिपचिपेपन का अहसास होगा। वेबसाइट फायसोर्ग के अनुसार, ऐसे टीवी के व्यावसायिक उत्पादन की फिलहाल योजना नहीं है। इसे साइंस के क्षेत्र में उपयोग किया जाएगा, जहां सर्जन ऑपरेशन से पहले प्रक्रिया का इसके जरिए अभ्यास कर सकेंगे।