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शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

ढलते सूरज के साथ
पथरीले घाटों ने
हर हर महादेव का
उदघोष किया
जीवन्तता का अहनद
नाद दिया
आँचल में समेटे
अनेक छोटे दिनकरो को
एक नूतन श्रृष्टि का
आगाज किया

स्वप्निल
अद्भुत
अवर्णनिय
शब्दहीन वाणी
मौन मूर्तिवत आकांक्षाये
सुसज्जित देख
अर्धचन्द्राकार कंठ
भागीरथी का
प्रसंग देव दीपवाली का

धन्य हे भारत
धन्य तेरी अक्षुण
परम्परा और संस्कृति का
उपवन
हे आर्यभूमि
तुझको शत शत
नमन

निर्मेश

सोमवार, 26 नवंबर 2012

ब्रेनवाश

बस के लिए लाइन में
खड़े खड़े इधर कुछ दिनों से
उसे मैं उसके दुधमुंहे बच्चे के साथ
फटी साडी में किसी तरह
अपने युवा तन को समेटे
सड़क के उस पार
बरगद के पेड़ के नीचे
हाथ से बने मिटटी के कुछ
देहाती खिलौने के साथ
दिये और कुल्हड़
बेचते देखता था
उसके अतीत से अज्न्जन
मगर पता नहीं क्यों
उसके भविष्य के बारे में भी
अक्सर मै सोचता था

कभी कभी उसके पति के साथ
उससे होती बहस पर भी
मेरी नजर पड़ जाती थी
दोनों के बीच बाते बढ़ते बढ़ते
मर पीट पर उतर जाती थी
बड़ी मुश्किल से
बिक्री से प्राप्त सारे पैसे को
जबरन छीन वह
चम्पत हो जाता
बच्चे के साथ उसे
बिलखते छोड़ जाता
सिलसिला यह लगभग
अनवरत था

आज एकाएक वह मुझे
खामोश नजर आ रही थी
बच्चे पर नजर पड़ी तो
उसमे भी कोई हलचल
नहीं दीख रही थी
थक कर सो रहा होगा
मई सोचता रहा
बस के आने की
प्रतीक्षा करता रहा

तभी लाइन में आगे
खड़े व्यक्ति से पता चला
जेड की अंगड़ाई को
शायद वह नवजात
सही नहीं पाया था
आज सुबह ही भगवान को
प्यारा हो गया था

तभी अचानक उसका पति
गिरते भाहराते नशे में
धुत आ गया
उससे पैसे की अपनी मांग को
एक बार पुनः दोहरा गया
उसकी पथरीली बेबस और
लाचार आँखों ने
आंसुओं का साथ
छोड़ दिया था
नैन के कोरो से आंसुओ ने
पथ अपन बना लिया था
संग्याशून्य उसने बच्चे की और
हाथ से पैसे के अभाव में
उसके मर जाने का ईशारा किया
सामान बन बिक पाने के कारन
उसे पैसा देने में अपनी
असमर्थता जताया
बदले में एक लत के साथ
गलिओयों के सौगात पाया
बच्चे के अवसान से पीड़ित
उसका थका और कमजोर शरीर
कुल्हड़ और दिया पर
आशियाना बनाते हुए
कटे पेड़ की तरह भहरा गया
इस दिशा में तमाम चल रहे
प्रयासे के उपरांत
आज भी एक लाचार
ट्रडिशनल भारतीय नारी के
इतिहास को दोहरा गया
पान का पीक उसके ऊपर
थूकते वह बोला
साली कल शाम से
धंधा कर रही है
उसमे से मैंने कुछ मांग लिया तो
पंगा और नाटक कर रही है

मुझे उसके पान के रक्त सी
पीक में उस बच्चे को
लहूलुहान अक्स दिखा
मै विचलित हो गया था
निसंदेह आगामी एक
सप्ताह के लिए मेरा
ब्रेनवाश हो गया था

निर्मेष

रविवार, 25 नवंबर 2012

आगामी बाल-दिवस पर 'डाक-टिकट' के लिए बच्चों ने बनाई पेंटिंग

हॉलिडे भला किसे नहीं भाता। हर बच्चे की अपनी कल्पनाएँ होती हैं कि हॉलिडे को कैसे खूबसूरत और यादगार बनाया जाय। और जब मौका इन्हें पेंटिंग के रूप में चित्रित करने का हो तो कैनवास पर कई तरह के रंग उभर कर आते हैं।  डाक विभाग द्वारा 23 नवम्बर, 2012 को आयोजित “डिजाईन ए  स्टाम्प” प्रतियोगिता में हॉलिडे विषय पर बच्चों ने पेंटिंग में ऐसे ही रंग बिखेरे।
 
       इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इस प्रतियोगिता में इलाहबाद परिक्षेत्र में कुल 389 बच्चों ने भाग लिया, जिनमे इलाहाबाद में 37, प्रतापगढ़ में 78, जौनपुर में 79, व वाराणसी में 192 प्रतिभागी बच्चे  शामिल हैं।  इलाहाबाद  में कुल 18 स्कूलों के बच्चों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिनमे सैंट एंथोनी  गर्ल्स इन्टर कॉलेज, बिशप जॉन्सन इंटर कालेज, डा. के. एन. काटजू इंटर कालेज, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर, वशिष्ठ वात्सल्य पब्लिक स्कूल, पतंजलि ऋषिकुल इत्यादि शामिल हैं। सभी विद्यार्थियों को तीन समूहों में विभाजित किया गया - कक्षा 4 तक के विद्यार्थी, कक्षा 5 से कक्षा 8 तक के विद्याथी एवं कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी ।
 
 निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि इन सभी प्रविष्टियों का मूल्यांकन रीजनल स्तर पर करने के बाद तीनों वर्गों में श्रेष्ठ प्रविष्टि को निदेशालय स्तर पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल करने हेतु परिमंडलीय कार्यालय लखनऊ भेजा जायेगा और  सभी श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्तर पर क्रमशः 10,000, 6,000 एवं 4,000 रूप्ये के तीन-तीन पुरस्कार राष्ट्रीय स्तर पर दिये जायेगें । राष्ट्रीय स्तर पर चुनी गयी पुरस्कृत प्रविष्टियों के आधार पर ही अगले वर्ष बाल दिवस पर डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण एवं मिनियेचर शीट इत्यादि का प्रकाशन किया जायेगा। इस अवसर पर स्कूली बच्चों , शिक्षको व अभिभावकों ने फिलाटेलिक डिपाजिट अकाउंट खोलने में भी रूचि दिखाई जिसके तहत उन्हें हर माह घर बैठे डाक टिकटें प्राप्त हो सकेंगी

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

ब्रेनवाश

ब्रेनवाश बस के लिए लाइन में खड़े खड़े इधर कुछ दिनों से उसे मैं उसके दुधमुंहे बच्चे के साथ फटी साडी में किसी तरह अपने युवा तन को समेटे सड़क के उस पार बरगद के पेड़ के नीचे हाथ से बने मिटटी के कुछ देहाती खिलौने के साथ दिये और कुल्हड़ बेचते देखता था उसके अतीत से अज्न्जन मगर पता नहीं क्यों उसके भविष्य के बारे में भी अक्सर मै सोचता था कभी कभी उसके पति के साथ उससे होती बहस पर भी मेरी नजर पड़ जाती थी दोनों के बीच बाते बढ़ते बढ़ते मर पीट पर उतर जाती थी बड़ी मुश्किल से बिक्री से प्राप्त सारे पैसे को जबरन छीन वह चम्पत हो जाता बच्चे के साथ उसे बिलखते छोड़ जाता सिलसिला यह लगभग अनवरत था आज एकाएक वह मुझे खामोश नजर आ रही थी बच्चे पर नजर पड़ी तो उसमे भी कोई हलचल नहीं दीख रही थी थक कर सो रहा होगा मई सोचता रहा बस के आने की प्रतीक्षा करता रहा तभी लाइन में आगे खड़े व्यक्ति से पता चला जेड की अंगड़ाई को शायद वह नवजात सही नहीं पाया था आज सुबह ही भगवान को प्यारा हो गया था तभी अचानक उसका पति गिरते भाहराते नशे में धुत आ गया उससे पैसे की अपनी मांग को एक बार पुनः दोहरा गया उसकी पथरीली बेबस और लाचार आँखों ने आंसुओं का साथ छोड़ दिया था नैन के कोरो से आंसुओ ने पथ अपन बना लिया था संग्याशून्य उसने बच्चे की और हाथ से पैसे के अभाव में उसके मर जाने का ईशारा किया सामान बन बिक पाने के कारन उसे पैसा देने में अपनी असमर्थता जताया बदले में एक लत के साथ गलिओयों के सौगात पाया बच्चे के समय अवसान से पीड़ित उसका थका और कमजोर शरीर कुल्हड़ और दिया पर आशियाना बनाते हुए कटे पेड़ की तरह भहरा गया इस दिशा में तमाम चल रहे प्रयासे के उपरांत आज भी एक लाचार ट्रडिशनल भारतीय नारी के इतिहास को दोहरा गया पान का पीक उसके ऊपर थूकते वह बोला साली कल शाम से धंधा कर रही है उसमे से मैंने कुछ मांग लिया तो पंगा और नाटक कर रही है मुझे उसके पान के रक्त सी पीक में उस बच्चे को लहूलुहान अक्स दिखा मै विचलित हो गया था निसंदेह आगामी एक सप्ताह के लिए मेरा ब्रेनवाश हो गया था निर्मेष

सोमवार, 12 नवंबर 2012

सागर उवाच






कलम पकडने के बाद सिर्फ एक काम रह जाता है कागज काला करना।
कलम पकडना बन्दूक पकडने से ज्यादा खतरनाक हुनर है क्योकि इनकाउंटर करके बच सकते हैं मगर कलम से वार करके बचना मुकिल है। सो समहल के चलाना पडता है।लिखास और छपास के बीच संतुलन रखना बडा मुश्किल होता है इसलिए हर कुछ एक धार से कह पाना भी मुम्किन नहीं इस लिए मैंने बनाया एक नया ब्लाग सागर उवाच!  सागर उवाच माध्यम होगा गम्भीर व कठोर शब्दों को हल्के-फुल्के में कह के निकल जाने का। क्योंकि सेंसरशिप से भी सामना करना है!

एक अदद प्रतिक्रिया के इंतजार में....

http://sagaruwaach.blogspot.in/


शनिवार, 3 नवंबर 2012

ब्लागर दम्पति आकांक्षा-कृष्ण कुमार यादव को उ. प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा 'अवध सम्मान'

(हिंदी-ब्लागिंग को कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा जी ने कई नए आयाम दिए हैं..उसी कड़ी में ब्लागिंग के प्रति समर्पित दम्पति कृष्ण कुमार और आकांक्षा जी को उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा 'अवध सम्मान' से अलंकृत करने पर हार्दिक बधाइयाँ.)
जीवन में कुछ करने की चाह हो तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। हिन्दी-ब्लागिंग के क्षेत्र में ऐसा ही रास्ता अखि़्तयार किया दम्पति कृष्ण कुमार यादव व आकांक्षा यादव ने। उनके इस जूनून के कारण ही आज हिंदी ब्लागिंग को आधिकारिक तौर पर भी विधा के रूप में मान्यता मिलने लगी है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने 1 नवम्बर, 2012 को इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को ‘न्यू मीडिया एवं ब्लागिंग’ में उत्कृष्टता के लिए एक भव्य कार्यक्रम में ‘अवध सम्मान’ से सम्मानित किया गया. जी न्यूज़ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ताज होटल, लखनऊ में किया गया था, जिसमें विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया, पर यह पहली बार हुआ जब किसी दम्पति को युगल रूप में यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया. ब्लागर दम्पति को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहाँ न्यू मीडिया के रूप में ब्लागिंग की सराहना की, वहीँ कृष्ण कुमार यादव ने अपने संबोधन में उनसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा दिए जा रहे सम्मानों में ‘ब्लागिंग’ को भी शामिल करने का अनुरोध किया. आकांक्षा यादव ने न्यू मीडिया और ब्लागिंग के माध्यम से भ्रूण-हत्या, नारी-उत्पीडन जैसे मुद्दों के प्रति सचेत करने की बात कही. अन्य सम्मानित लोगों में वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी, चर्चित लोकगायिका मालिनी अवस्थी, ज्योतिषाचार्य पं. के. ए. दुबे पद्मेश, वरिष्ठ आई.एस. अधिकारी जय शंकर श्रीवास्तव इत्यादि प्रमुख रहे.

जीवन में एक-दूसरे का साथ निभाने की कसमें खा चुके कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव, साहित्य और ब्लागिंग में भी हमजोली बनकर उभरे हैं. कृष्ण कुमार यादव ब्लागिंग और हिन्दी-साहित्य में एक चर्चित नाम हैं, जिनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उनके जीवन पर एक पुस्तक ’बढ़ते चरण शिखर की ओर’ भी प्रकाशित हो चुकी है। आकांक्षा यादव भी नारी-सशक्तीकरण को लेकर प्रखरता से लिखती हैं और उनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव ने वर्ष 2008 में ब्लाग जगत में कदम रखा और 5 साल के भीतर ही सपरिवार विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लागिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लागिंग को भी नये आयाम दिये। कृष्ण कुमार यादव का ब्लॉग ‘शब्द-सृजन की ओर’ (http://www.kkyadav.blogspot.in/) जहाँ उनकी साहित्यिक रचनात्मकता और अन्य तमाम गतिविधियों से रूबरू करता है, वहीँ ‘डाकिया डाक लाया’ (http://dakbabu.blogspot.in/) के माध्यम से वे डाक-सेवाओं के अनूठे पहलुओं और अन्य तमाम जानकारियों को सहेजते हैं. आकांक्षा यादव अपने व्यक्तिगत ब्लॉग ‘शब्द-शिखर’ (http://shabdshikhar.blogspot.in/) पर साहित्यिक रचनाओं के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और विशेषत: नारी-सशक्तिकरण को लेकर काफी मुखर हैं. इस दम्पति के ब्लागों को सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भरपूर सराहना मिली। कृष्ण कुमार यादव के ब्लाग ’डाकिया डाक लाया’ को 98 देशों, ’शब्द सृजन की ओर’ को 75 देशों, आकांक्षा यादव के ब्लाग ’शब्द शिखर’ को 68 देशों में देखा-पढ़ा जा चुका है. सबसे रोचक तथ्य यह है कि यादव दम्पति ने अभी से अपनी सुपुत्री अक्षिता (पाखी) में भी ब्लागिंग को लेकर जूनून पैदा कर दिया है. पिछले वर्ष ब्लागिंग हेतु भारत सरकार द्वारा ’’राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’’ से सम्मानित अक्षिता (पाखी) का ब्लाग ’पाखी की दुनिया’ (http://pakhi-akshita.blogspot.in/) बच्चों के साथ-साथ बड़ों में भी काफी लोकप्रिय है और इसे 98 देशों में देखा-पढ़ा जा चुका है। इसके अलावा इस ब्लागर दम्पति द्वारा ‘उत्सव के रंग’, ‘बाल-दुनिया’, ‘सप्तरंगी प्रेम’ इत्यादि ब्लॉगों का भी सञ्चालन किया जाता है.

इस अवसर पर उ.प्र. विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय, रीता बहुगुणा जोशी, प्रमोद तिवारी, केबिनेट मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, अनुप्रिया पटेल, मेयर दिनेश शर्मा सहित मंत्रिपरिषद के कई सदस्य, विधायक, कार्पोरेट और मीडिया से जुडी हस्तियाँ, प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार, पत्रकार, कलाकर्मी व खिलाडी इत्यादि उपस्थित रहे. आभार ज्ञापन जी न्यूज उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के संपादक वाशिन्द्र मिश्र ने किया.

-डा. विनय कुमार शर्मा
प्रधान संपादक-संचार बुलेटिन (अंतराष्ट्रीय शोध जर्नल)
448/119/76, कल्याणपुरी, ठाकुरगंज, चैक, लखनऊ-226003