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शुक्रवार, 26 दिसंबर 2008

दोस्ती बनाम प्रेम

पिछले दिनों कॉलेज कैम्पस में दोस्तों के संग बैठी थी। अचानक एक दोस्त ने बड़ा अजीब सा सवाल उछाल दिया-''क्या लड़कियों से प्रेम ही किया जा सकता है, दोस्ती नहीं ?''....पहले तो यह सवाल अटपटा सा लगा, फिर लगा कि इसमें दम है. आखिर समाज लड़का-लड़की के सम्बन्ध को उसी परम्परागत नजरिये से क्यों देखता है. इक्कीसवीं सदी में आकर हम बड़ी-बड़ी बातें भले ही करने लगे हों, विकास के सारे रस्ते खुल गए हों, पर समाज अभी भी लड़का-लड़की के सम्बन्ध को एक सामान्य बात मानने को तैयार नहीं होता. वह इसमें 'चक्कर' वाला लफड़ा खोजता रहता है. मुझे लगता है कि आधुनिक दौर में जहाँ एक ओर सहशिक्षा है, वहीं लड़के-लड़कियाँ एक ही साथ नौकरी भी कर रहे हैं। ऐसे में विभिन्न क्रियाकलापों में उन्हें एक दूसरे के सहयोग की आवश्यकता पड़ती है। जिसके लिये उनमें मित्रता भाव होना जरूरी है। यह जरूरी नहीं कि ऐसे सभी मित्रों से प्रेम ही किया जाय क्योंकि प्रेम एक आत्मीय व भावनात्मक रिश्ता होने के साथ निहायत व्यक्तिगत अनुभूति है जबकि दोस्ती कईयों के साथ हो सकती है....... !!!
रश्मि सिंह
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