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सोमवार, 25 नवंबर 2013

कउने दिशा में

कउने दिशा में 
लेके चला रे बटोहिआ 
गाते गाते आठवर्षिया 
बच्ची का गला 
रह रह कर फॅस रहा था
उसका दसवर्षीय भाई 
साथ में बैठा ढोलक 
बजा रहा था  

यह दृश्य रामनगर की  
कोट विदाई रामलीला के दौरान 
सजे बाज़ार के एक
कोने का था 

लोगो का हुज़ूम 
सतत आ जा रहा था 
उनकी संवेदनाओ का 
किसी पर कोई प्रभाव 
नहीं पड़ रहा था 

ठण्ड भी आहिस्ता से 
दस्तक दे चुकी थी 
कृशकाय 
एक फटे  बनियान और एक फ्रॉक में 
उन दोनों कि दुकान
सजी थी 

कोई दयालू 
आते जाते जैसे ही 
कुछ सिक्के उनके 
कटोरे में डालता 
उनके सुरों में एकाएक 
कुछ पलों  के लिए 
तेजी आ जाता 
पुनः किसी दूसरे दयावान 
की प्रतीक्षा में उनका स्वर 
क्रमशः मद्धम हो जाता 

उधर रामलीला को ओर 
भगवान राम सबको 
एक एक वस्त्र देकर 
अश्रु पूरित नेत्रों से 
कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए 
विदा कर रहे थे 
वो दोनों भी टकटकी लगाये 
उस दृश्य को अनवरत 
देख रहे थे 
साथ ही भोर कि ठण्ड से 
चिहुक भी रहे थे 
सम्भवतः वे सोच रहे थे 
कि काश  भगवान कि नजर 
उनकी तरफ भी 
पड़ जाय 
तो शायद वे भी 
तर जाये 

निर्मेष 

गुरुवार, 14 नवंबर 2013

मन्नू क बालदिवस

मन्नू क  बालदिवस

मन्नू के दोनों हाथ 
चाक पर तेजी से चल रहे थे 
एक एक कुल्हड़ अपने 
आकार ले रहे थे 
मन्नू को आज अपना 
कम समाप्त करने की कुछ 
ज्यादा ही जल्दी थी 
स्कूल के बल दिवस में 
शिरकत करने  की उसकी 
तीव्र मंशा थी 

सुना था कुछ लोग 
तमाम उपहार लेकर आयेंगे 
उसे उसके जैसे गरीब बच्चो के बीच 
वितरित कर जायेगे 

मन्नू के बापू 
पिछले साल टी बी से 
पीड़ित ईलाज के अभाव में 
असमय ही चल बसे 
मन्नू के साथ पूरे परिवार को 
बेसहारा छोड़ गए 

माँ के प्रयास से मन्नू ने 
कुल्हड़ गढ़ना सीख लिया 
किसी तरह रोजी रोटी का 
एक जरिया निकाल लिया 
साथ ही पढ़ लिख कर 
कुछ करने की तीव्र चाह ने 
मन्नू पर बारह की उम्र में ही 
दोहरी जिम्मेदारियो को 
असमय ही लाद  दिया था 
उसे समय से पूर्व ही 
समझदार बना दिया था 

जल्दी से कम समाप्त कर 
मन्नू तैयार होकर 
स्कूल की ओर  भागा 
पर उपहारों की लाइन से 
तुरत निकाला गया वह अभागा 
कि स्कूल ड्रेस में नहीं 
आया था 
जिसके लिए पिछले कई दिनों से 
माँ से वह लगातार मिन्नतें 
कर रहा था 
पर माँ ने कभी पानी के टैक्स 
कभी मकान टैक्स 
तो कभी बिजली के बिल का 
देकर हवाला 
हर बार उसके  ड्रेस की 
मांग को टाला 

लाइन से दूर खड़ा 
मन्नू स्कूटी और कार से 
आये  स्कूल ड्रेस में सजे 
बच्चों को  तमाम 
सुन्दर सुन्दर उपहार लेकर 
जाते हुए 
हसरत भरी निगाहों से 
अनवरत देख रहा था 
उन उपहारों की सार्थकता के साथ 
बालदिवस के निहितार्थ को 
तलाश रहा था 
साथ ही अपनी किस्मत  और 
भाविष्य के बारे में आशंकित 
कुछ सोच रहा था 

निर्मेष 


बुधवार, 6 नवंबर 2013

गमछा

पिछले 
एकमाह से 
रामेदव जी तोड़ 
मेहनत  कर रहा था 
दीपावली के रंग रोगन के 
बाजार का भरपूर 
फायदा  उठाने में 
लगा था 

दिन में मजदूरी 
रात में डिस्टेंपर पेन्ट का काम 
कर रहा था एक के बाद 
एक का काम तमाम 
कमाए गए पैसो को 
गमछे में बाध  कर 
कमर के फेटे में रखता जाता
साथ ही गाँव में अपने सपने को 
सजोता जाता 

इस बार तो वह 
पत्नी के गहने छोड़वा कर ही रहेगा 
जिसे बापू कि तेरहवी के लिये 
मजबूरन गिरवी रखा था 
बच्चो के किस्म किस्म के 
पटाखों कि मांग को 
याद  करता जाता  
पत्नी व बच्चो के लिए 
कपड़ो एके बारे में भी सोचता जाता 
तल्लीनता से अपने काम को 
अंजाम दे रहा था 
हालाकि घर से कई बार 
बुलावा आता  रहा 
सेहत को ध्यान में रख 
काम करने का सुझाव 
माँ और पत्नी से 
लगातार पाता रहा 
वह अपने काम में मगन 
खुद को समझाता 
दीपावली के एक दिन पूर्व  तक 
काम करने का मन बनाता रहा 

दीपावली के एक दिन पहले 
आरिफ मियां के घर 
बालू गिर रहा था 
वह घर जाने  के लिए तैयार 
लगभग मुझसे मिलने आया था 
सहसा कह बैठा कि 
भैया एका भी ठीका दिला  दो 
तो हमरा घर जाये का भाड़ा 
भी निकल जाइये 
भले ही शाम कि गाड़ी से 
हम घर चला जइबे 

हमने उसे 
झिड़कते हुए समझाया 
पर उसके कोमल तर्कों पर विवश 
आरिफ से कह उसे उस बालू को 
ढोने का ठीका दिलवाया 

सर पर गमछा बांध 
उसने शाम तक उस काम को 
फुर्ती से निपटाया 
अपनी मजदूरीको पुनः 
गमछे के साथ फेटे में बांध 
स्टेशन को ओर ख़ुशी से 
चल दिया 

गाड़ी के चार घंटे 
लेट का एलान हुआ 
उसने पास कि बेंच पर 
आराम करने का सहसा 
मन बना लिया 
चाय और बिस्कुट का डिनर ले 
थका रामेदव 
स्टेशन की बेंच पर लेट गया 
थोड़ी ही देर में 
बेसुध सपने देखते 
नीद के आगोश में हो गया 

तभी चारो और 
चोर चोर पकड़ो पकड़ो  की 
तेज आवाज सुन 
वह अधकचरी नीद से जागा 
अपनी जगह से उठकर 
भयवश वह तेजी से भागा 
वर्दीधारियों में से एक ने 
उसे ही दौड़ कर पकड़ा 
वह कुछ कहता 
उसके पूर्व हे एक 
जोर का तमाचा जड़ा 
साले  चोरी कर 
कहा है भागता 

वह लाख समझाता रहा 
पर उनके तर्कों को 
दरकिनार कर 
तलाशी के नाम पर 
उसके फेटे का सब 
रकम जाता रहा 
ऊपर से चाँद थप्पड़ो के साथ 
गाली घेलुए में पाता रहा 

अंत में सुबह की 
समाचार का वह न्यूज बना 
चोर सिपाही का वास्तविक 
खेल खेलते हुए रामदेव  
अपने गमच्छे से ही 
स्टेशन कि रेलिंग पर 
सदा के लिए लटक कर 
खामोश होगया 

साथ ही वर्त्तमान 
व्यवस्था पर 
एक ओर जहाँ वह एक 
प्रश्नचिह्न छोड़ गया 
वही अपनी पत्नी और बच्चो को 
व्यवस्था से प्रतिशोध लेते हुए 
अनाथ कर गया 

निर्मेष 

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

लक्ष्मी और गणेश का पूजन

दिहाड़ी सुजीत 
ने लगभग  सुबकते हुए 
ऑफिस में प्रवेश किया 
उसके हालत दे ख 
मन मेरा एक अज्ञात आशंका 
से कॉप  गया 

सर मेरी साइकिल 
कार्यालय  गेट के सामने  से 
अचानक से खो गयी 
मैं घबराया  अरे 
अभी परसो तो ही 
खरीदी थी तुमने नयी 

क्या  ताला नहीं लगाया था 
सर एक लगाया था 
अरे भाई समय ख़राब है 
सीकड़ मार कर रखना चाहिए था 
मेरा दुर्भाग्य है सर 
अब क्या कहियेगा 
किसी तरह एक मित्र से 
उधार लेकर ख़रीदा था 
पहली तन्ख्वाह पर पैसा वापस 
करने का वादा किया था 
अब कैसे क्या होगा 
कहते हुए वह 
कार्यालय के स्टूल पर बैठ गया 
हर एक कि ओर याचना की 
नजरो से देख रहा 

कोई एफ आई आर 
कराने को कह रहा था 
कोई बड़े साहब से मिलने की 
बात कह रहा था 
सभी लोग कुछ न कुछ 
अपनी ओर से राय दे रहे थे 
पर उसके घाव को 
भर नहीं पा  रहे थे 

फा इ लो  में तल्लीन होने का 
अभिनय करते हुए 
मै भी उससे नजर मिलाने का 
साहस नहीं कर पा रहा था 
वह बड़े ही मासूमियत और 
आशा के साथ मुझे 
अनवरत निहार रहा था 
शायद वह मुझमे 
किसी सम्भावना और 
एक हल को तलाश रहा था 

अभी पंद्रह दिन 
पहले ही तो 
उसने किसी तरह जुगाड़ से 
दिहाड़ी पर मेरे कार्यालयमे 
अनुसेवक के पद पर 
ज्वाइन किया था 
कुछ ही दिनों में अपनी 
समर्पण और सेवा से 
हम सभी का दिल जीत लिया था 

नित्य कि सत्तर किमी की 
उसके घर से कार्यालय की दूरी 
ऊपर से उधारी साइकिल कि मजबूरी 
से व्यथित होकर 
किसी तरह उक्त साइकिल का 
जुगाड़ किया था 
बड़े ही परिश्रम से 
अपने जीवन की गाड़ी को 
पटरी पर लाने  का प्रयास कर रहा था 
एक पैसे की  अभी तक आय नहीं 
ऊपर से उधारी नयी 
साइकिल भी चली गयी 
इतनी दूरी कि यात्रा अब 
वह कैसे करेगा 
खाली हाथ पत्नी और परिवार का 
सामना कैसे करेगा 

यही सब सोचते  अचानक 
मेरी चेतना ने मुझे 
एकदम से झकझोर कर जगाया 
मैंने एक सफल उम्मीद से 
तुरंत घर का फोन घनघनाया 
पत्नी सीमा से 
रिक्की कि साइकिल के
बारे में बात की 
जो उसके दिल्ली प्रवास से 
पिछले दो माह से अच्छी 
हालत में खाली थी पड़ी 
सकारात्मक स्वीकृत पाकर 
मैंने अपने सहयोगी बिरेन्द्र के साथ 
सुजीत को घर पठाया 
उसे अपनी उस साइकिल को 
एकदम से दिलवाया 

वर्त्तमान परिवेश में 
कल्पना से परे एक 
त्वरित समाधान देख 
उसने कृतज्ञता से मेरी ओर 
भरी आँखों से देखा 
कुछ न कह पाने कि स्थिति में भी 
उसकी आँखों में मैंने एक 
उपकृत सैलाब देखा 
साइकिल खोने कि उसकी व्यथा 
उसके वृहत्तर प्रभाव व 
प्रस्तुत तात्कालिक समाधान के मध्य 
विचरित मै कवी ह्रदय 
शून्य में खो गया 
मुझे लगा कि मैंने 
लक्ष्मी और गणेश का 
दीपावली के शुभावसर पर 
विधिवत पूजन 
कर लिया 

निर्मेष 

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2013

युवाओं में अभिरुचियों का विकास जरुरी - कृष्ण कुमार यादव

शिक्षा साहित्य, कला और संस्कृति किसी भी राष्ट्र को अग्रगामी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। ऐसे में जरुरत है कि युवा पीढ़ी इनसे अपने को जोड़े और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान स्थापित करे। उक्त उद्गार इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने नवोदय विद्यालय समिति, लखनऊ सम्भाग द्वारा 21 अक्टूबर 2013 को लखनऊ में गोमती नगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के प्रेक्षागार में आयोजित ”प्रज्ञानम-2013” में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि किताबी शिक्षा को व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ना बहुत जरूरी है और इसके लिए जरूरी है अभिरुचियाँ विकसित की जाये।

नवोदय विद्यालय समिति द्वारा आयोजित ”प्रज्ञानम-2013” कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने सृजनात्मक और रचनात्मक प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रज्ञानम में छात्र-छात्राओं की एक से बढ़कर एक प्रतिभा उभरकर सामने आयी। जहां एक ओर छात्राओं ने मंच पर आकर्षण नृत्य प्रस्तुत कर ’प्रज्ञानम-2013’ को यादगार बनाया, वहीं अपने हाथों से बनायी मूर्तियों, फ्लावर पाट एवं अन्य सजावटी समानों से शिल्पकारी का भी बखूबी परिचय दिया। इसके अलावा छात्र-छात्राओं ने कविता पाठ, वाद-विवाद, गायन, वादन, निबंध लेखन, आन द स्पाट पेंटिंग जैसी अन्य कलात्मक प्रतियोगिताओं में भी जमकर हाथ आजमाया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 19 जवाहर नवोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में विजयी छात्रों को अगले महीने दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिलेगा। 

    इस अवसर पर नवोदय विद्यालय समिति, लखनऊ संभाग द्वारा आयोजित चित्र प्रदर्शनी का फीता काटकर इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं, कृष्ण कुमार यादव ने उद्घाटन किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। इससे पूर्व श्री यादव ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्वलित कर ’प्रज्ञानम-2013’ कार्यक्रम का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया। गौरतलब है कि कृष्ण कुमार यादव जवाहर नवोदय विद्यालय, जीयनपुर-आज़मगढ़ के पूर्व छात्र रहे हैं, ऐसे में उनकी उपस्थिति प्रेरणास्पद रही। 

   नवोदय विद्यालय समिति, लखनऊ सम्भाग की ओर से इस अवसर पर इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं, कृष्ण कुमार यादव को सम्मानित किया गया। सम्मान प्रदान करते हुए नवोदय विद्यालय समिति, लखनऊ सम्भाग के उपायुक्त श्री अशोक कुमार शुक्ला ने कहा कि बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न कृष्ण कुमार यादव जवाहर नवोदय विद्यालय से सिविल सेवाओं में सफल होने वाले प्रथम व्यक्ति हैं, वहीं प्रशासन के साथ-साथ अपनी साहित्यिक व लेखन अभिरुचियों के चलते भी उन्होंने कई उपलब्धियाँ अपने खाते में दर्ज की हैं । उन्होंने श्री यादव को तमाम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बताया और इस बात पर हर्ष जताया कि मुख्य अतिथि के रूप में नवोदय के ही एक पूर्व विद्यार्थी को पाकर हम सब अभिभूत हैं । इस अवसर पर श्री यादव ने जहाँ नवोदय में बिताए गए दिनों को लोगों के साथ साझा किया, वहीं जीवन में प्रगति के लिए विद्यार्थियों को तमाम टिप्स भी दिए।

इस अवसर पर नवोदय विद्यालय समिति, लखनऊ सम्भाग के उपायुक्त श्री अशोक कुमार शुक्ला ने कहा कि प्रज्ञानम के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ सशक्त सांस्कृतिक, तत्वपूर्ण एवं मूल्यपरक शिक्षा पर्यावरण और शारीरिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा प्रदान करना ध्येय है। कार्यक्रम का संचालन जवाहर नवोदय विद्यालय, फिरोजाबाद की प्रधानाचार्या श्रीमती सुमनलता द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर तमाम विद्यालयों के प्रधानाचार्य, अध्यापकगण, शिक्षाविद, इत्यादि मौजूद थे। 

(पंकज मौर्य, सी-4 पोस्टल स्टाफ कालोनी, एल्गिन रोड इलाहाबाद-211001)

बुधवार, 23 अक्टूबर 2013

ननकू

ननकू काफी देर से 
सब्जी की दुकान पर 
एक कोने में खड़ा 
मुझे लगा कि 
कुछ खास खरीदने की हिम्मत 
जूटा  रहा था 
मै  भी नित्य की भांति 
राजू की दुकान पर 
सब्जी के लिए खड़ा था 

भीड़ कुछ कम होने पर 
ननकू ने धीरे से पूछा 
भैया ई गोभी कितने का 
दुकानदार ने उसकी ओर 
हिकारत से देखा 
फिर बोल चालीस का 
और ई नया आलू 
तीस का 
ठिठक कर ननकू ने पूछा  टमाटर 
साठ का 
पुनः हिम्मत जूटा  कर 
प्याज का भाव पूछा 
भय्वास अपेक्षित उत्तर की
प्रतीक्षा किया बिना 
लौकी पर लौट आया 
दुकानदार ने जब उसे भी 
तीस का बताया 
ननकू का तो जैसे 
गला ही रूद्ध आया 

राजू बोल का यार 
बहुत दिनन बाद सब्जी 
खरीदे निकलल  हौआ  का 
नाही  भैया 
आज बिटियवा का जन्मदिन रहा 
ऊ  बिनहिये  से गोभी अउर 
नया आलू के सब्जी के साथ 
पूड़ी खाये का जिद्द कियस बा 
इधर कई दिनन से 
कम धंधा  भी ठीक से 
नहीं चालत बा 
यही पीछे पूरान  आलू के झोल से 
कम चलत रहा 

पिछले महिनवे  त 
सट्टी से इकट्ठे  कीन के लावा  रहा 
आज बड़े अरमान से 
एक पचास का नोट ले 
बाज़ार आवा रहा 
मन मा कुछ नया अउर 
बढ़िया खाये   का भावा  
परअफ़सोस उसकी कीमत 
तो पाँच रूपया पावा 

अपनी बिटिया के हम 
हम कितना सब्जबाग दिखावा है 
पर अपनी हाड़तोड़ म्हणत की कमाई 
ऊपर से ई महगाई से 
अपनी कमर तो टूटी पावा है 
अपनी बिटिया कै 
एक इतनी छोटी सी इच्छा 
भी पूरी नहीं कर पावा है 
अपने जीवन का हम
व्यर्थ  पावा है 
निर्मेष 

निर्मेष 

बुधवार, 25 सितंबर 2013

इम्तिहान

निडर  
निसंकोच वह 
मां के सामने ढल बन कर 
खड़ा हो गया 
दहशतगर्दो को चुनौती 
देने की मुद्रा में आ गया 
नैरोबी के उस मॉल में 
नन्हा प्रम्सु उन 
दहश्गर्दो की संवेदनाओ का 
इम्तिहान लेने का दुस्साहस 
करने लगा 

पर उसे शायद पता नहीं की 
वह धूर में जेउर 
पूराने का प्रयास कर रहा 
वे वीर नहीं 
जो उसके इस कदम पर 
ठहर जायेगे 
उसके इस असीम साहस का 
इस्तकबाल करेंगे 

यह तो उन कायरो की जमात है 
जो अपने झूठी शानो की 
नुमेंदगी  हेतु 
निहत्थो पर हथियार 
चलने वाली कौम की भरमार है 
अपने से मजबूत के सामने तो ये 
पानी भरते नजर आते है 
अपने से  कमजोरों पर
 जुल्म ढहाने  में 
जरा भिनाही हिचकिचाते है 
महिलाओं और बच्चो पर भी 
तरस इन्हें नहीं आता  है 
पता नहीं इनके खुदा  ने इन्हें 
किस मिट्टी से बनाया है 

अरे बहादुर इतने तो 
अमेरिका पर कूच करो 
अपने मंसूबे का 
अंजाम मुकम्मिल हासिल करो 

पर ऐसा क्यों करेंगे 
इन्हें तो आशय शिकारों की 
तलाश रहती है 
अपने हथियारों पर सिर्फ 
धर लगाने की जरूरत रहती है 

अपनी कौम को मुर्ख 
और अपने में झूठा दंभ 
भरना चाहते है 
बदले माँ असहाय  अबलाओं  और 
मासूमो की बलि चाहते है 

पता नहीं इनके  सीने  में 
कैसा  दिल  था 
जिसने शायद पसीजना 
नहीं सीखा था 
उस मासूम के सीने को 
तत्काल गोलियों से छलनी 
कर दिया था 
इशान और इन्शानियत को 
शर्म से ज्यादा भी शर्मशार 
कर दिया था 

माँ  मुक्ता  ने उसे भीच कर 
सीने से लगा लिया 
उसके कलेजे के टुकडे  ने 
उसके सामने ही दम 
तोड़ दिया था 

माँ की  ममता चीत्कार 
कर उठी 
जाना था जिसके कंधो पर 
आज उसीकी लाश 
बेबस वह  ढो  रही 
वह सोच रही थी की 
उसके बच्चे ने शायद 
अपने दूध का कर्ज 
तो अदा कर दिया 
पर भगवन ने उसे 
अपने माँ का फर्ज 
पूरा करने का मौका ही 
नहीं दिया
काश वह समय से 
एक त्वरित  निर्णय ले पाती 
गोली लगाने से पहले 
अपने बच्चो को 
अपने अंक में समां लेती 
अपने को कुर्बान कर 
अपने बच्चे को 
 काश  बचा लेती 

निर्मेश 

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव को ब्लागिंग हेतु काठमांडू में मिलेगा सम्मान

हिंदी ब्लॉगिंग के माध्यम से समाज और साहित्य के बीच सेतु निर्माण के निमित्त चर्चित  ब्लागर एवं इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ कृष्ण कुमार यादव और उनकी पत्नी आकांक्षा यादव को क्रमशः ”परिकल्पना साहित्य सम्मान” व  ”परिकल्पना ब्लॉग विभूषण सम्मान” के लिए चुना गया है। यह सम्मान 13-14 सितंबर 2013 को नेपाल की राजधानी काठमाण्डू के राजभवन में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन‘ में प्रदान किया जायेगा। इन सम्मान के अंतर्गत स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, श्री फल, पुस्तकें अंगवस्त्र और एक निश्चित धनराशि प्रदान किए जाएंगे। 

     गौरतलब है कि यादव दंपति एक लम्बे समय से साहित्य और ब्लागिंग से अनवरत जुडे़ हुए हैं। अभी पिछले वर्ष ही इन दम्पति को उ.प्र. के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा न्यू मीडिया ब्लागिंग हेतु ”अवध सम्मान” और हिन्दी ब्लागिंग के दस साल पूरे होने पर ”दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लागर दम्पति” सम्मान से भी नवाजा गया था। कृष्ण कुमार यादव जहाँ “शब्द-सृजन की ओर“ (www.kkyadav.blogspot.com/) और “डाकिया डाक लाया“ (www.dakbabu.blogspot.com/) ब्लॉग के माध्यम से सक्रिय हैं, वहीं आकांक्षा यादव “शब्द-शिखर“ (www.shabdshikhar.blogspot.com/) ब्लॉग के माध्यम से। इसके अलावा इस दंपत्ति द्वारा सप्तरंगी प्रेम, बाल-दुनिया और उत्सव के रंग ब्लॉगों का भी युगल संचालन किया जाता है। कृष्ण कुमार-आकांक्षा यादव ने वर्ष 2008 में ब्लॉग जगत में कदम रखा और 5 साल के भीतर ही विभिन्न विषयों पर आधारित दसियों ब्लॉग  का संचालन-सम्पादन करके कई लोगों को ब्लागिंग की तरफ प्रवृत्त किया और अपनी साहित्यिक रचनाधर्मिता के साथ-साथ ब्लागिंग को भी नये आयाम दिये। कृष्ण कुमार यादव के ब्लॉग सामयिक विषयों, मर्मस्पर्शी कविताओं व जानकारीपरक, शोधपूर्ण आलेखों से परिपूर्ण है; वहीं नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रुचि रखने वाली आकांक्षा यादव अग्रणी महिला ब्लॉगर हैं और इनकी रचनाओं में नारी-सशक्तीकरण बखूबी झलकता है। गौरतलब है कि इस ब्लागर दम्पति की सुपुत्री अक्षिता (पाखी) को ब्लागिंग हेतु 'पाखी की दुनिया' (www.pakhi-akshita.blogspot.com/) ब्लॉग के लिए सबसे कम उम्र में 'राष्ट्रीय बाल  पुरस्कार' प्राप्त हो चुका है। अक्षिता को परिकल्पना समूह द्वारा श्रेष्ठ नन्ही ब्लागर के ख़िताब से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

    लगभग समान अभिरुचियों से युक्त इस दंपति की विभिन्न विधाओं में रचनाएँ देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर प्रकाशित होती रहती है। कृष्ण कुमार यादव की 6 कृतियाँ ”अभिलाषा” (काव्य संग्रह), ”अभिव्यक्तियों के बहाने” व ”अनुभूतियाँ और विमर्श” (निबंध संग्रह), इण्डिया पोस्ट: 150 ग्लोरियस ईयर्ज (2006) एवं ”क्रांतियज्ञ: 1857-1947 की गाथा” (2007), ”जंगल में क्रिकेट” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित हैं, वहीं आकांक्षा यादव की एक मौलिक कृति ”चाँद पर पानी” (बालगीत संग्रह) प्रकाशित है।

बुधवार, 4 सितंबर 2013

देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र से सीखने की जरूरत - कृष्ण कुमार यादव


अखिल भारतीय श्री कृष्ण चेतना संस्थान के तत्वाधान में 1 सितम्बर, 2013 को श्री कृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन इलाहाबाद में किया गया। इस अवसर पर जहाँ भगवान श्री कृष्ण के विचारों को पुनः रेखांकित किया गया, वहीँ श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित इलाहाबाद परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित साहित्यकार  कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण साधारण व्यक्ति न होकर युग पुरुष थे। उनके व्यक्तित्व में भारत को एक प्रतिभासम्पन्न राजनीतिवेत्ता ही नहीं, एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक प्राप्त हुआ, जिसका गीता-ज्ञान समस्त मानव-जाति एवं सभी देश-काल के लिए पथ-प्रदर्शक है। डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने इस बात पर जोर दिया कि आज देश के युवाओं को श्रीकृष्ण के विराट चरित्र के बृहद अध्ययन की जरूरत है। राजनेताओं को उनकी विलक्षण राजनीति समझने की दरकार है और धर्म के प्रणेताओं, उपदेशकोंको यह समझने की आवश्यकता है कि श्रीकृष्ण ने जीवन से भागने या पलायन करने या निषेध का संदेश कभी नहीं दिया। श्री यादव ने कहा कि श्रीकृष्ण ने कभी कोई निषेध नहीं किया। उन्होंने पूरे जीवन को समग्रता के साथ स्वीकारा है। 

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में इलाहाबाद के पूर्व जिलाधिकारी श्री महावीर यादव ने कहा कि हमारे अध्यात्म के विराट आकाश में श्रीकृष्ण ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों व ऊंचाइयों पर जाकर भी गंभीर या उदास नहीं हैं। इलाहाबाद विश्विद्यालय के प्रो. उमाकांत यादव ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की स्तुति लगभग सारे भारत में किसी न किसी रूप में की जाती है। यहाँ तक कि वे लोग जिन्हें हम साधारण रूप में नास्तिक या धर्म निरपेक्ष की श्रेणी में रखते हैं, वे भी निश्चित रूप से भगवतगीता से प्रभावित हैं। जिला सूचना अधिकारी जे. एस. यादव ने श्री कृष्ण के विचारों को सदैव प्रासंगिक बताया। संस्थान के अध्यक्ष इं. राम किशोर यादव ने सभी का स्वागत करते हुए भगवान श्री कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही। संस्थान के महामंत्री जगदम्बा सिंह यादव ने सभी का आभार ज्ञापन किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया।