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सोमवार, 6 जून 2011

पर्यावरण

भौतिकता पर्यावरण के लिए घातक
भौतिकता की वजह से हम पर्यावरण से काफी दूर होते गये हैं। पर्यावरण मनुष्य के जीवन को संतुलित रखता है। वृक्षों की अंधाधुंध काटाई तथा पानी की बर्बादी कर हम प्रकृति के साथ खिलवाड कर रहे हैं जिसका परिणाम हमें भीष्ण गर्मी कम वर्षा के रूप में भोगना पड रहा है। उक्त बातें डा0 अरविन्द मिश्र ने संकल्प सेवा समिति द्वारा आयेजित पर्यावरण संरक्षण विषयक संगोष्ठि में कहा। उन्होने कहा कि जंगल सिकुड रहे हैं तथा जीव-जन्तु समाप्त होने के कगार पर हैं। भूगर्भीय जल के लगातार दोहन से पानी मुश्किल होता जा रहा है। यही कारण है कि पर्यावरण असंतुलित होने लगा है।

संस्था के अध्यक्ष एम. अफसर खां सागर ने कहा कि वृक्षों की कमी से जलवायु परिवर्तन का दौर खडा हो गया है जिसके लिए वन क्षेत्रों के संरक्षण की खातिर प्राकृतिक चीजों को संरक्षित करना जरूरी है। हर व्यक्ति ये ठान ले कि वर्ष में कम से कम एक पेड जरूर लगाना है तब जाकर पर्यावरण दिवस मनाना सार्थक हो गया। हमको चाहिए कि ऐसी चीजों का इस्तमाल बन्द कर दें जिससे पर्यावरण को नुक्सान पहुंचता हो। आइए संकल्प लें कि हम पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करेंगें।
इससे पहले संस्था द्वारा धानापुर कस्बा में विभिन्न जगहों पर दर्जन भर पौधे लगाये गये। संगोष्ठि में विवेक यादव, आरिफ खां, असफाक खां, रामनगीना, तबरेज, अच्युतानन्द, इरफान खां, अंकित, हामिद अबरार, प्रिंस कलाम, उमर खां, सर्फराज खां समेत अनेक गणमान्य लोग मौजूद थें।

आपसे निवेदन है कि एक बार ज़रूर संकल्प सेवा समिति के ब्लॉग पर आयें... http://sankalpsewasamiti.blogspot.com
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