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शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

झुमकी



बापू बापू
इस बार दशमी के मेला माँ
हमऊ चलब
दुकान में तुम्हरा हाथ बटाईब
अऊर मेला देखब
हाँ पिछली बार तू नैका सूट
दियावे के कहे रहा
पर बिक्री कमजोर रही
अहिसे दिया नहीं पावा
पर असों हम ऊ जरूर लेइब
झुमकी धूप में खिलौना सुखाते सुखाते
ननकू से कह रही थी
अन्दर उसकी माँ बुधिया
उसकी बात ध्यान से सुन रही थी
हाँ हाँ तुम्हों चला जइयो
पर अभई बतियाव कम
कमवा मन से करयो

पिछले मेले से ननकू ने
सीख लिया था
इस बार कई तरह के
मिटटी के खिलौने को बनाया था
बैग को पीठ पर लादे
स्कूल जा रहा बच्चा
जहाँ सर्वा शिक्षा अभियान का
द्योतक लग रहा था
वहीँ बिटिया को गोद में
प्यार से दुलारती माँ की मूर्ति
कन्या भ्रूण हत्या का
विरोध कर रहा था
मंत्री को हथकड़ी लगाये सिपाही
अन्ना के लोकपाल की कथा
बहुतखूब कह रहा था
वही टैंक पर खड़ा सैनिक
शत्रुओं को ललकारता
राष्ट्रप्रेम की सीख दे रहा था
ननकू सोच रहा था
इस बार मेला में तो बस
वही छाया रहेगा
कायदे से जो कमाई होई गयी तो
इस बार खपरैल बदल कर रहेगा
पूरी बरसात को किसी तरह
रात रात भीगते हुए बिताया है
पूर्व कि बरसातों ने भी
कम नहीं रुलाया है

नए उत्साह से लबरेज
ननकू झुमकी के साथ
मेले में पहुँच गया
पर वहां पुलिस का नया रंग देख
वह दंग रह गया
किसी तरह पचास कि एक पत्ती देने पर
मेले में जगह तो मिल गयी
थोड़ी देर में उसकी
दुकान सज गयी
चारो ओर भीड़ और तमाम तरह की
दुकाने सजावट झूले आदि देख
झुमकी मचल गयी
खुशी के मारे वह निहाल हो गयी
दुकान सजाकर नया फ्राक पहन कर
वह दुकान पर कुछ इस तरह बैठी
मानो वह जगह हो
उसके बाप की बपौती

दोपहर होने को आयी
ननकू की बोहनी तक नहीं भई
झुमकी चिल्ला चिल्ला कर
ग्राहक बुला रही थी
पर भीड़ सामनेवाले चाइनीज
खिलौने वाली दुकान पर ही जा रही थी
झुमकी थक थक कर बैठ जाती
सुस्ताकर फिर नए उत्साह से लग जाती
मेला देखना तो वह भूल ही गयी
दूर मोरनीवाली झूला
उसे चिढाती रही

किसी तरह शाम तक
कुछ सस्ते खिलौने ही बिक पाए थे
उदास ननकू की आँखों में
आंसू भर आये थे
रात होने पर ननकू
दुकान समेटने लगा
चिल्लाते चिल्लाते कोने में
सो चुकी झुमकी को घर
चलने के लिए जगाने लगा
सोच रहा था कि
कितने अरमानो से झुमकी को
झूला झुलाने लाया था
बुधिया के साथ उसे भी नए कपडे
दिलाने का वादा कर आया था
झूला तो दूर उसे मेला तक
नही दिखा पाया था
झुमकी ने तो खूब औकात भर
उसका साथ दिया था
पर उसने एक बार फिर
झुमकी को रुला दिया था

अपनी हाथगाड़ी में एक ओर
बचे खिलौने और दूसरी ओर झुमकी को
सुला ननकू घर लौट चला
आने वाले बरसात से
कैसे वह पुनः निपटेगा
रस्ते भर सोचता रहा
और तो और इस बार फिर
वह खपरैल छवाने से रहा
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