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मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

बारात


मैंने देखा उसे
एक बारात में ज्योति कलश
ढोते हुए
साथ ही बाये हाथ में
अपने नवजात बच्चे को भी
सम्भाले हुए

उसके पीछे शायद
उसकी दस वर्षीया बेटी
ज्योतिकलश सर पर लिए
कदम  से कदम मिला कर
बारात में चल रही थी
बड़े ही हसरत से
पूरे बारात को निहार रही थी
शायद अपने भी प्रियतम के
बारात के बारे में ही
सोच रही थी
बगल
की लाइन में
उसका पति भी एक हाथ से
ज्योति कलश को थामे
दूसरे से अपने छोटे बच्चे को सम्भाले
पैदल चल रहा था

बारात से  ध्यान हटा
मैं  अनवरत उनकी गतिविधियों का
अवलोकन करने लगा
उनके साथ ही साथ चलने का
प्रयास करने लगा

आपस में उनकी
बातचीत भी लगातार जारी थी
कल महाजन के आने की तैयारी  थी
आज की इस कमाई से
छुटका के बीमारी के समय
उधार लिए गए कर्ज के
मासिक ब्याज को चुकाने
की बारी  थी

मेरी भाव भंगिमा से
शायद उन्हें पता चल गया
कि मै उन्हें वाच कर रहा था
इसीलिए उनका बातचीत  अब
क्रमशः कम हो रहा था

बस इतना ही पता चला कि
इस बारात के बाद
उन्हें एक और बारात के लिए जाना है
उसके बाद ही खाने के लिए
अपने घर रवाना होना है

बारात लगते ही
उन बच्चों का ध्यान
सामने के सुस्वाद व्यंजनो
की ओर गयी
थीं
जिन्हे उनकी नज़ारे
एक चाहत के साथ
निहार रही थी

छुटके ने नजर बचा कर
अंदर जाने  का साहस किया
अबे मत जाओ
नाही त बहुत मार पड़ी
कहते
हुए   दूसरे ने उसे
डाट कर बाहर किया 
बाबू बतावत रहे कि
अब पाहिले वाला
जमाना नाही रहा
जब खाये पिये में
केउ
कुछ बोलत ना  रहा
अब लोगन के पल्ले
इतना पैसा त बढ़ि गवा है
पर पता नाही काहे
इन सबका दिल इतना
छोटा कइसे होइ गवा है

चल
कौनो बात नाही 
हमरो  घरै आज
कहत रहल माई
कि ऊ आलू के झोल के साथ 
ऊ पराठा बनाई

दूर से मै उनकी
बातचीत सुन रहा था
तभी मेजबान कुछ खास
व्यंजनो के साथ
सामने से गुजर रहा था
मैंने कहा भइया अगर
आप अन्यथा न ले
हम  भोजन के बदले में
चार प्लेट इसी को ले ले
उसने  हॅसते हुए हमें
मौन स्वीकृति दिया
मैं  उन्हें  लेकर
शीघ्रता से बाहर  आया

बड़े ही  हिम्मत के साथ
उन्होंने उसे किसी तरह लिया
खाते हुए उनका ज
हाँ
एक एक रोम तृप्त
होता दीख रहा था
मेरा मन भी एक
अज्ञात आनंद से
पूरित हो रहा था
समाज के एक वर्ग विशेष का
नेतृत्व करने के कारण
मै
भी  एक अपराधबोध से
अपने को
मुक्त पा  रहा था

निर्मेष




 
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