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रविवार, 5 जनवरी 2014

'पत्र-लेखन' साहित्य की एक गंभीर विधा - कृष्ण कुमार यादव


चिट्ठियाँ लिखना और पढ़ना किसे नहीं भाता। शब्दों के विस्तार के साथ बहुत सी अनकही भावनाएं मानो इन चिट्ठियों में सिमटती जाती हैं। यही कारण है कि पत्र लेखन विधा को प्रोत्साहित करने के लिए हर वर्ष यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। 5 जनवरी 2014, रविवार को इस 43वीं यूपीयू पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन इलाहाबाद में भी किया गया, जिसका विषय था ”संगीत जीवन को कैसे छूता है।’'। इसमें इलाहाबाद, प्रतापगढ, वाराणसी, व गाजीपुर जनपदों के प्रतियोगी शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभांरभ इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने किया। 

इस अवसर पर निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि पत्रों का संवेदनाओं से गहरा रिश्ता है। पत्र लेखन एक प्रकार का चिंतन है, जो मस्तिष्क को स्थिरता देता है। आज हाई-टेक होते इस दौर में कलम का स्थान की-बोर्ड ने ले लिया है। फेसबुक और टिवट्र पर दिनभर की अपडेट देने वाले भी एक तरह से चिट्ठियाँ लिखते हैं। फर्क मात्र इतना है कि वे हाथ से लिखी गयी चिट्ठियाँ थी और यह स्मार्टफोन, टेबलेट और लैपटाॅप पर लिखी गयी हैं। पत्र लिखना जितना मायने रखता है, उतना ही उसे पढ़ना भी। पत्रों का काम मात्र सूचना देना ही नहीं बल्कि इनमें एक अजीब रहस्य या गोपनीयता, संग्रहणीयता, लेखन कला एवं अतीत को जानने का भाव भी छुपा होता है। श्री यादव ने कहा कि पत्र-लेखन साहित्य की एक गंभीर विधा भी है। पत्रों की महत्ता के मद्देनजर ही एन0सी0ई0आर0टी0 ने पहल कर कक्षा आठ के पाठ्यक्रम में ‘‘चिट्ठियों की अनोखी दुनिया‘‘ नामक अध्याय को शामिल किया। श्री यादव ने बताया कि यह अनायास ही नहीं था कि अन्तरिक्ष-प्रवास के समय सुनीता विलियम्स अपने साथ भगवद्गीता और गणेशजी की प्रतिमा के साथ-साथ पिताजी के हिन्दी में लिखे पत्र ले जाना नहीं भूलती।

डाक निदेशक श्री यादव ने बताया कि पत्र लेखन प्रतियोगिता में 95 प्रतियोगियों ने भाग लिया। जिसमें सेंट जोसेफ कालेज, इलाहाबाद से 33, बिशप जानसन स्कूल एवं कालेज से 01, गवर्नमेंट गर्ल्स  इंटर कालेज, इलाहाबाद से 01, ग्लेनफिल स्कूल, मडुवाडीह, वाराणसी से 37, सेंट अतुलानन्द कान्वेंट स्कूल वाराणसी से 17, इण्टरमीडिएट कालेज प्रतापगढ़ से 01 व लाउडेस कान्वेन्ट गर्ल्स  इंटर कालेज गाजीपुर से 05 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पत्र अंग्रेजी या संविधान की आठवीं सूची में निर्दिष्ट किसी भी भाषा में 800 शब्दों की सीमा में लिखना था।

निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि पत्र लेखन प्रतियोगिता का मूल्यांकन परिमण्डलीय स्तर पर लखनऊ में किया जायेगा तथा श्रेष्ठ तीन पत्र लेखन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मिलित करने हेतु डाक निदेशालय, नई दिल्ली भेजा जायेगा। राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ तीन प्रतियोगियों को क्रमशः रू0 2000, रू0 1500 व रू0 1000 का प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्रमाणपत्र सहित दिया जायेगा। राष्ट्रीय स्तर के श्रेष्ठ पत्र लेखन को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के पास आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा जायेगा। 

  इस अवसर पर प्रवर अधीक्षक डाकघर श्री रहतमउल्लाह, सहायक निदेशक श्री टी बी सिंह, सहायक डाक अधीक्षक (मुख्यालय) श्री आर एन यादव सहित तमाम अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। 

मंगलवार, 15 मार्च 2011

महिला सशक्तीकरण सिर्फ उपमान नहीं बल्कि एक धारदार हथियार - आकांक्षा यादव

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ (8 मार्च) पर पोर्टब्लेयर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का शुभारम्भ अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाए एवं चर्चित साहित्यकार कृष्ण कुमार यादव ने दीप जलाकर किया। श्री यादव ने अपने उदबोधन में कहा कि - ‘‘नारी ही सृजन का आधार है और इसके विभिन्न रूपों को पहचानने की जरूरत है। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस इस तथ्य को उजागर करता है कि विश्व शान्ति और सामाजिक प्रगति को कायम रखने तथा मानवाधिकार और मूलभूत स्वतंत्रता को पूर्णरूप से हासिल करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, समानता और उनके विकास के साथ-साथ महिलाओं के योगदान को मान्यता प्रदान करना भी अपेक्षित है।‘‘
संगोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एवं युवा लेखिका सुश्री आकांक्षा यादव ने महिला सशक्तीकरण को सिर्फ उपमान नहीं बल्कि एक धारदार हथियार बताया। बदलते परिवेश में समाज में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं आज राजनीति, प्रशासन, समाज, संगीत, खेल-कूद, मीडिया, कला, फिल्म, साहित्य, शिक्षा, ब्लागिंग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अन्तरिक्ष सभी क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही है। सदियों से समाज ने नारी को पूज्या बनाकर उसकी देह को आभूषणों से लाद कर एवं आदर्शों की परंपरागत घुट्टी पिलाकर उसके दिमाग को कुंद करने का कार्य किया, पर नारी की शिक्षा-दीक्षा और व्यक्तित्व विकास के क्षितिज दिनों-ब-दिन खुलते जा रहे हैं, जिससे तमाम नए-नए क्षेत्रों का विस्तार हो रहा हैं।
पोर्टब्लेयर प्रधान डाकघर की पोस्टमास्टर श्रीमती एम. मरियाकुट्टी ने कहा कि-'' संविधान में महिला सशक्तीकरण के अनेक प्रावधान हैं पर दूरदराज और ग्रामीण स्तर तक भी लोगों को उनके बारे में जागरुक करने की जरूरत है। सुश्री सुप्रभा ने इस अवसर पर नारी की भूमिका के अवमूल्यन के लिए विज्ञापनों और चन्द फिल्मों को दोषी ठहराया जो नारी को एक उत्पाद के रूप में प्रस्तुत करते हैं। सुश्री शांता देब ने कहा कि जहाँ नारी की पूजा होती है वहाँ भगवान वास करते हैं, फिर भी नारी के प्रति समाज का रवैया दोयम है। सुश्री जयरानी ने उन महिलाओं पर प्रकाश डाला जो उपेक्षा के बावजूद समाज में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाने में सफल हुईं। इसके अलावा अन्य तमाम लोगों ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन जयरानी ने किया और आभार शांता देब ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में तमाम महिलाएं और प्रबुद्ध-जन उपस्थिति रहे।

रविवार, 17 अक्टूबर 2010

दशहरे की शुभकामनायें...

!! दशहरे की शुभकामनायें...अन्याय पर न्याय का प्रतीक यह त्यौहार सभी के जीवन में खुशहाली लाये और समाज से भ्रष्ट तत्वों का खात्मा हो !!

मंगलवार, 14 सितंबर 2010

हिंदी दिवस पर एक सन्देश...

आज हिंदी दिवस है. अपने देश में हिंदी की क्या स्थिति है, यह किसी से छुपा नहीं है. हिंदी को लेकर तमाम कवायदें हो रही हैं, पर हिंदी के नाम पर खाना-पूर्ति ज्यादा हो रही है. जरुरत है हम हिंदी को लेकर संजीदगी से सोचें और तभी हिंदी पल्लवित-पुष्पित हो सकेगी...! ''हिंदी-दिवस'' की बधाइयाँ !!