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सोमवार, 26 जनवरी 2015

युवा ब्लॉगर कृष्ण कुमार यादव भूटान में “परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान’’ से सम्मानित

चर्चित ब्लाॅगर व साहित्यकार एवं सम्प्रति इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव को हिंदी साहित्य और ब्लाॅग पर संस्मरणात्मक सृजन के लिए 15-18 जनवरी 2015 के दौरान भूटान की राजधानी थिम्पू में आयोजित चतुर्थ अन्तर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में ब्लाॅगिंग हेतु सर्वोच्च “परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान’’ से सम्मानित किया गया। श्री यादव को उक्त सम्मान भूटान चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के जनरल सेक्रेटरी श्री फूप श्रृंग एवं इंटरनेशनल स्कूल ऑफ भूटान तथा सार्क समिति ऑफ विमेन ऑर्गनाइजेशन  की अध्यक्ष श्रीमती थिनले लम्हा द्वारा दिया गया। सम्मान के तहत 25,000 रूपये की धनराशि, सम्मान पत्र, प्रतीक चिन्ह, श्रीफल और अंगवस्त्रम  देकर श्री कृष्ण कुमार यादव को सम्मानित किया गया। उक्त जानकारी सम्मलेन के संयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने दी। 


राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ 7 पुस्तकों के लेखक एवं हिन्दी ब्लाॅगिंग व सोशल मीडिया को नये आयाम देनेवाले श्री कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्व भी शताधिक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। श्री यादव ने वर्ष 2008 में ब्लाॅग जगत में कदम रखा और विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लाॅग का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लाॅगिंग की तरफ प्रवृत्त किया। कृष्ण कुमार यादव के दो व्यक्तिगत ब्लॉग हैं। इनमें “शब्द सृजन की ओर“ (http://kkyadav.blogspot.com) ब्लॉग सामयिक विषयों, मर्मस्पर्शी कविताओं व जानकारीपरक, शोधपूर्ण आलेखों से परिपूर्ण है; वहीं “डाकिया डाक लाया“ (http://dakbabu.blogspot.com) डाक सेवाओं की रोचक दुनिया को सहेजता है। इन ब्लॉग  को अब तक लाखों लोगों ने पढ़ा है और करीब सौ ज्यादा देशों में इन्हें देखा-पढ़ा जाता है।

     गौरतलब है कि श्री कृष्ण कुमार यादव यादव सिर्फ व्यक्तिशः नहीं बल्कि सपरिवार ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में सशक्त दखल रखते हैं। उनकी सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को जहाँ भारत सरकार द्वारा ब्लाॅगिंग के लिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, वहीं पत्नी आकांक्षा यादव भी अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं। यादव दम्पति को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा “अवध सम्मान“, हिंदी ब्लॉगिंग के दशक वर्ष में सपत्नीक “दशक के श्रेष्ठ ब्लॉगर दम्पति“ का सम्मान एवं नेपाल में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय ब्लाॅगर सम्मेलन में भी सम्मानित किया जा चुका है।  

       सम्मेलन के दौरान वैश्विक परिप्रेक्ष्य विशेषकर सार्क देशों में हिन्दी के पठन-पाठ्न, हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार, न्यू मीडिया के रूप में ब्लॉगिंग के विभिन्न आयामों एवं बदलते दौर में सोशल मीडिया की भूमिका इत्यादि विषयों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भूटान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव श्री फूब शृंग ने कहा कि भूमण्डलीकरण के इस दौर में विभिन्न देशों के साहित्य, संस्कृति एवं परिवेश को ब्लागिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से न सिर्फ महसूस किया जा सकता है बल्कि उसे विस्तार भी दिया जा सकता है। उन्होंने  भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रपति की हालिया भूटान यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भूटान में अंतर्राष्ट्रीय  ब्लागर सम्मेलन को भी उसी कड़ी  में देखने की जरूरत है। सार्क समिति के महिला विंग  की अध्यक्ष श्रीमती थिनले ल्हाम ने कहा कि नारी सशक्तीकरण पर आज विश्व भर में चर्चा हो रही है और ऐसे में सार्क देशों में ब्लागिंग से जुडी तमाम महिलाओं को देखना एक सुखद एहसास देता है। 

इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ और ब्लॉगर श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि ब्लॉगिंग  न सिर्फ देशों और भाषाओं के बीच दूरियाॅं कम करती है बल्कि यह विभिन्न प्लेटफार्म पर काम कर रहे लोगों के विचारों को एकाकार रूप में देखने की सहूलियत भी देती है । ब्लागिंग व सोशल मीडिया के समाजिक सरोकारों पर चर्चा करते हुए इसे उन्होंने  दूर दराज के इलाकों तक भी जोडने की बात कही। असम विश्वविद्यालय सिल्चर के भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर नित्यानन्द पाण्डेय  ने कहा कि हिन्दी को समृद्ध करने में ब्लागिंग का महत्वपूर्ण योगदान है और इसके माध्यम से दुनिया भर के लोग हिन्दी से जुड रहे हैं। वरिष्ठ व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने अपने उद्बोधन में हिंदी ब्लॉगिंग के विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते हुए इसे पुस्तकाकार रूप में भी लिपिबद्ध करने की बात कही। 

सम्मेलन के संयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि भूटान में अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग सम्मलेन आयोजित करने के पीछे उद्देश्य हिंदी संस्कृति को भूटानी संस्कृति के करीब लाना और हिंदी भाषा को यहाँ के वैश्विक वातावरण में प्रतिष्ठापित करना है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का मूल उद्देश्य दक्षिण एशिया में ब्लॉग के विकास हेतु पृष्ठभूमि तैयार करना, हिंदी-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना, भाषायी सौहार्द्रता एवं सांस्कृतिक अध्ययन-पर्यटन का अवसर उपलब्ध कराना है। 


‘‘अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘‘ के दौरान  उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से ब्लॉगर और साहित्यकार एवं निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव, हैदराबाद की सम्पत देवी मुरारका और रायपुर छतीसगढ़ के ललित शर्मा को  सर्वोच्च 'परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान' से नवाजा गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें 25,000 की धनराशि, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। साथ ही महाराष्ट्र के औरंगाबाद की अनुवादक सुनीता प्रेम यादव को परिकल्पना सार्क सम्मान प्रदान किया गया। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें पाँच  हजार की धनराशि, स्मृति चिन्ह, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के जनपदों मसलन सुल्तानपुर के डॉ राम बहादुर मिश्र को परिकल्पना साहित्य भूषण सम्मान, बाराबंकी के  एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन व डॉ विनय दास को क्रमशः परिकल्पना सोशल मीडिया सम्मान और परिकल्पना कथा सम्मान, लखनऊ की कुसुम वर्मा को परिकल्पना लोक-संस्कृति सम्मान, बहराइच के डॉ अशोक गुलशन को परिकल्पना हिन्दी गौरव सम्मान, रायबरेली से सूर्य प्रसाद शर्मा को परिकल्पना साहित्य सम्मान तथा हैदरगढ के ओम प्रकाश जयंत व विष्णु कुमार शर्मा को क्रमशः को परिकल्पना साहित्य श्री सम्मान व परिकल्पना सृजन श्री सम्मान तथा उन्नाव के विश्वंभरनाथ अवस्थी को परिकल्पना नागरिक सम्मान प्रदान किए गए। इसके अलावा इंदौर के प्रकाश हिन्दुस्तानी, रायपुर के गिरीश पंकज, अल्पना देशपांडे, अदिति देशपांडे, दिल्ली की सर्जना शर्मा और निशा सिंह, मुंबई से आलोक भारद्वाज, सिल्चर की डॉ शुभदा पाण्डेय आदि के साथ-साथ  देश-विदेश के लगभग तीस ब्लॉगर्स को विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए परिकल्पना सम्मान से नवाजा गया। 

इस अवसर पर पांच पुस्तकों क्रमशः संपत देवी मुरारका की यात्रा वृत्त तृतीय भाग, कुसुम वर्मा की ह्रदय कँवल, सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर की संघर्षों का खेल, विष्णु कुमार शर्मा की दोहावली, अशोक गुलशन की क्या कहूँ किससे कहूँ और परिकल्पना समय पत्रिका के जनवरी अंक के विमोचन के साथ-साथ परिकल्पना कोश  वेबसाईट का लोकार्पण हुआ, वहीं रायपुर छत्तीसगढ़ की अल्पना देशपांडे और अदिति देशपांडे की कलाकृतियों की प्रदर्शनी का लोकार्पण संपन्न हुआ।  इस अवसर पर कुसुम वर्मा के अवधी लोकगीतों की खुशबू में नहाई भूटान की एक शाम। डॉ राम बहादुर मिश्र के कुशल संचालन में सुर सरस्वती और संस्कृति की त्रिवेणी प्रवाहित करती काव्य संध्या और ब्लॉग पर हाशिए का समाज परिचर्चा में शामिल हुए भारत और भूटान के एक दर्जन से ज्यादा ब्लोगर्स। कार्यक्रम का  संचालन महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी श्रीमती सुनीता प्रेम यादव ने किया।

शनिवार, 3 मार्च 2012

कृष्ण कुमार यादव ने संभाला इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ का पद

भारतीय डाक सेवा के अधिकारी कृष्ण कुमार यादव ने इलाहाबाद रीजन के नए निदेशक डाक सेवाएँ के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है. साहित्य, लेखन और ब्लागिंग में अभिरुचि रखने वाले श्री यादव इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में परास्नातक हैं. मूलत: तहबरपुर, आजमगढ़ के निवासी श्री यादव वर्ष 2001 बैच के अधिकारी हैं. इससे पूर्व आप सूरत, लखनऊ, कानपुर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं. इलाहाबाद में नियुक्ति से पूर्व कृष्ण कुमार यादव अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर पदस्थ थे.



गौरतलब है कि इलाहाबाद रीजन, उत्तर प्रदेश परिमंडल का सबसे बड़ा डाक-रीजन है, जिसके अंतर्गत इलाहाबाद, कौशाम्बी, जौनपुर, प्रतापगढ़, वाराणसी, चंदौली, भदोही, गाजीपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र जनपद आते हैं. इलाहाबाद में निदेशक डाक सेवाएँ का पद कई महीनों से खाली चलने के चलते आम जनता के साथ विभागीय गतिविधियाँ भी काफी प्रभावित हो रही थीं. यही नहीं पिछले माह यहाँ के पोस्टमास्टर जनरल की पदोन्नति पश्चात् इलाहाबाद रीजन मुख्यालय में शून्य की स्थिति पैदा हो गई थी. ऐसे में तेज-तर्रार और ईमानदार छवि के लिए मशहूर कृष्ण कुमार यादव की नियुक्ति इलाहाबाद रीजन में डाक सम्बंधित गतिविधियों को नए आयाम देगी. श्री यादव के पास गोरखपुर रीजन के निदेशक का भी अतिरिक्त प्रभार है, ऐसे में उनसे लोगों की आशाएं भी काफी बढ़ गई हैं.

सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लागिंग के क्षेत्र में भी चर्चित नाम श्री कृष्ण कुमार यादव की रचनाधर्मिता को देश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में देखा-पढ़ा जा सकता हैं। विभिन्न विधाओं में अनवरत प्रकाशित होने वाले श्री यादव की अब तक कुल 5 पुस्तकें- अभिलाषा (काव्य-संग्रह-2005), 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह-2006 व 2007), India Post : 150 Glorious Years (2006) एवं 'क्रांति -यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' (2007) प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार डा. राष्ट्रबन्धु द्वारा श्री यादव के व्यक्तित्व व कृतित्व पर ‘‘बाल साहित्य समीक्षा‘‘ पत्रिका का विशेषांक जारी किया गया है तो इलाहाबाद से प्रकाशित ‘‘गुफ्तगू‘‘ पत्रिका ने भी श्री यादव के ऊपर परिशिष्ट अंक जारी किया है। आपके व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर: कृष्ण कुमार यादव‘‘ (सं. डा. दुर्गाचरण मिश्र, 2009) भी प्रकाशित हो चुकी है। पचास से अधिक प्रतिष्ठित पुस्तकों/संकलनों में विभिन्न विधाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं व ‘सरस्वती सुमन‘ (देहरादून) पत्रिका के लघु-कथा विशेषांक (जुलाई-सितम्बर, 2011) का संपादन भी आपने किया है। आकाशवाणी लखनऊ, कानपुर व पोर्टब्लेयर और दूरदर्शन से आपकी कविताएँ, वार्ता, साक्षात्कार इत्यादि का प्रसारण हो चुका हैं।


श्री कृष्ण कुमार यादव ब्लागिंग में भी सक्रिय हैं और व्यक्तिगत रूप से शब्द सृजन की ओर (www.kkyadav.blogspot.com) व डाकिया डाक लाया (www.dakbabu.blogspot.com) और युगल रूप में ‘बाल-दुनिया’ ,‘सप्तरंगी प्रेम’ व ‘उत्सव के रंग’ ब्लॉगों के माध्यम से सक्रिय हैं। विभिन्न वेब पत्रिकाओं, ई पत्रिकाओं, और ब्लॉग पर प्रकाशित होने वाले श्री यादव की इंटरनेट पर ’कविता कोश’ में भी काव्य-रचनाएँ संकलित हैं।


विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु शताधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त श्री यादव की इलाहाबाद में नियुक्ति से इलाहाबाद से जुड़े साहित्यकारों और ब्लागरों में भी काफी हर्ष है !!

बुधवार, 9 नवंबर 2011

नन्हीं अक्षिता (पाखी) को ब्लागिंग हेतु राष्ट्रीय बाल पुरस्कार


प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. तभी तो पाँच वर्षीया नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को वर्ष 2011 हेतु राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Child Award) के लिए चयनित किया गया है. सम्प्रति अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारतीय डाक सेवा के निदेशक और चर्चित लेखक, साहित्यकार, व ब्लागर कृष्ण कुमार यादव एवं लेखिका व ब्लागर आकांक्षा यादव की सुपुत्री अक्षिता को यह पुरस्कार 'कला और ब्लागिंग' (Excellence in the Field of Art and Blogging) के क्षेत्र में शानदार उपलब्धि के लिए बाल दिवस, 14 नवम्बर 2011 को विज्ञानं भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीर्थ जी द्वारा प्रदान किया जायेगा. इसके तहत अक्षिता को 10,000 रूपये नकद राशि, एक मेडल और प्रमाण-पत्र दिया जायेगा.

यह प्रथम अवसर होगा, जब किसी प्रतिभा को सरकारी स्तर पर हिंदी ब्लागिंग के लिए पुरस्कृत-सम्मानित किया जायेगा. अक्षिता का ब्लॉग 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) हिंदी के चर्चित ब्लॉग में से है. फ़िलहाल अक्षिता पोर्टब्लेयर में कारमेल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में के. जी.- प्रथम की छात्रा हैं और उनके इस ब्लॉग का सञ्चालन उनके माता-पिता द्वारा किया जाता है, पर इस पर जिस रूप में अक्षिता द्वारा बनाये चित्र, पेंटिंग्स, फोटोग्राफ और अक्षिता की बातों को प्रस्तुत किया जाता है, वह इस ब्लॉग को रोचक बनता है.

नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) को इस गौरवमयी उपलब्धि पर अनेकोंनेक शुभकामनायें और बधाइयाँ !!

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बुधवार, 10 अगस्त 2011

कृष्ण कुमार यादव जी को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई

कृष्ण कुमार यादव सर को उनके जन्मदिन 10 अगस्त पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें. आप एक अच्छे प्रशासक और साहित्यकार के साथ-साथ अच्छे व्यक्ति भी हैं, आपका सान्निध्य हम सब को प्राप्त है. आपके सान्निध्य में हम लोगों को बहुत कुछ सीखने का अवसर प्राप्त हुआ है. आपके जन्मदिन पर आपके सुखी, समृद्ध एवं यशस्वी जीवन की कामना करते हैं.


सुहृदय, मिलनसार और साहित्य प्रेमी
सबसे अन्तर्मन से वह जुड़ जाते हैं
एक बार जब बने निकटता आपसे
सब जन के.के. जी के सादर गुण गाते हैं !!

शनिवार, 30 जुलाई 2011

रचनाधर्मिता के विविध आयामों को सहेजतीं : आकांक्षा यादव

ब्लागिंग-जगत में बहुत कम लोग ऐसे हैं, जो एक साथ ही प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में भी निरंतर छप रहे हैं. इन्हीं में से एक नाम है-आकांक्षा यादव जी का. आकांक्षा जी कॉलेज में प्रवक्ता के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में भी उतनी ही प्रवृत्त हैं।


इण्डिया टुडे, कादम्बिनी, नवनीत, साहित्य अमृत, वर्तमान साहित्य, अक्षर पर्व, अक्षर शिल्पी, युगतेवर, आजकल, उत्तर प्रदेश, मधुमती, हरिगंधा, पंजाब सौरभ, हिमप्रस्थ, दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, स्वतंत्र भारत, राजस्थान पत्रिका, वीणा, अलाव, परती पलार, हिन्दी चेतना (कनाडा), भारत-एशियाई साहित्य, शुभ तारिका, राष्ट्रधर्म, पांडुलिपि, नारी अस्मिता, चेतांशी, बाल भारती, बाल वाटिका, गुप्त गंगा, संकल्य, प्रसंगम, पुष्पक, गोलकोंडा दर्पण इत्यादि शताधिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित आकांक्षा यादव अंतर्जाल पर भी उतनी ही सक्रिय हैं. विभिन्न वेब पत्रिकाओं- अनुभूति, सृजनगाथा, साहित्यकुंज, साहित्यशिल्पी, वेब दुनिया हिंदी, रचनाकार, ह्रिन्द युग्म, हिंदीनेस्ट, हिंदी मीडिया, हिंदी गौरव, लघुकथा डाट काम, उदंती डाट काम, कलायन, स्वर्गविभा, हमारी वाणी, स्वतंत्र आवाज डाट काम, कवि मंच, इत्यादि पर आपकी रचनाओं का प्रकाशन निरंतर होता रहता है. विकिपीडिया पर भी आपकी तमाम रचनाओं के लिंक उपलब्ध हैं।


अपने व्यक्तिगत ब्लॉग 'शब्द-शिखर' के साथ-साथ पतिदेव कृष्ण कुमार जी के साथ युगल रूप में बाल-दुनिया, सप्तरंगी प्रेम, उत्सव के रंग ब्लॉगों का सञ्चालन उन्हें अग्रणी महिला ब्लागरों की पंक्ति में खड़ा करता है. इसके अलावा भी वे तमाम ब्लॉगों से जुडी हुयी हैं.

30 जुलाई, 1982 को सैदपुर, गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मीं और सम्प्रति भारत के सुदूर अंडमान में हिंदी ब्लागिंग की पताका फहरा रहीं आकांक्षा जी न सिर्फ हिंदी को लेकर सचेत हैं बल्कि इसके प्रचार-प्रसार में भी भूमिका निभा रही हैं. दो दर्जन से अधिक प्रतिष्ठित पुस्तकों/ संकलनों में उनकी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं तो आकाशवाणी से भी रचनाएँ तरंगित होती रहती हैं. नारी विमर्श, बाल विमर्श और सामाजिक मुद्दों से सम्बंधित विषयों पर आप प्रमुखता से लेखन कर रही हैं. कृष्ण कुमार जी के साथ "क्रांति-यज्ञ:1857-1947 की गाथा" पुस्तक का संपादन कर चुकीं आकांक्षा जी के व्यक्तित्व-कृतित्व पर चर्चित बाल-साहित्यकार डा. राष्ट्रबंधु द्वारा सम्पादित "बाल साहित्य समीक्षा (कानपुर)" पत्रिका ने विशेषांक भी जारी किया है।


विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु उन्हें दर्जनाधिक सम्मान, पुरस्कार और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं. भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’भारती ज्योति’, ‘‘एस0एम0एस0‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार सहित तमाम सम्मान शामिल हैं. आकांक्षा जी के पतिदेव श्री कृष्ण कुमार यादव भी चर्चित साहित्यकार और ब्लागर हैं, वहीँ इस दंपत्ति की पुत्री अक्षिता (पाखी) भी 'पाखी की दुनिया' के माध्यम से अभिव्यक्त होती रहती है. सहजता और विनम्रता की प्रतिमूर्ति आकांक्षा यादव अपनी रचनाधर्मिता के बारे में कहती हैं कि-'' मैंने एक रचनाधर्मी के रूप में रचनाओं को जीवंतता के साथ सामाजिक संस्कार देने का प्रयास किया है. बिना लाग-लपेट के सुलभ भाव-भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य उभरें, यही मेरी लेखनी की शक्ति है.''

आशा की जानी चाहिए कि आकांक्षा जी यूँ ही अपने लेखन में धार बनाये रखें, निरंतर लिखती-छपती रहें और हिंदी साहित्य और ब्लागिंग को समृद्ध करती रहें.

जन्म-दिन पर असीम शुभकामनाओं सहित...!!
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रत्नेश कुमार मौर्य :
जन्म- 14 जुलाई, 1977 को. मूलत: उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के निवासी. आरंभिक शिक्षा-दीक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, जीयनपुर-आजमगढ़ और तत्पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्र में परास्नातक. सम्प्रति उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन कौशाम्बी जनपद में अध्यापन पेशे में संलग्न. अध्ययन, लेखन का शौक. फ़िलहाल इलाहाबाद में निवास. दर्शन शास्त्र का विद्यार्थी होने के चलते कई बार यह जीवन भी दर्शन ही लगने लगता है.अंतर्जाल पर ‘शब्द-साहित्य’ ब्लॉग के माध्यम से सक्रियता !!

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

पाखी जियो हजारों साल...


पाखी लगती सबसे प्यारी.
सबकी है वो राजदुलारी.
आज उसका जन्मदिन आया.
यह देख है मन हर्षाया।

पाखी जियो हजारों साल.
मस्ती करो और धमाल.
यूँ ही खूब कमाओ नाम.
जन्मदिन पर यही पैगाम।


एस. आर. भारती
मैनेजर- नेशनल स्पीड पोस्ट सेंटर, कानपुर
कानपुर जी.पी.ओ. -208001

बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

कृष्ण कुमार यादव को डा0 अम्बेडकर राष्ट्रीय फेलोशिप अवार्ड-2010

भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने युवा साहित्यकार एवं भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव को अपने रजत जयंती वर्ष में ‘’डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2010‘‘ से सम्मानित किया है। श्री यादव को यह सम्मान साहित्य सेवा एवं सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। श्री कृष्ण कुमार यादव वर्तमान में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर कार्यरत हैं.

सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय 33 वर्षीय श्री कृष्ण कुमार यादव की रचनाधर्मिता को देश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में देखा-पढा जा सकता हैं। विभिन्न विधाओं में अनवरत प्रकाशित होने वाले श्री यादव की अब तक कुल 5 पुस्तकें- अभिलाषा (काव्य संग्रह), अभिव्यक्तियों के बहाने (निबन्ध संग्रह), अनुभूतियां और विमर्श (निबन्ध संग्रह) और इण्डिया पोस्टः 150 ग्लोरियस ईयर्स, क्रान्ति यज्ञः 1857 से 1947 की गाथा प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार डाॅ0 राष्ट्रबन्धु द्वारा श्री यादव के व्यक्तित्व व कृतित्व पर ‘‘बाल साहित्य समीक्षा‘‘ पत्रिका का विशेषांक जारी किया गया है तो इलाहाबाद से प्रकाशित ‘‘गुफ्तगू‘‘ पत्रिका ने भी श्री यादव के ऊपर परिशिष्ट अंक जारी किया है। शोधार्थियों हेतु आपके जीवन पर एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर : कृष्ण कुमार यादव‘‘ ( स0 डा0 दुर्गाचरण मिश्र) भी प्रकाशित हुई है। श्री यादव की रचनायें पचास से ज्यादा संकलनों में उपस्थिति दर्ज करा रहीं हैं और आकाशवाणी लखनऊ, कानपुर और पोर्टब्लेयर से भी उनकी रचनाएँ और वार्ता प्रसारित हो चुके हैं. श्री कृष्ण कुमार यादव ब्लागिंग में भी सक्रिय हैं और ‘शब्द सृजन की ओर‘ और ‘डाकिया डाक लाया‘ नामक उनके ब्लॉग चर्चित हैं.

ऐसे विलक्षण व सशक्त, सारस्वत सुषमा के संवाहक श्री कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्वे विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’महात्मा ज्योतिबा फुले फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान -2009‘‘, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा काव्य शिरोमणि-2009 एवं महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, मध्य प्रदेश नवलेखन संघ द्वारा ‘‘साहित्य मनीषी सम्मान‘‘ व ‘‘भाषा भारती रत्न‘‘, साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी, प्रतापगढ द्वारा '' विवेकानंद सम्मान'' , महिमा प्रकाशन, दुर्ग-छत्तीसगढ द्वारा ''महिमा साहित्य भूषण सम्मान'' नगर निगम डिग्री कालेज, अमीनाबाद, लखनऊ द्वारा ‘‘सोहनलाल द्विवेदी सम्मान‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान‘‘ व ‘‘महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान‘‘, अन्तर्राष्ट्रीय सम्मानोपाधि संस्थान, कुशीनगर द्वारा ‘‘राष्ट्रभाषा आचार्य‘‘ व ‘‘काव्य गौरव‘‘, इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, बिजनौर द्वारा ‘‘साहित्य गौरव‘‘ व ‘‘काव्य मर्मज्ञ‘‘, दृष्टि संस्था, गुना द्वारा ‘‘अभिव्यक्ति सम्मान‘‘, छत्तीसगढ़ शिक्षक-साहित्यकार मंच द्वारा ‘‘साहित्य सेवा सम्मान‘‘, आसरा समिति, मथुरा द्वारा ‘‘ब्रज गौरव‘‘, श्री मुकुन्द मुरारी स्मृति साहित्यमाला, कानपुर द्वारा ‘‘साहित्य श्री सम्मान‘‘, मेधाश्रम संस्था, कानपुर द्वारा ‘‘सरस्वती पुत्र‘‘, खानाकाह सूफी दीदार शाह चिश्ती, ठाणे द्वारा ‘‘साहित्य विद्यावाचस्पति‘‘, उत्तराखण्ड की साहित्यिक संस्था देवभूमि साहित्यकार मंच द्वारा ‘‘देवभूमि साहित्य रत्न‘‘, सृजनदीप कला मंच पिथौरागढ़ द्वारा ‘‘सृजनदीप सम्मान‘‘, मानस मण्डल कानपुर द्वारा ‘‘मानस मण्डल विशिष्ट सम्मान‘‘, नवयुग पत्रकार विकास एसोसियेशन, लखनऊ द्वारा ‘‘साहित्यकार रत्न‘‘, महिमा प्रकाशन छत्तीसगढ़ द्वारा ‘‘महिमा साहित्य सम्मान‘‘, राजेश्वरी प्रकाशन, गुना द्वारा ‘‘उजास सम्मान‘‘ व ’’अक्षर शिल्पी सम्मान’’, न्यू ऋतम्भरा साहित्यिक मंच, दुर्ग द्वारा ‘‘ न्यू ऋतम्भरा विश्व शांति अलंकरण‘‘, राजेश्वरी प्रकाशन, गुना (म0प्र0) द्वारा ’’अक्षर शिल्पी सम्मान-2010’’ , साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ''हिंदी भाषा भूषण-2010'' इत्यादि तमाम सम्मानों से अलंकृत किया गया है। ऐसे युवा प्रशासक एवं साहित्य मनीषी कृष्ण कुमार यादव को इस सम्मान हेतु बधाईयाँ।

रविवार, 17 अक्टूबर 2010

दशहरे की शुभकामनायें...

!! दशहरे की शुभकामनायें...अन्याय पर न्याय का प्रतीक यह त्यौहार सभी के जीवन में खुशहाली लाये और समाज से भ्रष्ट तत्वों का खात्मा हो !!

मंगलवार, 10 अगस्त 2010

कृष्ण कुमार यादव जी को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई

कृष्ण कुमार यादव सर को उनके जन्मदिन 10 अगस्त पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें. आप एक अच्छे प्रशासक और साहित्यकार के साथ-साथ अच्छे व्यक्ति भी हैं, आपका सान्निध्य हम सब को प्राप्त है. आपके सान्निध्य में हम लोगों को बहुत कुछ सीखने का अवसर प्राप्त हुआ है. आपके जन्मदिन पर आपके सुखी, समृद्ध एवं यशस्वी जीवन की कामना करते हैं.

रविवार, 9 मई 2010

मदर्स डे पर शुभकामनायें !!



मदर्स डे पर आप सभी को शुभकामनायें। यदि आप माँ के साथ हैं तो उनका दिल ना दुखाएं और यदि माँ से भौतिक रूप से दूर हैं तो आज का दिन माँ को समर्पित कर दें। एक बार फिर से बच्चे बन कर देखिये.....माँ के नाजुक हाथों का स्पर्श स्वमेव अपने ऊपर आशीर्वाद के रूप में पाएंगे !!!

शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

वर्ष नव, हर्ष नव, जीवन उत्कर्ष नव !

******आप सभी को नववर्ष-2010 की ढेरों शुभकामनायें******

वर्ष नव,
हर्ष नव,
जीवन उत्कर्ष नव।

नव उमंग,
नव तरंग,
जीवन का नव प्रसंग।

नवल चाह,
नवल राह,
जीवन का नव प्रवाह।

गीत नवल,
प्रीत नवल,
जीवन की रीति नवल,
जीवन की नीति नवल,
जीवन की जीत नवल!

(हरिवंशराय बच्चन जी के संग्रह सतरंगिनी से साभार)

रविवार, 23 अगस्त 2009

|| ॐ गं गणपतये नमो नमः ||



|| ॐ गं गणपतये नमो नमः |||| श्री सिद्धिविनायक नमो नमः ||
|| अष्टविनायक नमो नमः |||| वक्रतुंडाय नमो नमः ||

सोमवार, 10 अगस्त 2009

तुम जियो हजारों साल...








आप जिओ हज़ारों साल,
साल के दिन हों पचास हज़ार
ये दिन आये बारम्बार,
आये आपके जीवन में बहार !
"युवा" टीम के सक्रिय ब्लागर और हिन्दी साहित्य के चमकते सितारे कृष्ण कुमार यादव जी को जन्म-दिवस की ढेरों बधाइयाँ.
















प्रशासन-साहित्य में सुदृढ़ पकड़ किये
मनस्वी की विनम्रता का भी मान है
ऐसे कर्मवीर ही प्रेरणा बनते हैं
कलम लिख गाथा बांटती सम्मान है

साहित्य और प्रशासन की दुनिया में
जिनका जन-जन में है आदर-सम्मान
ऐसे श्री कृष्ण कुमार यादव जी का
विद्वान्-मनीषी भी करते हैं मान

भारतीय डाक सेवा के अधिकारी बन
अपने कृतित्व-मान को और बढ़ाया
प्रशासन और साहित्य का हुआ समन्वय
इस बेजोड़ संतुलन ने सबको चैंकाया

कई विधाओं में उनकी रचनायें
यत्र-तत्र होती रहतीं सतत प्रकाशित
श्री कृष्ण कुमार की साहित्यधर्मिता से
राष्ट्रभाषा हिन्दी हो रही सुवासित

लगभग दो सौ पत्र-पत्रिकाओं में
रचनाएं अब छपती हैं बारम्बार
कविता, कहानियाँ, व्यंग्य, निबंध और
समीक्षाएं, संस्मरण एवं साहित्य-सार

गद्य-पद्य शैली में सिद्धहस्त हैं आप
और लिखते हैं अतिशय व्यंग्य सटीक
काव्य में उभारें आप मृदुल अभिव्यक्ति
कहानियां हैं समाज की स्पष्ट प्रतीक

शब्द-शब्द की अपार सम्पदा से
लेख और निबंध रचते वह विशेष
विद्वत जनों को कर रहे प्रभावित
कुछ भी नहीं रहा यहाँ अवशेष

आकाशवाणी से सुन सरस कविता
श्रोताजन होते खूब भाव-विभोर
शब्द-कथ्य और भाव की सुभग त्रिवेणी
कलकल बहती है जो चारों ओर

संचार क्रान्ति के इस नये दौर में
इण्टरनेट का आया ऐसा जमाना
अंतरजाल पर पत्रिकायें खूब चलें
कृष्ण कुमार जी का भी गायें तराना

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के संयोजक
बद्रीनारायण तिवारी जी सस्नेह
साथ मिल बैठें तो देखें चकित सब
फैले चारों तरफ बस ज्ञान का मेह

प्रथम काव्य संकलन ‘अभिलाषा‘ रच
विद्वत जनों का खूब स्नेहाशीष पाया
‘नीरज‘ जी ने की भूरि-भूरि प्रशंसा
सूर्यप्रसाद दीक्षित ने मनोबल बढ़ाया

‘अभिव्यक्तियों के बहाने‘ निबन्ध संग्रह
फिर ‘अनुभूतियाँ और विमर्श‘ भी आया
गिरिराज किशोर जी ने किया विमोचन
पत्र-पत्रिकाओं में जमकर चर्चा पाया

‘साहित्य सम्पर्क‘ पत्रिका से जुड़े
बने ‘कादम्बिनी क्लब‘ के संरक्षक
अल्पायु में ही खूब नाम कमाकर
श्री कृष्ण कुमार बने हिन्दी के रक्षक

आपकी अप्रतिम प्रतिभा का आकलन
करते सुविज्ञ-जन हो करके हर्षित मन
संस्थायें देकर उपाधियां व अलंकरण
करती हैं सहर्ष स्वागत एवं अभिनन्दन

प्रशासन की अतिव्यस्तताओं के बीच
करते हैं निरन्तर सारस्वत-साधना
हर क्षेत्र में खूब यश-कीर्ति कमायें
होती रहें पूर्ण सब मनोकामना

ज्ञानवान, सुयशी, सराहनीय रहें सदा
प्रगति के मान् विश्व में बनायें आप
प्रशासन-साहित्य में रहें वंदनीय
अभिनन्दनीय मनीषी कहायें आप

वाणी के वरद पुत्र! तुम बनो मनस्वी
निज प्रबुद्ध रचनाओं से बनो यशस्वी
जगदीश्वर से है प्रार्थना हमारी
नित्य फूले-फले आपकी फुलवारी।
(कृष्ण कुमार जी के व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रकाशित पुस्तक "बढ़ते चरण शिखर की ओर" से साभार)

(कृष्ण कुमार जी पर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति-उत्तर प्रदेश के संयोजक एवं पूर्व अध्यक्ष-उ0प्र0 हिन्दी साहित्य सम्मेलन डा0 बद्री नारायण तिवारी जी द्वारा रचित लेख "प्रशासन और साहित्य के ध्वजवाहक : कृष्ण कुमार यादव" युवा ब्लाग पर देख सकते हैं)