युवा-मन

गुरुवार, 27 जनवरी 2011

बेशक हम स्वतंत्र हो गए

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बेशक हम स्वतंत्र हो गए है क्या आपको लगता नहीं की स्वतंत्र होने के उपरांत हम कुछ ज्यादा ही स्वछन्द हो गए है तमाम वर्जनाओं के साथ साथ अपनी मर्...
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शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

जीने का अभिनय

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अनिमेष पाँच वर्ष पूर्व सॉफ्टवेर इंजिनियर बन दिल्ली आया इन पाँच वर्षो में उसने वह सब पाया जो एक स्टेटस लाइफ को भाया चैन और सुकून खोने की कीमत...
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गुरुवार, 13 जनवरी 2011

मीरा मांसी

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प्रभात की बेला कालबेल की असमय अनचाही ध्वनि दूर हो चुकी थी अवनि स्वयं को सहेज कर दरवाजे को खोला सामने एक अजनबी को पाया लिए हाथों ...
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शनिवार, 8 जनवरी 2011

सत्य संवेदनाओं की ताकत

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अलसाई सुबह चिड़ियों की चहचाहट से निद्रा हुई भंग बीती रात के बुखार से अभी भी टूट रहा था अंग टोय्फोइड के कारण माँ पिछले तिन दिनों से अस्पताल की...
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सोमवार, 3 जनवरी 2011

रेत : प्रकाश यादव "निर्भीक"

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रेत का ढेर है यह जिन्दगी जिसमें अनगिनत सपनों के घरौंदें रेत से, रेत पर बनते और ढहते हैं पलभर में हकीकत की दुनियां से बेहद परे अपनी कल्पना लो...
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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

हे नूतन वर्ष तू ठहर जरा

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परम आदरणीय सुधि पाठक वन्धुओं पिछले काफी दिनों से आप मुझे युवामन पर देख रहे है और सराह रहे है जिससे मुझे सदा कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती र...
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बुधवार, 29 दिसंबर 2010

वेदना से नवोन्मेष की शिखर यात्रा

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सहसा ठिठक गए पावँ देख सामने एक नाव एक वृद्ध को को तमाम बच्चो के साथ करते देख अटखेलिया करते गलबहिया अरे ये तो वही है जिसे मेंटल अस्पताल में ...
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सोमवार, 20 दिसंबर 2010

स्तब्ध मैं विचलित .....

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कुम्भस्नान हेतु सपरिवार मैं इलाहाबाद जा रहा था रिजेर्वेशन कम्पार्टमेंट में भी भीड़ बड़ा जा रहा था बहुत सारे स्नानार्थी और यात्री पुण्य कमान...
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शनिवार, 11 दिसंबर 2010

नया जीवन

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ख़ुदकुशी की असफल कोशिश के बाद अस्पताल के विस्तर पर मै पड़ा था बगल में ही एक और मरीज गंभीर रोग से पीड़ित था असाध्य रोग से ग्रस्त पर देखा उसके अ...
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गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

आज का भारत

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है कहाँ-कहाँ न प्रगति हुई चहुँ ओर प्रगति दिखलाई पड़े अथाह-प्रगति के सागर में अविराम प्रगति के खम्ब जडे है लुटेरों का राज यहाँ पग-पग फैला भ्रष...
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शनिवार, 4 दिसंबर 2010

पापा का प्यार

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अपनी छोटी सी दुनिया में खो गए थे हम मन में लिए उच्च शिछा के सपने दो बहन और एक भाई के साथ बड़े हो रहे थे हम पापा के सिमित आय में ही मजे से च...
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मंगलवार, 23 नवंबर 2010

खुशियाँ

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आजीवन खुशिओं की तलाश में रहते है हम समृधि में ही खुशिओं को तलाशते है हम रोज एक नया लक्ष्य बनाते है उनके प्राप्ति के उपरांत खुशियाँ मनाते है ...
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शनिवार, 20 नवंबर 2010

हिंदी ब्लागिंग से लोगों का मोहभंग

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आजकल हिंदी ब्लागिंग खतरे में हैं. पहले तो लोग बड़े जोर-शोर से ब्लॉगों से जुड़े, पर अब उत्साह ठंडा हो गया है. किसी की शिकायत है कि अब लिखने के...
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शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

दीपावली मैंने मना लिया

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नित्य की भाँती काशी के महाश्मसन की सिदियों से चदता खानाबदोश की तरह जीवन मरण की गुत्थियों से उलझता पुनः सुलझाता अंतस्तल में अंतर्द्वान्द्वा क...
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बुधवार, 3 नवंबर 2010

लो देख लो मेरी दुनिया

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घर लौटने पर छोटू ने सुनाया ताई के फोन आने की बात बताया भैया बहुत बीमार है तुरंत कानपुर है बुलाया मैंने सोचा भैया के चार बच्चे सभी व्यवस्थित...
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गुरुवार, 28 अक्टूबर 2010

बचपन का जमाना

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बचपन का जमाना होता था खुशियों का खजाना होता था, चाहत चाँद को पाने की दिल तितली का दीवाना होता था, खबर न थी कुछ सुबह की न शामों का ठिकाना होत...
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शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

मानों विराट क्षितिज को दे दिया हो जैसे एक छोटा सा बसेरा

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बापू के अवसान के उपरांत माँ को मै गाँव से शहर लाया सोचा माँ के ममता की बनी रहेगी मुझ पर छाया काफी दिनों से दूर था मुझसे मेरी माँ का साया च...
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बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

बुधिया

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जीवन की वयास्तामम आपाधापी से पस्त फिर भी मस्त बड़े ही अनुनय से एक विवाह समारोह का बना मै गवाह जहा जारी था अपने चरम पर बारात का प्रवाह युवा...
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रविवार, 17 अक्टूबर 2010

दशहरे की शुभकामनायें...

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!! दशहरे की शुभकामनायें...अन्याय पर न्याय का प्रतीक यह त्यौहार सभी के जीवन में खुशहाली लाये और समाज से भ्रष्ट तत्वों का खात्मा हो !!
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मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

मीठी वाणी से पाला

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कार्यालय के पुरे दिन की माथापच्ची से त्रस्त कार्य की अधिकता से पस्त दूर होते ही सूरज की छाया मैं घर को लौट आया की तभी एकाएक मेरा मोबाइल घ...
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शनिवार, 9 अक्टूबर 2010

जीवन सजीव !

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ले स्वछंदता का आचार व विचार नित टूट रहे संयुक्त परिवार लगने लगे है बेमानी पैत्रिक घर द्वार मायने खोते जा रहे सिवान बीमार हो रहे बखरी और खलिह...
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शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2010

पूस का पाला

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अभी कल की बात मै था अस्सी घाट पर मित्रो के साथ पता चला बी एच यूं अ इ टी के तिन छात्र डूब गए हम सकते मै आ गए पुरे घाट पर छात्रो और अध...
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बुधवार, 29 सितंबर 2010

विचलित है मन

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कृष्ण कराओ पुनः अपने विराट स्वरुप का दर्शन विचलित है मन आसन्न एक परिवर्तन गीता का भाष्य पठनीय पाठ्य पूरित परिपथ निश्चित दर्शनीय एक और अग्निप...
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मंगलवार, 28 सितंबर 2010

हिंदी दिवस

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हिंदी दिवस की एक और उत्सव पूछता पुनः एक बार अपना भावार्थ विस्मृत युगबोध का यथार्थ कल्पित स्तित्वाहिनता का आभास निरंतर प्रसरित पावन प्रकाश लक...
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सोमवार, 27 सितंबर 2010

आज भी धन्नी नहीं बिक सका

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लेबरो की मंडी में सुबह से शाम हो गयी दिन तक़रीबन ढल गयी पर आज भी धन्नी नहीं बिका एक भी पैसा नहीं वो कमा सका सामने मुनिया का बुखार से तपता ...
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