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बुधवार, 8 अप्रैल 2009

अब भी जागो युवा

जब -जब देश में गलत का फैलाव हुआ
हमारा अपनी जमीर से अलगाव हुआ
बेचा खुद के अहसासों को
चांदी के टुकडों की खातिर
गरीबो के पैसों से शेयर
बेचते बाजार के शातिर
हल्का से एक झटका लगा
बड़ा पेड़ कट कर गिरा
हमारी अर्थ जगत की चूल हिल गई
गुरु की गुरुतई काम न आई
तब चेलो की की कैसी प्रभुताई !

फिर भी हम चिल्लाते
अपना गाल बजाते
देश के चंद अमीरों में
खुद को अमीर जतलाते
सोने को जमीं के लाले
चाँद पे जाने का गौरव गाते
खाने को अन्न नहीं पर
अरबों में नेता चुन कर लाते
धन्य हमारा लोकतंत्र
है धन्य हमारा देश स्वतंत्र
है धन्य हमारी जनता
हैं धन्य हमारे नेता
अब, बस बहुत हो चुका
अब भी जागो युवा
जगाओ अंदर के शिवा को
खोलो मन के द्वार
हो जाने दो
एक बार फिर इस जग का उद्धार !!
जयराम चौधरी
jay.choudhary16@gmail.com
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