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मंगलवार, 9 जुलाई 2013

बरसात

बरसात की  आहट  ने 
एक और जहा 
नवधनाड्यो को 
इठलाने  का मौका 
दे दिया है 
उनके  लान में 
काफी दिनों से सुनसान पड़े 
झूलो को पुनः इतराने का 
मौका दे दिया था 

वही भूरे  का दिल 
बादलों की घरघराहट से 
घबरा रहा था 
बिजलियों की अनवरत 
चमक तड़क से 
उसका दिल बैठा जा रहा था 
हे भगवन कैसे इस बार वह 
झेलेगा इस बरसात को 
याकि शांत करेगा वह 
पहले वह अपने पेट की आग को 

अट्टालिकाओ और 
बनगे के बाशिंदे जहाँ 
एक और रिमझिम बरसात 
के स्वागत हेतु 
तत्परता से इक्छुक हो रहे थे 
पनीर पकौड़े और ड्रिंक  के साथ 
बनकुएत  हालो  में 
या अपने किसी के लानो में 
रेन डांस की तयारी में लगे थे 

वही भूरे अपने झोपड़े में बैठा 
अपने छत को निहार रहा था 
सोचता पिछली बार तो 
जैसे तैसे निकल गया था 
कम बारिस से उसकी मुसीबत 
कुछ कम हो गयी थी 
इस बार के  आसार से 
आतंकित उसके पैरो के निचे की 
जमीं धसक रही थी 

पिछले साल पत्नी की बीमारी से 
उसक बजट बिगड़ गया था 
उसके पिछले साल 
बाबु के आवासन व उनके
तेरहवी के भोज में 
वह हिल गया था 
इस बार भी सोच रहा था की 
पप्पू का दाखिला
कान्वेंट में करा दिया जाय 
ताकि उ भी कुछ पढ़ लिख कर 
एक ओहदेदार बन जाय 
वरना मेरी तरह एक 
ऑटो ड्राईवर ही बना रहेगा 
जिंदगी को मेरी ही  
तरह  खीचेगा 

इसी उधेड़बुन में 
उसके आँखों की नीद उड़ हुकी थी 
वह लेता छत निहारता रह गया 
जब की कब की सुबह हो चुकी थी 

बहार कुछ शोरगुल सुनाई 
दे रहा था 
बहार आकर देखने पर 
पता चला था 
उत्तराखंड भीषण जलप्रवाह में 
बह रहा था 
हजारों मासूमो और निर्दोषों को 
वह प्रलय बन 
बहा ले गया था 
लाखों तीर्थयात्री आज भी 
वहां दुर्गम स्थानों पर फसे है 
हमारी सहायता का बाट  जोह रहे है 
लोग उनकी सहायता के लिए 
चन्दा उतर रहे है 
वह तुरंत अन्दर गया 
अपने गाढ़े समय के लिए 
बचा कर रखे गए पैसे को 
उन राहतकर्मियों के हाथ में रख दिया 
पुनः अपनी छत की ओर देख 
मुस्कराता रह गया 

निर्मेष 

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

राजा बेटा



पापा आज शाम तक मुझे

मेरा विडिओ गेम मिलेगा

बन्दा तभी कल स्कूल के लिए हिलेगा

बिंदास कहते मै

बैग लेकर

स्कूल के लिए चला गया

पापा के लिए एक नई चिंता छोड़ गया



एकलौता होने से

जिद मेरे नाक पर रहती थी

प्राइवेट फर्म में कार्यरत

पापा के कम आय की

मुझे कोई फिकर नहीं थी



हर मांग पूरी होने से

एक नई मांग

पुनः पैदा हो जाती

पापा कैसे

पूरे परिवार के खर्च के साथ

उसे पूरा करते थे

इसकी मुझे उस समय तक

तनिक भी खबर नहीं होती



शाम को पापा के हाथ में

एक पाया

ख़ुशी से छीन कर उसे

मै चिल्लाया

लेकर बाहर दोस्तों को

दिखाने भगा

दोस्तों को न पाकर

मायूस मै घर लौट आया



बैठक में मम्मी को

पापा से कहते सुना

आप दिन रात इतना मेहनत करते है

जान देकर ओवरटाइम करते है

तब जाकर किसी तरह

सबके पेट भरते है

आपके पास बस

दो शर्ट और दो जोड़ी जुराबे धरी है

ऊपर से सब फटे पड़ी है

व्यर्थ ही पप्पू की जिद

पूरा करने में परेशान रहते है

जो की समाप्त होने की जगह

नित नए बढ़ते है



पापा चेहरे पर एक मायूस फीकी

हंसी लाते हुए बोले

भाग्यवान बच्चा है

चलो कभी तो समझेगा

बचपन उसके जीवन में

दुबारा क्या पनपेगा

मेरा क्या सर्दी का सफ़र है

जुराबे जूते के और

शर्ट स्वेटर के अन्दर है

फिर कभी बन जायेगा

पर पप्पू का बचपन

दोबारा कहाँ से आयेगा



मम्मी पापा की इस

मर्मश्पर्शी वार्ता ने

मुझे हिला कर रख दिया

एकाएक मेरे ज्ञानेन्द्रियों को

जगा कर रख दिया

मै दौड़ कर पापा के

सीने से लग गया

सुबकते हुए कहा

पापा इसे अभी जाकर

वापस कर आओ

अपने लिए पहले एक जोड़ी

जुराबे और एक शर्ट लाओ

कहते कहते मै

फूट फूट कर रो पड़ा

तभी पापा का स्नेह्सिंचित हाथ

मेरे सर पर पड़ा



बोले नहीं बेटा

दोषी तो मै हूँ

जो कि अपने बेटे की

एक छोटी सी मांग भी

पूरी करने में अक्षम हूँ

तुम्हारे प्रतिरूप में मैंने

अपने बचपन को देखा है

कोई कुछ भी कहे पर

तू तो मेरा

राजा बेटा है



निर्मेश



बुधवार, 12 दिसंबर 2012

12-12-12

 
12-12-12
 
!! सबके लिए शुभ हो !! 

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

दुशाला

ड्धर कई दिनों से

भयंकर पूस की ठण्ड में

दिनेश माँ को मंदिर

सत्संग जाने में हो रहे

कष्टों को देख रहा था

मगर लाचार

अपनी सीमित आय के कारण

कुछ सकारात्मक पहल

कर नहीं प् रहा था



बापू की मौत के बाद

अब यही सब माँ के

समय काटने का सहारा था

वरना बहू को भी बड़ी उमंग से

माँ ने ब्याह कर लाया था

पर जैसा की होता आया था

बहू से उसने कुछ खास

सुख नहीं पाया था



दिनेश दोनों के बीच

किसी तरह सेतु और संतुलन

बनाने का प्रयास कर

अपनी गाड़ी चलाता रहा

हर बार माँ को ही पीछे हट

अपने अरमानो का

गला घोटते पाया था



फैक्ट्री से निकलते हुए

दिनेश अपनी तनख्वाह के

रुपये गिन रहा था

माँ को हो रहे कष्ट के बारे में

सोचते हुए माँ से आज एक

बढ़िया गरम दुशाला लेकर

आने का सुबह ही

वादा कर आया था

तभी रास्ते में मोबाइल घनघनाया

उधर से फोन पर

पत्नी को पाया



मेरी माँ आज शाम को

आपकी माँ को देखने आ रही है

कुछ पोते पोतियों को भी

अपने साथ ला रही है

नाश्ते में चुरा मटर और गाजर के

हलवे का पत्नी से फरमान पाया

ऊसका मन झुझलाया

मरता क्या न करता

सभी समानो के साथ फिर भी

अपनी माँ के लिए

भविष्य के वित्तीय संकतो से अंजान

एक बढ़िया गरम दुशाला

आखिर खरीद ही लिया

और देखते ही देखते

घर आ गया



पत्नी ने शीघ्रता से आगे बढ़

उसके हाथ के बोझ को हल्का किया

महंगा बढ़िया दुशाला देख

उसका दिल बाग बाग हो गया

तुरन्त उसे अपनी माँ को

ओढ़ते हुए बोली

देखो मम्मी आपके दामाद

मेरे दिल की बात

कितनी जल्दी जान जाते है

सच ये आपको कितने मानते है

आपके लिए कुछ न कुछ

करते ही रहते है

इसीलिये तो सभी रिश्तेदार

हमसे इतना जलते है



सामने दिनेश के माँ

खामोश खड़ी पूरे घटनाक्रम का

मूर्तिवत अध्ययन कर रही थी

अपने बच्चे के अरमानो की होली

जलते हुए बेबस देख रही थी

साथ ही दिनेश की आँखों में

अपने लिये एक विशेष

तड़प भी पा रही थी



उसे अपराधबोध से

बचाने के लिए

उसे आँखों ही आँखों में

दिलासा दे रही थी

साथ ही बहू के माँ के सामने

बहू के तरोफो के पुल भी

धाराप्रवाह बाधे चली

जा रही थी



निर्मेश

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

ढलते सूरज के साथ
पथरीले घाटों ने
हर हर महादेव का
उदघोष किया
जीवन्तता का अहनद
नाद दिया
आँचल में समेटे
अनेक छोटे दिनकरो को
एक नूतन श्रृष्टि का
आगाज किया

स्वप्निल
अद्भुत
अवर्णनिय
शब्दहीन वाणी
मौन मूर्तिवत आकांक्षाये
सुसज्जित देख
अर्धचन्द्राकार कंठ
भागीरथी का
प्रसंग देव दीपवाली का

धन्य हे भारत
धन्य तेरी अक्षुण
परम्परा और संस्कृति का
उपवन
हे आर्यभूमि
तुझको शत शत
नमन

निर्मेश

सोमवार, 26 नवंबर 2012

ब्रेनवाश

बस के लिए लाइन में
खड़े खड़े इधर कुछ दिनों से
उसे मैं उसके दुधमुंहे बच्चे के साथ
फटी साडी में किसी तरह
अपने युवा तन को समेटे
सड़क के उस पार
बरगद के पेड़ के नीचे
हाथ से बने मिटटी के कुछ
देहाती खिलौने के साथ
दिये और कुल्हड़
बेचते देखता था
उसके अतीत से अज्न्जन
मगर पता नहीं क्यों
उसके भविष्य के बारे में भी
अक्सर मै सोचता था

कभी कभी उसके पति के साथ
उससे होती बहस पर भी
मेरी नजर पड़ जाती थी
दोनों के बीच बाते बढ़ते बढ़ते
मर पीट पर उतर जाती थी
बड़ी मुश्किल से
बिक्री से प्राप्त सारे पैसे को
जबरन छीन वह
चम्पत हो जाता
बच्चे के साथ उसे
बिलखते छोड़ जाता
सिलसिला यह लगभग
अनवरत था

आज एकाएक वह मुझे
खामोश नजर आ रही थी
बच्चे पर नजर पड़ी तो
उसमे भी कोई हलचल
नहीं दीख रही थी
थक कर सो रहा होगा
मई सोचता रहा
बस के आने की
प्रतीक्षा करता रहा

तभी लाइन में आगे
खड़े व्यक्ति से पता चला
जेड की अंगड़ाई को
शायद वह नवजात
सही नहीं पाया था
आज सुबह ही भगवान को
प्यारा हो गया था

तभी अचानक उसका पति
गिरते भाहराते नशे में
धुत आ गया
उससे पैसे की अपनी मांग को
एक बार पुनः दोहरा गया
उसकी पथरीली बेबस और
लाचार आँखों ने
आंसुओं का साथ
छोड़ दिया था
नैन के कोरो से आंसुओ ने
पथ अपन बना लिया था
संग्याशून्य उसने बच्चे की और
हाथ से पैसे के अभाव में
उसके मर जाने का ईशारा किया
सामान बन बिक पाने के कारन
उसे पैसा देने में अपनी
असमर्थता जताया
बदले में एक लत के साथ
गलिओयों के सौगात पाया
बच्चे के अवसान से पीड़ित
उसका थका और कमजोर शरीर
कुल्हड़ और दिया पर
आशियाना बनाते हुए
कटे पेड़ की तरह भहरा गया
इस दिशा में तमाम चल रहे
प्रयासे के उपरांत
आज भी एक लाचार
ट्रडिशनल भारतीय नारी के
इतिहास को दोहरा गया
पान का पीक उसके ऊपर
थूकते वह बोला
साली कल शाम से
धंधा कर रही है
उसमे से मैंने कुछ मांग लिया तो
पंगा और नाटक कर रही है

मुझे उसके पान के रक्त सी
पीक में उस बच्चे को
लहूलुहान अक्स दिखा
मै विचलित हो गया था
निसंदेह आगामी एक
सप्ताह के लिए मेरा
ब्रेनवाश हो गया था

निर्मेष

रविवार, 25 नवंबर 2012

आगामी बाल-दिवस पर 'डाक-टिकट' के लिए बच्चों ने बनाई पेंटिंग

हॉलिडे भला किसे नहीं भाता। हर बच्चे की अपनी कल्पनाएँ होती हैं कि हॉलिडे को कैसे खूबसूरत और यादगार बनाया जाय। और जब मौका इन्हें पेंटिंग के रूप में चित्रित करने का हो तो कैनवास पर कई तरह के रंग उभर कर आते हैं।  डाक विभाग द्वारा 23 नवम्बर, 2012 को आयोजित “डिजाईन ए  स्टाम्प” प्रतियोगिता में हॉलिडे विषय पर बच्चों ने पेंटिंग में ऐसे ही रंग बिखेरे।
 
       इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इस प्रतियोगिता में इलाहबाद परिक्षेत्र में कुल 389 बच्चों ने भाग लिया, जिनमे इलाहाबाद में 37, प्रतापगढ़ में 78, जौनपुर में 79, व वाराणसी में 192 प्रतिभागी बच्चे  शामिल हैं।  इलाहाबाद  में कुल 18 स्कूलों के बच्चों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिनमे सैंट एंथोनी  गर्ल्स इन्टर कॉलेज, बिशप जॉन्सन इंटर कालेज, डा. के. एन. काटजू इंटर कालेज, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर, वशिष्ठ वात्सल्य पब्लिक स्कूल, पतंजलि ऋषिकुल इत्यादि शामिल हैं। सभी विद्यार्थियों को तीन समूहों में विभाजित किया गया - कक्षा 4 तक के विद्यार्थी, कक्षा 5 से कक्षा 8 तक के विद्याथी एवं कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी ।
 
 निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि इन सभी प्रविष्टियों का मूल्यांकन रीजनल स्तर पर करने के बाद तीनों वर्गों में श्रेष्ठ प्रविष्टि को निदेशालय स्तर पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल करने हेतु परिमंडलीय कार्यालय लखनऊ भेजा जायेगा और  सभी श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्तर पर क्रमशः 10,000, 6,000 एवं 4,000 रूप्ये के तीन-तीन पुरस्कार राष्ट्रीय स्तर पर दिये जायेगें । राष्ट्रीय स्तर पर चुनी गयी पुरस्कृत प्रविष्टियों के आधार पर ही अगले वर्ष बाल दिवस पर डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण एवं मिनियेचर शीट इत्यादि का प्रकाशन किया जायेगा। इस अवसर पर स्कूली बच्चों , शिक्षको व अभिभावकों ने फिलाटेलिक डिपाजिट अकाउंट खोलने में भी रूचि दिखाई जिसके तहत उन्हें हर माह घर बैठे डाक टिकटें प्राप्त हो सकेंगी

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

ब्रेनवाश

ब्रेनवाश बस के लिए लाइन में खड़े खड़े इधर कुछ दिनों से उसे मैं उसके दुधमुंहे बच्चे के साथ फटी साडी में किसी तरह अपने युवा तन को समेटे सड़क के उस पार बरगद के पेड़ के नीचे हाथ से बने मिटटी के कुछ देहाती खिलौने के साथ दिये और कुल्हड़ बेचते देखता था उसके अतीत से अज्न्जन मगर पता नहीं क्यों उसके भविष्य के बारे में भी अक्सर मै सोचता था कभी कभी उसके पति के साथ उससे होती बहस पर भी मेरी नजर पड़ जाती थी दोनों के बीच बाते बढ़ते बढ़ते मर पीट पर उतर जाती थी बड़ी मुश्किल से बिक्री से प्राप्त सारे पैसे को जबरन छीन वह चम्पत हो जाता बच्चे के साथ उसे बिलखते छोड़ जाता सिलसिला यह लगभग अनवरत था आज एकाएक वह मुझे खामोश नजर आ रही थी बच्चे पर नजर पड़ी तो उसमे भी कोई हलचल नहीं दीख रही थी थक कर सो रहा होगा मई सोचता रहा बस के आने की प्रतीक्षा करता रहा तभी लाइन में आगे खड़े व्यक्ति से पता चला जेड की अंगड़ाई को शायद वह नवजात सही नहीं पाया था आज सुबह ही भगवान को प्यारा हो गया था तभी अचानक उसका पति गिरते भाहराते नशे में धुत आ गया उससे पैसे की अपनी मांग को एक बार पुनः दोहरा गया उसकी पथरीली बेबस और लाचार आँखों ने आंसुओं का साथ छोड़ दिया था नैन के कोरो से आंसुओ ने पथ अपन बना लिया था संग्याशून्य उसने बच्चे की और हाथ से पैसे के अभाव में उसके मर जाने का ईशारा किया सामान बन बिक पाने के कारन उसे पैसा देने में अपनी असमर्थता जताया बदले में एक लत के साथ गलिओयों के सौगात पाया बच्चे के समय अवसान से पीड़ित उसका थका और कमजोर शरीर कुल्हड़ और दिया पर आशियाना बनाते हुए कटे पेड़ की तरह भहरा गया इस दिशा में तमाम चल रहे प्रयासे के उपरांत आज भी एक लाचार ट्रडिशनल भारतीय नारी के इतिहास को दोहरा गया पान का पीक उसके ऊपर थूकते वह बोला साली कल शाम से धंधा कर रही है उसमे से मैंने कुछ मांग लिया तो पंगा और नाटक कर रही है मुझे उसके पान के रक्त सी पीक में उस बच्चे को लहूलुहान अक्स दिखा मै विचलित हो गया था निसंदेह आगामी एक सप्ताह के लिए मेरा ब्रेनवाश हो गया था निर्मेष

सोमवार, 12 नवंबर 2012

सागर उवाच






कलम पकडने के बाद सिर्फ एक काम रह जाता है कागज काला करना।
कलम पकडना बन्दूक पकडने से ज्यादा खतरनाक हुनर है क्योकि इनकाउंटर करके बच सकते हैं मगर कलम से वार करके बचना मुकिल है। सो समहल के चलाना पडता है।लिखास और छपास के बीच संतुलन रखना बडा मुश्किल होता है इसलिए हर कुछ एक धार से कह पाना भी मुम्किन नहीं इस लिए मैंने बनाया एक नया ब्लाग सागर उवाच!  सागर उवाच माध्यम होगा गम्भीर व कठोर शब्दों को हल्के-फुल्के में कह के निकल जाने का। क्योंकि सेंसरशिप से भी सामना करना है!

एक अदद प्रतिक्रिया के इंतजार में....

http://sagaruwaach.blogspot.in/


शनिवार, 3 नवंबर 2012

ब्लागर दम्पति आकांक्षा-कृष्ण कुमार यादव को उ. प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा 'अवध सम्मान'

(हिंदी-ब्लागिंग को कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा जी ने कई नए आयाम दिए हैं..उसी कड़ी में ब्लागिंग के प्रति समर्पित दम्पति कृष्ण कुमार और आकांक्षा जी को उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा 'अवध सम्मान' से अलंकृत करने पर हार्दिक बधाइयाँ.)
जीवन में कुछ करने की चाह हो तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। हिन्दी-ब्लागिंग के क्षेत्र में ऐसा ही रास्ता अखि़्तयार किया दम्पति कृष्ण कुमार यादव व आकांक्षा यादव ने। उनके इस जूनून के कारण ही आज हिंदी ब्लागिंग को आधिकारिक तौर पर भी विधा के रूप में मान्यता मिलने लगी है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने 1 नवम्बर, 2012 को इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को ‘न्यू मीडिया एवं ब्लागिंग’ में उत्कृष्टता के लिए एक भव्य कार्यक्रम में ‘अवध सम्मान’ से सम्मानित किया गया. जी न्यूज़ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ताज होटल, लखनऊ में किया गया था, जिसमें विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया, पर यह पहली बार हुआ जब किसी दम्पति को युगल रूप में यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया. ब्लागर दम्पति को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहाँ न्यू मीडिया के रूप में ब्लागिंग की सराहना की, वहीँ कृष्ण कुमार यादव ने अपने संबोधन में उनसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा दिए जा रहे सम्मानों में ‘ब्लागिंग’ को भी शामिल करने का अनुरोध किया. आकांक्षा यादव ने न्यू मीडिया और ब्लागिंग के माध्यम से भ्रूण-हत्या, नारी-उत्पीडन जैसे मुद्दों के प्रति सचेत करने की बात कही. अन्य सम्मानित लोगों में वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी, चर्चित लोकगायिका मालिनी अवस्थी, ज्योतिषाचार्य पं. के. ए. दुबे पद्मेश, वरिष्ठ आई.एस. अधिकारी जय शंकर श्रीवास्तव इत्यादि प्रमुख रहे.

जीवन में एक-दूसरे का साथ निभाने की कसमें खा चुके कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव, साहित्य और ब्लागिंग में भी हमजोली बनकर उभरे हैं. कृष्ण कुमार यादव ब्लागिंग और हिन्दी-साहित्य में एक चर्चित नाम हैं, जिनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उनके जीवन पर एक पुस्तक ’बढ़ते चरण शिखर की ओर’ भी प्रकाशित हो चुकी है। आकांक्षा यादव भी नारी-सशक्तीकरण को लेकर प्रखरता से लिखती हैं और उनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव ने वर्ष 2008 में ब्लाग जगत में कदम रखा और 5 साल के भीतर ही सपरिवार विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लागिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लागिंग को भी नये आयाम दिये। कृष्ण कुमार यादव का ब्लॉग ‘शब्द-सृजन की ओर’ (http://www.kkyadav.blogspot.in/) जहाँ उनकी साहित्यिक रचनात्मकता और अन्य तमाम गतिविधियों से रूबरू करता है, वहीँ ‘डाकिया डाक लाया’ (http://dakbabu.blogspot.in/) के माध्यम से वे डाक-सेवाओं के अनूठे पहलुओं और अन्य तमाम जानकारियों को सहेजते हैं. आकांक्षा यादव अपने व्यक्तिगत ब्लॉग ‘शब्द-शिखर’ (http://shabdshikhar.blogspot.in/) पर साहित्यिक रचनाओं के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और विशेषत: नारी-सशक्तिकरण को लेकर काफी मुखर हैं. इस दम्पति के ब्लागों को सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भरपूर सराहना मिली। कृष्ण कुमार यादव के ब्लाग ’डाकिया डाक लाया’ को 98 देशों, ’शब्द सृजन की ओर’ को 75 देशों, आकांक्षा यादव के ब्लाग ’शब्द शिखर’ को 68 देशों में देखा-पढ़ा जा चुका है. सबसे रोचक तथ्य यह है कि यादव दम्पति ने अभी से अपनी सुपुत्री अक्षिता (पाखी) में भी ब्लागिंग को लेकर जूनून पैदा कर दिया है. पिछले वर्ष ब्लागिंग हेतु भारत सरकार द्वारा ’’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’’ से सम्मानित अक्षिता (पाखी) का ब्लाग ’पाखी की दुनिया’ (http://pakhi-akshita.blogspot.in/) बच्चों के साथ-साथ बड़ों में भी काफी लोकप्रिय है और इसे 98 देशों में देखा-पढ़ा जा चुका है। इसके अलावा इस ब्लागर दम्पति द्वारा ‘उत्सव के रंग’, ‘बाल-दुनिया’, ‘सप्तरंगी प्रेम’ इत्यादि ब्लॉगों का भी सञ्चालन किया जाता है.

इस अवसर पर उ.प्र. विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय, रीता बहुगुणा जोशी, प्रमोद तिवारी, केबिनेट मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, अनुप्रिया पटेल, मेयर दिनेश शर्मा सहित मंत्रिपरिषद के कई सदस्य, विधायक, कार्पोरेट और मीडिया से जुडी हस्तियाँ, प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार, पत्रकार, कलाकर्मी व खिलाडी इत्यादि उपस्थित रहे. आभार ज्ञापन जी न्यूज उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के संपादक वाशिन्द्र मिश्र ने किया.

-डा. विनय कुमार शर्मा
प्रधान संपादक-संचार बुलेटिन (अंतराष्ट्रीय शोध जर्नल)
448/119/76, कल्याणपुरी, ठाकुरगंज, चैक, लखनऊ-226003

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

राम शिव मूर्ति यादव को 'साहित्य-मंडल', श्रीनाथद्वारा द्वारा 'हिंदी भाषा-भूषण' की मानद उपाधि


देश-विदेश में प्रतिष्ठित साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्था 'साहित्य-मंडल', श्रीनाथद्वारा ( राजस्थान) ने प्रखर लेखक श्री राम शिव मूर्ति यादव को उनकी हिंदी सेवा के लिए हिंदी दिवस (14 सितम्बर, 2012 ) पर आयोजित दो दिवसीय सम्मलेन में "हिंदी भाषा-भूषण" की मानद उपाधि से अलंकृत किया | हिंदी के विकास को समर्पित इस सम्मलेन में देश-विदेश के तमाम साहित्यकारों और लेखकों ने भाग लिया | गौरतलब है कि 'साहित्य-मंडल', श्रीनाथद्वारा की स्थापना आजादी से पूर्व वर्ष 1937 में हुई थी और तभी से यह प्रतिष्ठित संस्था हिंदी को समृद्ध करने और हिंदी-सेवियों को उनके योगदान के आधार पर सम्मानित कर अपनी गौरव-गाथा में वृद्धि कर रही है. इस वर्ष श्री राम शिव मूर्ति यादव को उनकी विशिष्ट हिंदी सेवा के लिए साहित्य-मण्डल, श्रीनाथद्वारा के अध्यक्ष श्री नरहरि ठाकर एवं हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग व साहित्य-मण्डल, श्रीनाथद्वारा के सभापति श्री भगवती प्रसाद देवपुरा ने सारस्वत सम्मान करते हुए उपाधि-पत्र, भगवान श्रीनाथ जी की भव्य स्वर्ण जल से हस्तनिर्मित सुशोभित चित्र एवं अन्य मानद वस्तुएं भेंट किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मलेन में विचार गोष्ठी,सम्मान समारोह व साहित्यकारों द्वारा बैंड बाजों के साथ नगर भ्रमण द्वारा हिंदी का प्रचार -प्रसार व जागरूकता का आयोजन भी किया गया |

उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्ति पश्चात तहबरपुर-आजमगढ़ जनपद निवासी श्री राम शिव मूर्ति यादव एक लम्बे समय से तमाम प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक विषयों पर प्रखरता से लेखन कर रहे हैं। श्री यादव की सामाजिक व्यवस्था एवं आरक्षणनाम से एक पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है। आपके तमाम लेख विभिन्न स्तरीय संकलनों में भी प्रकाशित हैं। इसके अलावा आपके लेख इंटरनेट पर भी तमाम चर्चित वेब/ई/ऑनलाइन पत्र-पत्रिकाओं और ब्लाग्स पर पढ़े-देखे जा सकते हैं। यदुवंशियों पर आधारित प्रथम हिंदी ब्लॉग यदुकुल” (http://www.yadukul.blogspot.in/) का भी आप द्वारा 10 नवम्बर 2008 से सतत संचालन किया जा रहा है। दुनिया भर के लगभग 65 देशों में पढ़े जाने वाले इस ब्लॉग को 293 से ज्यादा लोग नियमित रूप से अनुसरण करते हैं, वहीँ इस ब्लॉग पर अब तक 315 से ज्यादा पोस्ट प्रकाशित हो चुकी हैं। इस ब्लॉग की लोकप्रियता का अंदाजा इसे से लगाया जा सकता है कि आज इस ब्लॉग को करीब 65,000 से ज्यादा लोग पढ़ चुके हैं।

इससे पूर्व श्री राम शिव मूर्ति यादव जी को भारतीय दलित साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा सामाजिक न्याय सम्बन्धी लेखन एवं समाज सेवा के लिए 'ज्योतिबाफुले फेलोशिप सम्मान' (2007), 'डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान' (2011), अम्बेडकरवादी साहित्य को प्रोत्साहित करने एवं तत्संबंधी लेखन हेतु रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष श्री रामदास आठवले द्वारा अम्बेडकर रत्न अवार्ड 2011', राष्ट्रीय राजभाषा पीठ, इलाहाबाद द्वारा विशिष्ट कृतित्व एवं समृद्ध साहित्य-साधना हेतु भारती ज्योतिसम्मान, आसरा समिति, मथुरा द्वारा बृज गौरव‘, म.प्र. की प्रतिष्ठित संस्था समग्रताशिक्षा साहित्य एवं कला परिषद, कटनी द्वारा 'भारत-भूषण' (2010) की मानद उपाधि से अलंकृत किया जा चूका है। श्री राम शिव मूर्ति यादव को उनके सृजनात्मक एवं मंगलमयी जीवन के लिए अनंत शुभकामनाएं।

-प्रस्तुति : श्री गोवर्धन यादव, संयोजक-राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, छिंदवाडा, मध्य प्रदेश.


 

शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

लत

लत अबे रुक कहाँ जा रहा है चल निकल पैसा ठीक अभी चलना है कहते एक ने दूसरे का गला पकड़ लिया था दूसरा बड़े ही कातर स्वर में रिरिया रहा था झगड़े के मध्य हो रही बातचीत से पता चला एक का नाम था धन्नू दूसरे का शीतला काल रात धन्नू ने शीतला के साथ शीतला के पैसे से भदैनी के देशी ठीके पर छक कर दारू पिया था जीवन का असीम आनंद लिया था आज सबेरे ही पुनः शीतला से धन्नू का अमन सामना हो गया था मै भी अपनी लम्बी वाक से वापस आ रहा था धन्नू बिलबिला रहा था भैया पैसा नहीं हौ रहेन देब कौनो और दिन तोहके पिया देब ई जेब में तो पैसा दिख रहा है साले हमको बेवकूफ बना रहा है चल चल कहते शीतला ने अपने मजबूत हाथो से जबरन धन्नू के हाथों को रख दिया ऐठ कर दम लेकर ही माना पूरा पैसा निकाल कर शीताला भैया ई माई के इन्हालेर क पैसा हौ काल रतिए से माई का साँस बड़ी तेज फूलत हौ आपण त काल कामे न लागल एही वदे काल तोहर पीयल चच्चा से उधार लैके दवाई वदे जात हई भैया दै द पइसवा माई जोहत होई चलबे क़ी नाही साले बेवकूफ बनावत हौवे नाही त हम जात हई अकेल्वे पिये कहते शीतला उसके पैसे को लिए अकेले ही ठीके क़ी ओर निकल गया बलिष्ठ शीतला के मुकाबले कमजोर धन्नू बेदम और हताश घर क़ी ओर चल पड़ा घर में कदम रखते ही माँ क़ी आवाज उसके कानो में पड़ी बगल में उसकी अन्व्याहता बहन माँ को थामे थी खड़ी आ गईला बचवा जल्दी से इन्हेलरवा खोला दम घुटत आ हमारे मुंहवा में लगावा धन्नू संज्ञाशून्य अपने खाली हाथो के साथ माँ को निहार रहा था माँ क़ी आशा से भरी निगाहों में उसके खाली हाथो को देख आयी हताशा को पहचान रहा था माँ क़ी बेचैनी के साथ क्रमशः उखड़ती साँस को किंकर्तव्य विमूढ़ असहाय देख रहा था मन ही मन एक दृढसंकल्प के साथ पश्चाताप के औसुओं से स्वयं को कोस और भिगो रहा था डा-रमेश कुमार निर्मेश

बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

सम्मान डा- रमेश कुमार निर्मेश को उनके कार्यालयी हिंदी में योगदान के लिए केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री प्रो-गेशे नेवांग सामातें द्वारा कुलसचिव कशी हिंदी विश्वविद्यालय क़ी उपस्थिति में सम्मानित किया गया

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

गंगा



गंगा का निर्जीव शरीर

सफ़ेद कफ़न में लपेटा जा रहा था

मै भी उसकी शवयात्रा में

जाने के निमित्त वहां पहुच चुका था

उसकी पत्नी बच्चों के साथ

दहाड़ मार कर रो रही थी

लोगो के बीच में तरह तरह क़ी

बाते हो रही थी



एक कह रहा था

बेचारा रात भर तो रिक्शा चलाता

दिनभर ऊ सहबवा के बंगला में

सरकारी नौकरी के लालच में खटता

आखिर एक गरीब का

शरीर कितना सहता

यही से एका ई हाल भवा

और हार्टफेल होई गवा



मौन मेरे जेहन में

सप्ताह पूर्व क़ी बाते

एकाएक पुनः ताजी हो गयी थी

मेरे अशांत मन को

एकदम मंथित कर रही थी

जब भीषण गर्मी और उमस में

नंगे बदन गंगा

एक मैला गमछा लपेटे था

अपने साहब के बगीचे में

तेजी से फावड़ा चलाये जा रहा था

जबकि बंगले के अन्दर

ए सी धुआंधार चल रहा था

यह देख में हैरान था

क़ी अभी कल ही तो वह

तीव्र बुखार के साथ

मेरे पास दावा के लिए आया था

फिर आज इस भीषण तपिश में

क्यों इस तरह कार्यरत था

मेरे पूछने पर उसने बताया कि

भैया साहेब कहिन है कि

प्याज के रोपाई का समय

निकला जा रहा

गंगा जल्दी से खेतवा तैयार कर

बेहन का जुगाड़ करा



बेहन भी जुगाड़ करने के

उसके साहेब के फैसले पर

पता नहीं क्यों और क्या

में सोच रहा था

अंत में निरुत्तर

आगे बढ़ गया था



पिछले आठ सालों से

उस साहेब के सरकारी

नौकरी के आश्वासन पर

गंगा दिन भर अपने

उस तथाकथित साहेब के

बंगले पर खटता रहा

अपने परिवार के भरण पोषण के लिए

रात में रिक्शा चलाता रहा

अपनी संभावनाओं से

भरी जवानी को

सुखद बुढ़ापे कि चाह में

तबियत से खोता रहा



क्रमशः अधेड़ हो रहे

उस मुर्ख को शायद अपनी

मूल्यवान जवानी कि कीमत का

अहसास नहीं था

कल यदि बुढ़ापे में

माना कुछ पा ही लिया तो

क्या उसके जवानी के दिन

वापस आ जायेंगे

यह भी सोचा नहीं था



अक्सर तबियत

उन्नीस बीस होने पर

मेरे घर के बाहर

मेरे आने कि प्रतीक्षा करता

आने पर मेरा उससे

हाल चाल होता

हर बार मुख्य बीमारी के दवा के साथ

ताकत के गोलियों क़ी

उसकी मांग होती

मेरे पैसा न लेने के कारण

मेरे लिए खटने क़ी

उसकी चाह हमेशा होती

जो कभी पूरी नहीं होती



जब कभी बाहर उससे

उसके रिक्शे के साथ

मेरी मुलाकात होती

भैया आवा कहाँ चली

बस यही उसकी

आवाज होती



एकदिन आखिर मैंने

उससे पूछ ही लिया था

गंगा आखिर कब तलक

वांछित नौकरी के लिए

इस तरह जीवन से

जद्दोजहद जारी रहेगी

सुखमय भविष्य के लिए

आशाओं और संभावनाओं से भरी

वर्तमान पीड़ित और

अपमानित होती रहेगी



बोला भैया

आप ही के बताये

कर्मन्येवा अधिकारेस्तु

मन फलेषु कदचिना के

रास्ते पर ही तो चल रहा था

निरुत्तर आज में

उसके गीता श्लोक क़ी

उक्त भौतिक व्याख्या का

एक ओर जहाँ दुखद परिणाम

देख रहा था

वही दूसरी ओर

उसके साथ अपने आप पर भी

खीज रहा था



डा. रमेश कुमार निर्मेश

गुरुवार, 6 सितंबर 2012

आज का युधिष्ठर

आज का युधिष्ठर



घाट क़ी सीढियों पर

उदास बैठे राजू के सामने

सारा अतीत घूम रहा था

बापू क़ी मौत के बाद

या बापू के रहते हुए भी

मामा ने किस तरह

पूरे परिवार को संभाला था

उसके सभी बहनों का

विवाह करते करते

बापू तो चल बसे थे

राजू के लिए कुछ खास

नहीं छोड़ गए थे



दिन बीतते गए

राजू भी विवाह के योग्य हुआ

विवाह के पूर्व मामा ने

उसके टूटे फूटे घर को बनवाने का

फैसला लिया



सीमेंट लेन के लिए

हजार रूपये राजू को दिया

स्वयं ईट लेन के लिए

भत्ते का रुख किया

बीच में पुराने यारों ने हाथ पकड़

राजू को न चाहते हुए

फड पर बैठा लिया

महाभारत के युधिष्ठर के निति का

दुहाई दिया

उसकी लगभग छूट चुकी

जुए क़ी आदत ने भी जोर मारा

राजू फड पर बैठा

शीघ्र ही हार चुका था रुपया सारा

उसके पाव तले का जमीन खिसक गया था

जितने वाला रुपया लेकर

आगे चल दिया था

हताश राजू भी उसके

पीछे पीछे चल दिया था



बिना परिश्रम

अपने रुपये को बढ़ने के चाह ने

राजू को आज कितना

दीन और हीन बना दिया था

यहाँ तक क़ी उसे जुए क़ी फड तक

एक बार पुनः पंहुचा दिया था

कैसे करेगा वह देवता समान

अपने मामा का सामना

यह सोच वह एकदम से

घबरा गया था

मामा के विश्वास को

एक बार पुनः चोट पहुचाने का गम

उसे भीतर तक साल रहा था

सोच रहा था कि

किसी तरह यह पैसा इस बार

वापस आ गया कही

तो हे भगवन आपकी कसम

अब जुए कि ओर कभी

वह ताकेगा नहीं

चलते चलते आखिर मयखाने में

उससे मुलाकात हुई

राजी कि बाछें खिल गयी

राजू अपने पैसे कि वापसी कि उम्मेद्मे

उससे एक बार और खेलने कि

बार बार अपील कि

अबे खेल ले भैया खेल ले भैया

कि अनेक विनती कि

अंततः नशे में टुन्न होने पर

वह खेलने के लिए पुनः

तैयार हो गया था

शायद भाग्य को भी

राजू कि दशा पर तरस आ गया था

ईस बार

राजू के पत्ते पड़ने लगे थे

एक एक कर उसके रुपये

वापस आने लगे थे



पाँच सौ रूपये ऊपर से

और भी आ गे थे

धीरे धीरे लोग घर जाने लगे थे

उसमे से दो सौ राजू ने उसे और दिया

साथ ही वापस जाकर और

पीने का सलाह दिया

बाकी पैसे लेकर उसने स्वयं

बाजार का रुख किया



रास्ते में राजू

सोचता जा रहा था

कैसी मूर्खता और कैसी विडम्बना है कि

अपने पैसा जब अपने पास था

उसके वेलू और उसकी अस्मत का

उसे अहसास नहीं था

देखते ही देखते जब वह

दूसरे कि जेब में जाने लगा था

उसकी कीमत का

उसे भास हुआ था



जीता तो कई बार था वह

मगर इस जीत पर

आज का वह युधिष्ठर

बहुत ही इतरा रहा था

 
मूर्ख अपने ही पैसे क़ी वापसी पर

आज जश्न मना रहा था

सोच रहा था कि

कितनी मारकाट के बाद

महाभारत के युधिष्ठर का

सम्मान बचा रहा था

उसने तो अपने सम्मान को बस

चुटकियों में ही वापस

हासिल कर लिया था

तुलना करने पर वह अपने आप को

द्वापर के युधिष्ठर से श्रेष्ट पा रहा था

आज के बाद उसने फड पर

न बैठने कि कसम ली

हमेशा के लिए जुए को

जैरामजी की कही

बुधवार, 29 अगस्त 2012

निःशुल्क चिकित्सा शिविर

निःशुल्क चिकित्सा शिविर


बड़े हर्ष के साथ सूचित किया जा रहा है कि दिनांक- 09 सितंबर 2012, दिन- रविवार को अमर वीर इण्टर कालेज, धानापुर में अदनान वेलफेयर सोसाइटी के तत्वाधान में निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया है।
चिकित्सा शिविर में अति विशिष्ट चिकित्सकों की टीम द्वारा मरीजों का निःशुल्क परीक्षण किया जाएगा। शिविर में जनरल फिजिशियन, अस्थि रोग, नेत्र रोग, स्त्री व प्रसूत रोग, बाल रोग एवं दंत व मुख कैंसर रोग विषेषज्ञ चिकित्सक मौजूद रहेंगे।
आप समस्त क्षेत्रवासयिों से अपील की जाती है कि भारी संख्या में पहुंच कर चिकित्सा शिविर का लाभ उठायें।

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें-
08896653900, 9807765879

सोमवार, 13 अगस्त 2012

सामान्य सी मांग

पापा पापा
पिछली बार आपने वो
बिजलीवाली रेलगाड़ी हमको
दिलाने को कहा था
कहते कहते सोनू पापा को
एक खिलौने क़ी दुकान पर
बड़ी आशा से लेकर
खड़ा हो गया था
में भी जमाष्ट्मी क़ी कुछ
खरीददारी हेतु
बाजार गया था

नहीं बेटा
यह बिजलीवाली रेलगाड़ी
बड़ी खतरनाक होती है
जरा सी चूक पर
जान खतरे में पड़ सकती है
तब पापा वो बैटरी वाली ही
दिला दो
बिरजू सामू और गुड्डू
सबके पास है वो
सब उसे चला कर इतराते है
दिखा दिखा कर
बहुर भाव खाते है
मेरे पास रेलगाड़ी न होने से
मेरा सब बहुत उपहास उड़ाते है

बेटा वो भी बेकार है
अभी देखे नहीं उस दिन टी वी में
दिखा रहा था
की बैटरी फटने से एक बालक
किस तरह मौत क़ी गोद में
समा गया था
अपने प्यारे सोनू को
कैसे जानबूझ कर
मौत में मुंह में धकेल सकता था
हाँ देखो प्लास्टिक की यह
रेलगाड़ी ले लो
प्लास्टिक से भी तो पापा
सब बताते है बहुत प्रदुषण फैलता है
नहीं पापा वह भी रहने दो

सोनू को एकाएक
घर से चलते समय
पापा की माँ से पैसे को लेकर
हो रही जिकजिक का
ध्यान आ गया था
पापा की विपन्न आर्थिक स्थिति ने
सोनू को अब और
मजबूत कर दिया था
पुनः स्थिति को सोनू ने ही सम्हाला
बाल सुलभ चंचलता से
रेलगाड़ी की बात को टाला
पापा छोडो व्यर्थ में पैसा
बर्बाद करने से क्या फायदा
तीन चार साल ही तो
और है बचपन के
कट जायेगा बाकायदा
सच पापा आप मुझे
कितना प्यार करते है
मेरी जान का आप
कितना ख्याल रखते है
औरो के पापा तो बस लगता है
प्यार का नाटक करते है

महेश इस अवांछित स्थिति से
कम्पित हो गया था
अपनी विपन्नता पर मन ही मन
स्वयं को कोस रहा था
उसे यह आभास हो चला था कि
सोनू भी उसकी माली हालत से
अब वाकिफ होकर
अपने अरमानो को तिलांजलि देकर
अपने बचपन को नकारते
उलट उसे ही सांत्वना दे रहा था

महेश अभी तक जहाँ
उसकी मांग को टालने में
आपने आप को सफल समझ रहा था
सोनू के विश्लेषण से
अब वह व्यथित हो रहा था
उसने विकल्प के रूप में
जितने भी प्रस्ताव
सोनू को सुझाया
सबका समुचित निकास
सोनू से पाया

मध्यवर्गीय परिवार का
मुखिया महेश
बच्चे कि इस अप्रत्याशित सोच पर
स्तब्ध हो गया था
जुलाई के महीने में वैसे ही
हाथ तंगी में हो रहा था
ऊपर से दिन पर दिन
बढ़ती मंहगाई ने
कमर तोड़ कर रख दिया था

नव धनाड्यों के बच्चों में
एक ओर जहाँ
मंहगे से मंहगे खिलौने के लिए
आपस में प्रतियोगिता चल रही थी
वही अपने बच्चे की एक
सामान्य सी मांग भी
पूरी न कर पाने की कसक
उसके सामने
अपराधबोध बन डटी थी

डा-रमेश कुमार निर्मेश Attachments may be unavailable. Learn more papa.jpg

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' चुने गए कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव


ब्लागिंग के क्षेत्र को निरंतर समृद्ध करने के मद्देनजर चर्चित साहित्यकार और ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं आकांक्षा यादव को 'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' का सम्मान प्रदान किए जाने हेतु चयनित किया गया है। परिकल्पना समूह की तरफ से अन्तराष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले इस सम्मान के तहत हिंदी ब्लोगिंग में दशक के सर्वाधिक चर्चित पाँच ब्लागर और पाँच ब्लॉग के साथ-साथ दशक के श्रेष्ठ चर्चित ब्लोगर दंपत्ति के रूप में कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव का चयन किया गया है. मूलत: आजमगढ़ जनपद निवासी श्री यादव वर्तमान में इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर पदस्थ हैं. गौरतलब है कि परिकल्पना के माध्यम से चर्चित ब्लागर रवीन्द्र प्रभात जहाँ तमाम ब्लॉगों का सम्यक विश्लेषण कर रहे हैं,वही पिछले वर्ष से ही उन्होंने वर्ष के श्रेष्ट ब्लागरों को सम्मानित भी करना आरंभ किया है. इसी कड़ी में इस बार 'दशक' की उपलब्धियों वाले ब्लागर भी सम्मानित किये जा रहे हैं, जो कि ब्लागिंग के क्षेत्र में एक नायब और अनूठा प्रयोग होया.

'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' हेतु चयनित कृष्ण कुमार यादव जहाँ 'शब्द-सृजन की ओर' और 'डाकिया डाक लाया' ब्लॉग के माध्यम से सक्रिय हैं, वहीँ आकांक्षा यादव 'शब्द-शिखर' ब्लॉग के माध्यम से. इसके अलावा इस युगल-दंपत्ति द्वारा सप्तरंगी प्रेम, बाल-दुनिया और उत्सव के रंग ब्लॉगों का भी युगल सञ्चालन किया जाता है. उपरोक्त सम्मान की घोषणा करते हुए संयोजकों ने लिखा कि- ''कृष्ण कुमार यादव ने 'डाकिया डाक लाया' ब्लॉग के माध्यम से डाक विभाग की सुखद अनुभूतियों से पाठकों को रूबरू कराने का बीड़ा उठाया तो आकांक्षा यादव ने 'शब्द-शिखर' के माध्यम से साहित्य के विभिन्न आयामों से रूबरू कराने का। एक स्वर है तो दूसरी साधना। हिन्दी ब्लोगजगत में जूनून की हद तक सक्रिय इस ब्लॉगर दंपति ने हिंदी ब्लागिंग को कई नए आयाम दिए हैं.''

गौरतलब है कि यादव दम्पति की सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को पिछले साल हिंदी भवन, नई दिल्ली में 'श्रेष्ठ नन्हीं ब्लागर' सम्मान से सम्मानित किया गया था तो 14 नवम्बर, 2012 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में भारत सरकार द्वारा अक्षिता को आर्ट और ब्लागिंग के लिए 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' भी प्रदान किया गया. मात्र साढ़े चार साल की उम्र में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्त कर अक्षिता ने जहाँ भारत की सबसे कम उम्र की बाल पुरस्कार विजेता होने का सौभाग्य प्राप्त किया, वहीँ पहली बार भारत सरकार द्वारा किसी ब्लागर को कोई राजकीय सम्मान दिया गया. फ़िलहाल अक्षिता गर्ल्स हाई स्कूल, इलाहाबाद में प्रेप में पढ़ती है. अक्षिता के ब्लॉग का नाम है- पाखी की दुनिया.


परिकल्पना दशक का ब्लॉगर सम्मान के तहत सम्मानित होने वाले ब्लागर हैं - पूर्णिमा वर्मन(शरजाह, यू ए ई), समीर लाल समीर(ओटरियों, कनाडा), रवि रतलामी (भोपाल, म.प्र.), रश्मि प्रभा (पुणे, महाराष्ट्र), एवं अविनाश वाचस्पति (नयी दिल्ली). इसके अलावा पञ्च चयनित श्रेष्ठ ब्लॉगों के संचालकों को भी सम्मानित किया जायेगा.(परिकल्पना ब्लॉग दशक सम्मान-2012 की पूरी सूची हेतु क्लिक करें)


उपरोक्त सम्मान दिनांक 27 अगस्त 2012 को लखनऊ के क़ैसर बाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन मे प्रदान किया जायेगा. इस अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन का आयोजन तस्लीम व परिकल्पना समूह कर रहा है । इस समारोह में देश व विदेश के तमाम चर्चित ब्लॉगर जुटेंगे और नए मीडिया जैसे कि ब्लॉग, वेबसाईट, वेब पोर्टल,सोशल नेटवर्किंग साइट इत्यादि के सामाजिक सरोकार पर भी बात करेंगे ।
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(विभिन्न समाचार-पत्रों में कृष्ण कुमार यादव-आकांक्षा यादव को 'दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दंपति' हेतु चयनित किये जाने पर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित हुए हैं, उनकी एक झलक)