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गुरुवार, 5 सितंबर 2013

कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव को ब्लागिंग हेतु काठमांडू में मिलेगा सम्मान

हिंदी ब्लॉगिंग के माध्यम से समाज और साहित्य के बीच सेतु निर्माण के निमित्त चर्चित  ब्लागर एवं इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को क्रमशः ”परिकल्पना साहित्य सम्मान” व  ”परिकल्पना ब्लॉग विभूषण सम्मान” के लिए चुना गया है। यह सम्मान 13-14 सितंबर 2013 को नेपाल की राजधानी काठमाण्डू के राजभवन में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘ में प्रदान किया जायेगा। इन सम्मान के अंतर्गत स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, श्री फल, पुस्तकें अंगवस्त्र और एक निश्चित धनराशि प्रदान किए जाएंगे। 

     गौरतलब है कि यादव दंपति एक लम्बे समय से साहित्य और ब्लागिंग से अनवरत जुडे़ हुए हैं। अभी पिछले वर्ष ही इन दम्पति को उ.प्र. के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा न्यू मीडिया ब्लागिंग हेतु ”अवध सम्मान” और हिन्दी ब्लागिंग के दस साल पूरे होने पर ”दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लागर दम्पति” सम्मान से भी नवाजा गया था। कृष्ण कुमार यादव जहाँ “शब्द-सृजन की ओर“ (www.kkyadav.blogspot.com/) और “डाकिया डाक लाया“ (www.dakbabu.blogspot.com/) ब्लॉग के माध्यम से सक्रिय हैं, वहीं आकांक्षा यादव “शब्द-शिखर“ (www.shabdshikhar.blogspot.com/) ब्लॉग के माध्यम से। इसके अलावा इस दंपत्ति द्वारा सप्तरंगी प्रेम, बाल-दुनिया और उत्सव के रंग ब्लॉगों का भी युगल संचालन किया जाता है। कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव ने वर्ष 2008 में ब्लॉग जगत में कदम रखा और 5 साल के भीतर ही विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लॉग  का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लागिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लागिंग को भी नये आयाम दिये। कृष्ण कुमार यादव के ब्लॉग सामयिक विषयों, मर्मस्पर्शी कविताओं व जानकारीपरक, शोधपूर्ण आलेखों से परिपूर्ण है; वहीं नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं और इनकी रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है। गौरतलब है कि इस ब्लागर दम्पति की सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को ब्लागिंग हेतु 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) ब्लॉग के लिए सबसे कम उम्र में 'राष्ट्रीय बाल  पुरस्कार' प्राप्त हो चुका है। अक्षिता को परिकल्पना समूह द्वारा श्रेष्ठ नन्ही ब्लागर के ख़िताब से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

    लगभग समान अभिरुचियों से युक्त इस दंपति की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर प्रकाशित होती रहती है। कृष्ण कुमार यादव की 6 कृतियाँ ”अभिलाषा” (काव्य संग्रह), ”अभिव्यक्तियों के बहाने” व ”अनुभूतियाँ और विमर्श” (निबंध संग्रह), इण्डिया पोस्ट: 150 ग्लोरियस ईयर्ज (2006) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” (2007), ”जंगल में क्रिकेट” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित हैं, वहीं आकांक्षा यादव की एक मौलिक कृति ”चाँद पर पानी” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित है।

बुधवार, 4 सितंबर 2013

देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र से सीखने की जरूरत - कृष्ण कुमार यादव


अखिल भारतीय श्री कृष्ण चेतना संस्थान के तत्वाधान में 1 सितम्बर, 2013 को श्री कृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन इलाहाबाद में किया गया। इस अवसर पर जहाँ भगवान श्री कृष्ण के विचारों को पुनः रेखांकित किया गया, वहीँ श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार  कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण साधारण व्यक्ति न होकर युग पुरुष थे। उनके व्यक्तित्व में भारत को एक प्रतिभासम्पन्न राजनीतिवेत्ता ही नहीं, एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक प्राप्त हुआ, जिसका गीता-ज्ञान समस्त मानव-जाति एवं सभी देश-काल के लिए पथ-प्रदर्शक है। डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस बात पर जोर दिया कि आज देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत है। राजनेताओं को उनकी विलक्षण राजनीति समझने की दरकार है और धर्म के प्रणेताओं, उपदेशकोंको यह समझने की आवश्यकता है कि श्रीकृष्ण ने जीवन से भागने या पलायन करने या निषेध का संदेश कभी नहीं दिया। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण ने कभी कोई निषेध नहीं किया। उन्होंने पूरे जीवन को समग्रता के साथ स्वीकारा है। 

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में इलाहाबाद के पूर्व जिलाधिकारी श्री महावीर यादव ने कहा कि हमारे अध्यात्म के विराट आकाश में श्रीकृष्ण ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों व ऊंचाइयों पर जाकर भी गंभीर या उदास नहीं हैं। इलाहाबाद विश्विद्यालय के प्रो. उमाकांत यादव ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की स्तुति लगभग सारे भारत में किसी न किसी रूप में की जाती है। यहाँ तक कि वे लोग जिन्हें हम साधारण रूप में नास्तिक या धर्म निरपेक्ष की श्रेणी में रखते हैं, वे भी निश्चित रूप से भगवतगीता से प्रभावित हैं। जिला सूचना अधिकारी जे. एस. यादव ने श्री कृष्ण के विचारों को सदैव प्रासंगिक बताया। संस्थान के अध्यक्ष इं. राम किशोर यादव ने सभी का स्वागत करते हुए भगवान श्री कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। संस्थान के महामंत्री जगदम्बा सिंह यादव ने सभी का आभार ज्ञापन किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया। 

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

नौवीं अखिल भारतीय छायाचित्र प्रदर्शनी का डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने किया उद्घाटन

श्री गंगा कल्याण समिति की ओर से दो दिवसीय नौवीं अखिल भारतीय लक्ष्मी छायाचित्र प्रदर्शनी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निराला आर्ट गैलरी में 12 अगस्त को शुरू हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवायें, कृष्ण कुमार यादव ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद कहा कि इस तरह की छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन नियमित रूप से होना चाहिए। इससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। डाक निदेशक श्री यादव ने कहा कि फोटोग्राफी एक विधा के साथ-साथ हमारे समाज और परिवेश का प्रतिबिंब भी है। मात्र आड़ी तिरछी लाइनें खींचनी ही फोटोग्राफी नहीं हैं बल्कि उसका यथार्थ भी निकलना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी राजशेखर ने फोटो प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन होना चाहिए जिससे कि कुछ नयापन लोगों को देखने को मिले। उन्होंने कहा कि छायाचित्र अपनी संस्कृति की पहचान को बढ़ावा देते हैं।  इससे अधिक से अधिक लोगों को जुड़ना चाहिए।

अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 अजय जेतली ने कहा कि इलाहाबाद शुरू से ही साहित्यकारों, कलाकारो का कर्मक्षेत्र रहा है। इस शहर से सभी क्षेत्रों में लोगांे में पहचान भी बनायी है।

छायाचित्र प्रदर्शनी के सचिव जितेन्द्र प्रकाश ने प्रदर्शनी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अगले वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय स्तर के छायाकारों के भी छायाचित्र प्रदर्शनी में देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस बार छायाचित्र प्रदर्शनी में 119 फोटोग्राफरों की 1160 तस्वीरें आयी थीं। श्रीमती लक्ष्मी अवस्थी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में वीरेन्द्र पाठक, एस के यादव, राजेश सिंह, पवन द्विवेदी, संजोग मिश्रा, विरेन्द्र प्रकाश, केनिथ जान, अनुराग अस्थाना, अमरदीप, रजत शर्मा, संजीव बनर्जी, संजय सक्सेना सहित बड़ी संख्या में छायाकार और अन्य लोग मौजूद रहे। संचालन वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष नारायण ने किया।



मंगलवार, 30 जुलाई 2013

Lamhi

कभी घिस्सू और 
माधो का गाँव 
प्रेरणा स्रोत रहा था 
उपन्यास सम्राट की लेखनी का 
आज जगमगा रहा था 
पिछली  रात से घिस्सू 
और माधो के पोते 
बाल्टी और ब्रश लिए 
प्रेमचंद की कर्म स्थली पर 
रंग रोगन कर रहे थे 
गाँव की सड़को को ठीक ठाक 
करने में लगे थे 
उन्हें पता चला है कि 
मुंशीजी की पुण्यतिथि पर 
कुछ खास लोग आने वाले है 
उनके लिखे कुछ खास तोहफे 
लाने  वाले है 
हामिद का चचा जान  पोता 
जी की रमजान में तक़रीबन 
हर रोजा रहने का 
प्रयास कर रहा था 
बड़ी लगन से गाँव की  पगडंडियों 
पर मिट्टी डालने का कार्य कर रहा था 
साथ ही सोचता जा रहा था 
कि खुद न सही 
सरकार की इबादत से 
रहमतो की बरसात होगी 
शायद अब किसी दादी की 
चिमटे के अभाव में 
हाथ नहीं जलेगी 

धनिया की नतनी जो 
अब इसी गाँव में आकर 
बस गयी थी 
आज शाम को प्रस्तावित 
पूस की रात के मंचन की 
प्रतीक्षा  कर रही थी 
उसे लगा की शायद 
इसी बहाने उसकी नाना नानी 
व उनके जज्बातों से 
पुनः मुलाकात होगी 
अपनी तमाम शिकायते उनके साथ 
शेयर करने में उसे 
कितनी ख़ुशी होगी 

तभी  हूटरो की आवाज से 
वातावरण में गर्माहट  छा  गया 
तमाम सरकारी अमला अलर्ट हो गया 
पीछे हटो  पीछे  हटो  की 
आवाज ने सबको चौकाया 
कुछ लोग आये 
दीप जलाये 
नारियल फोड़े गए 
संभ्रांत से दीख रहे कुछ 
लोगो ने माइक पर 
भाषण भी दिया 
कैमरे की फ्लश लैटो से 
वातावरण जगमगाया 
बाद उसके जैम कर नाश्ता किया 
पूरा गाँव अवाक् यह सब 
ठगा सा  ललचाई  नज़रों से 
नाश्ते  की ओर देखता रहा 

जींस और पेंट जैसे आधुनिक 
पहनावे में आये लोगो ने 
अपनी वैन में जाकर 
धोती और कुरता पहना 
नुक्कड़ नाटको की तर्ज पर 
पता नहीं क्या क्या नौटंकी किया 
थोड़ी देर में सब समेट 
एक दिवास्वप्न की तर्ज पर 
वापस चले गए 
घिस्सू माधो और धनिया के परिजन 
अपने पूर्वजो के साथ हो रहे 
इस मजाक को देखकर 
सकते में रह गए 

सोच रहे थे की 
उनके दादा दादियों की 
क्रन्तिकारी कहानियों के द्वारा 
मुंशीजी के सामाजिक दर्शन पर 
आज भी लोग सिर्फ  रोटिया 
सेक रहे है 
सरकारी अमले भी बस 
खानापूर्ति में लगे है 
हमारा तो सफ़र जहा से 
मुंशीजी ने प्रारंभ किया था 
वह से हमें सामाजिक 
चेतना की दरकार में 
और आगे जाना था 
पर अफ़सोस हम आज भी वही पड़े है 
अपनी मुठ्ठी भर जमीन पर 
खेती कर गुजर बसर 
कर रहे है 

कहा तो उन्हें एक नए 
सुबह की उम्मीद थी 
पर इस फीकी शाम ने 
उनकी आशाओ पर 
एक बार पुनः 
पानी फेर दी  थी 

निर्मेश 

शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

कफ़न

रीतेश  
अपनी  फ्लाइट 
आज कैंसिल करा दो 
मेरी तबियत ठीक नहीं लग रही 
हो सके तो कुछ और दिन 
साथ रह लो 
कहते खासते  खासते 
मिश्राजी की पसली चल रही थी 
बिजली नहीं होने से 
मिश्रीईन पास बैठी 
पंखा  हिला रही थी 

शुन्य   में काफी 
देर तक देखते 
अनायास कुछ सोचते 
हिम्मत जुटा कर रीतेश बोल 
पापा कैसे बताये 
कि  किस तरह हमने 
पत्नी और बच्चे के साथ 
पंद्रह दिन यहाँ बिताया 
पूरे इस प्रवास ने हमें 
कितना सताया 
कहा एक  ओर अमेरका का 
विलासित  जीवन 
कहाँ यह गाँव का 
वीरान मधुबन 
फिर भी किसी तरह मै 
यहाँ एडजस्ट कर रहा था 
आपकी सेवा कर अपना फर्ज 
पूरा कर रहा था 
मगर मेरे बॉस ने मेरी छुट्टी 
आगे मंजूर नहीं की है 
हमें तुरंत वापस आने की 
वार्निग दी है 
अतः मुझे आज ही 
जाना पड़ेगा 
अपने  भविष्य  हेतु 
यह कदम उठाना ही प होगा 

बाहर पूरा परिवार 
ऑटो में बैठ चूका था 
वह भी चलने को लगभग तैयार था 
माँ यह लो कुछ  रुपये रख लेना 
पापा यदि नहि  रहे तो 
तिख्ती और कफ़न का 
इंतजाम कर लेना 
कहते चौकी पर जैसे पैसा रखा 
उसे रोकते हुए मिश्राजी ने कहा 
बचवा ई बनारस है 
यहाँ लावारिसो को भी 
कफ़न मिल जाता है
दिन हिनो का भी लाश 
शान से 
जल जाता है 
अमेरका नहीं कि  जहाँ 
व्यक्ति तुम्हारी तरह इतना 
प्रोफेशनल हो जाता है 
कि अपने बाप की चिता को 
आग नहीं दे पाता है 
नजदीकी रिश्ते को भी 
पैसे से तौलता है 
मानवीय रिश्ते भी जहाँ 
इस कदर बिकते है 
कि रक्त पानी से सस्ते 
लगते है 

लो इस पैसे को 
अपने पास रख लेना 
मेरी चिंता छोड़  बेटा 
अपने लिए एडवांस में 
एक कफ़न खरीद लेना 
तुमने तो कम से कम इतना 
मेरे बारे में सोचा 
तुम्हारे  बेटे बेशक 
इसे खरीदने में करेंगे लोचा 
तुन्हारे लिए उन्हें कफ़न 
खरीदने की भी फुरसत 
नहीं होगी 
आखिर तो तुम्हारा बाप हू 
हमसे ज्यादा  बेटा 
तुम्हारी चिंता 
किसे होगी 

निर्मेश 

मंगलवार, 23 जुलाई 2013

अब काशी विश्वनाथ और महाकाल का प्रसाद मिलेगा आपके दरवाजे पर

सावन के मौसम में शिव की आराधना के लिए तमाम तैयारियां हो रही हैं. कहीं उनका दरबार सज रहा है तो कहीं आनलाइन आरती का प्रबंध किया जा रहा है. पर अब देश के किसी भी कोने में बैठे शिवभक्त काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस और महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन का प्रसाद भी घर बैठे ग्रहण कर सकेंगें. डाक विभाग यह सौगात लेकर आया है.


यह जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाक विभाग और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के बीच हुए एक एग्रीमेण्ट के तहत काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रसाद डाक द्वारा भी लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके तहत साठ रूपये का मनीआर्डर प्रवर डाक अधीक्षक, बनारस (पूर्वी) के नाम भेजना होता है और बदले में वहाँ से काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सौजन्य से मंदिर की भभूति, रूद्राक्ष, भगवान शिव की लेमिनेटेड फोटो और शिव चालीसा प्रेषक के पास प्रसाद रूप में भेज दिया जाता है।

निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का प्रसाद भी डाक द्वारा मंगाया जा सकता है। इसके लिए प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबन्धन कमेटी, उज्जैन को 151 रूपये का मनीआर्डर करना पड़ेगा और इसके बदले में वहाँ से स्पीड पोस्ट द्वारा प्रसाद भेज दिया जाता है। इस प्रसाद में 200 ग्राम ड्राई फ्रूट, 200 ग्राम लड्डू, भभूति और भगवान श्री महाकालेश्वर जी का चित्र शामिल है। निदेशक श्री यादव ने बताया कि इस प्रसाद को प्रेषक के पास एक वाटर प्रूफ लिफाफे में स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाता है, ताकि पारगमन में यह सुरक्षित और शुद्ध बना रहे। 


मौज

हाथो  में बड़ी बड़ी 
गत्ते की  ताख्तिया  लिए 
जिस  पर मन को  पसीजते 
नारे   लिखे
 क्षेत्रीय राहतकर्मियों का नेत्रित्व 
मोहल्ले के मुन्ना पहलवान 
चिल्ला चिल्ला कर 
कर  रहे थे 
लोगो से अनाज के साथ साथ 
पैसे  ईकठा करते 
मेरे भी रस्ते में वे पड़े 
जोर जोर से तकरीबन 
रोते  हुए बोले 
भैया बड़ा जुलुम होई गवा 
हुवन उत्तराखंड मा 
प्रलय आ गवा 
बहुतन मरिन गए 
बहुतन अबही हुवन फसे है 
उन्हींन का बचावे औ  सहायता  वदे 
हम सब निकल पड़े है 
आपो पुण्य कमाई 
कछु सहयोग करी 

मै  भी  भावनाओ के आवेग में 
तुरन्त  ताव  खा  गया 
पांच सौ का एक नोट 
उनके दान पात्र में डाल दिया 
एक बहुत ही बड़ा नेक कार्य 
सम्पादित करने का सुख 
सहसा ही पा गया 

शाम को लौटती बस से 
घरवापसी के लिए जैसे ही 
बस अड्डे उतरा 
पास के मधुशाला के निकट 
मुन्ना पहलवान को 
जमीन पर लेटे देखा 
मुझे लगा हे  भगवान 
ये क्या हो गया 
कही उत्तरा खन्दियन  की
सेवा करते करते 
ई शहीद तो नहीं हो गया 

पास जाने पर उसके 
मुंह से एक और जहाँ 
देशी  शराब की बदबू  आयी  
वही पास में उसके और साथियों की 
नशे में टुन्न देह पायी 

मुझे अब कुछ कुछ 
समझ में आ रहा था 
अपने ठगे जाने का अहसास 
अनायास हो रहा था 
उनमे से एक को कुछ 
होश में देख मैंने पूछा 

अरे भैया ई का होइ रहा 
लड़खड़ाते जुबान में वह बोला 
साहिब ई सब त लगा रहित है 
हमअन के भी राहत क 
जरूरत है 
हुवन उत्तराखंड में तो 
बहुत लोग रहत पहुचावत है 
हमअन  त  भी भूख  अऊ गरीबी 
मा मरत  हई 
पर हमका के पूछत है 
हमसब सोचा की चलेव 
ई बहती गंगा मा हमअन  भी 
हाथ धोई लेव 
बहुतै दिनन बाद 
दारू पिया अऊ मछली खावा है 
कल के वादे भी कछु  बचावा  है 

मैंने पूछा 
परसों का क्या होगा 
बोल साहेब 
इतना बढ़िया पैसा उतर आवा है 
कि कल परसों तो दूर 
नरसो  तरसो के बाद का भी 
जुगाड़ होई गवा है 
ओकरे बाद देखा जायेगा 
सबकुछ ठीकठाक  रहा 
प्रकृति पर हमअन क अत्याचार 
ऐसे ही जारी रहा 
त अऊर जगह भी जल्दिये 
बाढ औ प्रलय आयी 
संग अपने हमअन क भी 
मौज साथ लाई 

निर्मेश 

गुरुवार, 18 जुलाई 2013

डाकघरों से 18 जुलाई से मिलेंगे उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती फार्म

पुलिस भर्ती के आवेदन फार्म 18 जुलाई, 2013 से चयनित डाकघरों में मिलने शुरू हो जायेंगे। इस संबंध में
जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 169 डाकघरों से फार्म मिलेंगे, जिनमें इलाहाबाद परिक्षेत्र के 24 डाकघर शामिल हैं। यह फार्म 18 जुलाई से 20 अगस्त, 2013 तक बिक्री किये जायेंगे।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि डाकघरों के द्वारा दो अलग-अलग तरह के फार्म बिक्री किये जायंेगे। प्रथम प्रकार के आवेदन-पत्र (खाकी रंग का लिफाफा) ऐसे अभ्यर्थियों को निःशुल्क वितरित किये जाएंगे जिन्होंने उ0प्र0 पुलिस भर्ती परीक्षा-2011 के लिए उस समय आवेदन किया था तथा दूसरे प्रकार के आवेदन-पत्र (सफेद रंग का लिफाफा) अन्य अभ्यर्थियों को रू 200/- शुल्क लेकर वितरित किये जायेंगे। श्री यादव ने यह भी कहा कि निःशुल्क आवेदन पत्र को प्राप्त करने हेतु आवेदक को एक अनुरोध-पत्र व घोषणा पत्र भी देना होगा, जिसका प्रारूप डाकघरों में नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया है। निशुल्क दिये जाने वाले खाकी रंग के लिफाफे के अन्दर नारंगी रंग का ओएमआर आवेदन पत्र होगा व खाकी रंग का वापसी लिफाफा होगा, जबकि सशुल्क आवेदन पत्र का लिफाफा सफेद रंग का होगा और लिफाफे के अन्दर ओएमआर आवेदन पत्र का रंग मजेन्टा होगा व वापसी लिफाफे का रंग सफेद होगा। 

डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि संबंधित काउंटर सहायक द्वारा फार्म के सेट के साथ पावती पर्ची की 2 प्रतियाँ डाकघर के नाम व तारीख की मोहर लगाकर अभ्यर्थी को दी जायंेगी, जिसका उपयोग फार्म को वापस करते समय अभ्यर्थी द्वारा किया जायेगा। फार्म भरकर उसी डाकघर में वापस किया जायेगा जहाँ से वह खरीदा गया है। किसी भी स्थिति में दूसरे डाकघर द्वारा फार्म स्वीकार नहीं किया जायेगा। एक अभ्यर्थी को केवल एक ही फार्म दिया जायेगा।

निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि फार्मों की बिक्री हेतु व्यापक प्रबन्ध किये गये हैं एवं सशुल्क व निशुल्क आवेदनों हेतु अलग-अलग काउंटर चलाये जायेंगे।  उन्होंने कहा कि वाराणसी के वाराणसी प्रधान डाकघर, वारणसी कैंट प्र0 डा0, बी एच यू उपडाकघर, संत रविदास नगर के भदोही मुख्य डाकघर, ज्ञानपुर उपडाकघर, चन्दौली मुख्य डाकघर, मिर्जापुर के मिर्जापुर प्रधान डाकघर, चुनार उपडाकघर, राबर्ट्सगंज उपडाकघर, शक्तिनगर उपडाकघर, गाजीपुर के गाजीपुर प्रधान डाकघर, मोहम्मदाबाद युसुफपुर उपडाकघर, सैदपुर उपडाकघर व जौनपुर के जौनपुर प्रधान डाकघर व मडि़याहूं मुख्य डाकघर के माध्यम से फार्मों की बिक्री की जायेगी। डाकघरों से पुलिस भर्ती फार्म के सुचारू वितरण एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक पुलिस बल की तैनाती हेतु भी पुलिस अधिकारियों को लिखा गया है।








शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

हाईटेक होगा डाकघरों का कामकाज - बोले डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव


वाराणसी (पश्चिम) डाक मंडल अन्तर्गत नवीनीकृत प्रोजेक्ट ऐरो औराई व ज्ञानपुर उपडाकघर का लोकार्पण इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव द्वारा 11 जुलाई 2013 को शिलापट्ट के अनावरण द्वारा किया गया। इस अवसर पर डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने डाकघर में उपलब्ध सेवाओं का अवलोकन किया एवं प्रतीकात्मक रूप में स्पीड पोस्ट बुक कराकर शुभारंभ भी किया। 

    मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने अपने सम्बोधन में कहा कि प्रोजेक्ट ऐरो डाक विभाग की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका लक्ष्य डाकघरों का चेहरा पूर्णरूप से बदलना है। इसके तहत चयनित डाकघरों की कार्यप्रणाली को सभी क्षेत्रों में सुधार एवं उच्चीकृत करके पारदर्शी, सुस्पष्ट एवं उल्लेखनीय प्रदर्शन के आधार पर और आधुनिक बनाया जा रहा है। श्री यादव ने कहा कि डाक वितरण, डाकघरों के बीच धन प्रेषण, बचत बैंक सेवाओं और ग्राहकों की सुविधा पर जोर के साथ नवीनतम टेक्नोलाजी, मानव संसाधन के समुचित उपयोग एवं आधारभूत अवस्थापना में उन्नयन द्वारा विभाग अपनी ब्राण्डिंग पर भी ध्यान केन्द्रित कर रहा है। ये प्रयास न सिर्फ डाकघरों को उन्नत बनाएंगे बल्कि देश में सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने में भी डाक विभाग की भूमिका में अहम वृद्धि होगी। 



    डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट एरो के माध्यम से डाक विभाग अपनी मूल सेवा डाक वितरण पर विशेष रूप से जोर दे रहा है। डाक वितरण के तहत प्राप्ति के दिन ही सभी प्रकार की डाक चाहे वह साधारण, पंजीकृत, स्पीड पोस्ट या मनीआर्डर हो का उसी दिन शतप्रतिशत वितरण व डिस्पैच, लेटर बाक्सों की समुचित निकासी और डाक को उसी दिन की डाक में शामिल करना, डाक बीटों के पुनर्निर्धारण द्वारा वितरण को और प्रभावी बनाना एवं डाक वितरण की प्रतिदिन मानीटरिंग द्वारा इसे और भी प्रभावी बनाया जा रहा है। इसी प्रकार बचत बैंक सेवाओं  को पूर्णतया कम्प्यूटराइज्ड कर उनकी शतप्रतिशत डाटा फीडिंग और सिगनेचर स्कैनिंग भी कराई जा रही है, ताकि मैनुअली ढंग से कार्य संपादित करने पर होने वाली देरी से बचा जा सके। प्रोजेक्ट ऐरो के तहत बैंकिंग, धन भेजना, सूचनाओं के आदान-प्रदान की सुविधा एक ही खिड़की पर उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि औराई व ज्ञानपुर उपडाकघर कोर बैंकिंग साल्यूशन के तहत फेज 1बी में शामिल किये गये हैं, तदनुसार कालान्तर में यहाँ भी आनलाइन बैंकिग सेवायें उपलब्ध हो सकेंगी। 

 निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने यह भी बताया कि प्रोजेक्ट ऐरो के अन्तर्गत लुक एंड फील में उत्तर प्रदेश में 189 डाकघर व इलाहाबाद परिक्षेत्र में 25 डाकघर नवीनीकृत हो चुके है। इनमें वाराणसी के वाराणसी प्रधान डाकघर, कैंट प्रधान डाकघर, बी एच यू डाकघर, मुगलसराय डाकघर, भदोही डाकघर, चन्दौली डाकघर, चकिया डाकघर के साथ-साथ अब  ज्ञानपुर व औराई उपडाकघर भी शामिल हैं 
     
            डाक अधीक्षक वाराणसी (पश्चिम) श्री आर एन यादव ने अतिथियों का स्वागत किया एवं कहा कि औराई व ज्ञानपुर डाकघरों के उन्नयन से नागरिकों को काफी सहूलियत होगी एवं उन्हें डाक विभाग की आधुनिक सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। इन डाकघरों के प्रोजेक्ट एरो के अन्तर्गत कायाकल्प होने के साथ ही दूर-दराज ग्रामीण अंचलों में इसके लेखान्तर्गत स्थित शाखा डाकघरों की कार्यप्रणाली में भी काफी पारदर्शिता आयेगी।

            इस अवसर पर सहायक डाक अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव, आर के श्रीवास्तव, पोस्टमास्टर औराई श्री सुरेन्द्र प्रताप सिंह, पोस्टमास्टर ज्ञानपुर श्री डी के राय, डाक निरीक्षक श्री अर्जित सोनी, संजय सिंह, सहायक अभियन्ता लक्ष्मी शंकर मिश्रा, सिस्टम मैनेजर आर के श्रीवास्तव, सहित तमाम अधिकारी, कर्मचारी, जन प्रतिनिधि, मीडियाकर्मी, बचत अभिकर्ता व नागरिकगण उपस्थित थे।