हास यानि कहानी...
बीती कहानी बंद करो!
नहीं जानना -वंदे मातरम् की लहर के बारे में,
नहीं सुनना -'साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल....
'नहीं सुनना-'फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल....
'नहीं जानना-ईस्ट इंडिया कंपनी कब आई!
कब अंग्रेजों ने हमें गुलाम बनाया!
कहना है तो कहो-आज कौन आतंक बनकर आया है!
और अब कौन गाँधी है?कौन नेहरू?कौन भगत सिंह ?
वंदे मातरम् की गूंजकिनकी रगों में आज है?
अरे यहाँ तो अपने घर सेकोई किसी को देश की खातिर नहीं भेजता
( गिने-चुनों को छोड़कर )
जो भेजते हैंउनसे कहते हैं,'एक बेटा-क्यूँ भेज दिया?
'क्या सोच है!........ऐसे में किसकी राह देख रहे हैं देश के लिए?
देश?जहाँ से विदेश जाने की होड़ है..........
एक सर शर्म से झुका है,'हम अब तक विदेश नहीं जा पाए,
'दूसरी तरफ़ गर्वीला स्वर,'विदेश में नौकरी लग गई है'........
भारत - यानि अपनी माँ को प्रायः सब भूल गए हैं
तो -बीती कहानी बंद करो!!!!!!!!
नहीं सुननी काहिलों, कायरों, मूर्खों और स्वार्थ में अंधे लोगों की बातें । देशहित से उनका अभिप्राय स्वहित होता है और यही तो हैं आज के आतंकी । गाँधी, नेहरु, भगत सिंह नहीं हैं तो क्या हुआ अब तो लोग रश्मि प्रभा को जानेंगे और आपकी रगों में दौड़ रहा है वंदे मातरम् की गूँज, तभी तो आपने अपने इकलौते बेटे को आर्मी में भेजा है । गौरवान्वित होते रहें विदेश जाने के नाम पर हम तो स्वदेश में ही आत्मसम्मान की भावना से भरे हुए रहते हैं । वैसे आपने आज का सच बयाँ किया है ।
जवाब देंहटाएंदेश?जहाँ से विदेश जाने की होड़ है..........
जवाब देंहटाएंएक सर शर्म से झुका है,'हम अब तक विदेश नहीं जा पाए,
'दूसरी तरफ़ गर्वीला स्वर,'विदेश में नौकरी लग गई है'........
भारत - यानि अपनी माँ को प्रायः सब भूल गए हैं
....Ati sundar bhav.
Respected Madum Ji
जवाब देंहटाएंYour poem is nice. pleae send me poems for katha chakra. for details log on to
http://katha-chakra.blogspot.com
कविता के माध्यम से आपने जो संदेस दिया हैं उसकी जितनी तारीफ की जाए कम हैं।AJAY SINGH(ONLY STUDENT)
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर लिखा है.समाज की सोच पर चोट करती सार्थक कविता..बधाई.
जवाब देंहटाएंबहुत खूब. समाज को आइना दिखाती कविता.
जवाब देंहटाएंसामयिक अभिव्यक्ति है बहुत बदिया
जवाब देंहटाएंvery nice ....keep it up....
जवाब देंहटाएंबेहद सुन्दर , आभार...!!
जवाब देंहटाएंबहुत सुदर कविता के लिऐ ...बधाई
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