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सोमवार, 6 सितंबर 2010

अरुणेश मिश्र
संपादक की ओर से
सब जन कहत कागज की लेखी । हम हैँ कहत आँखिन की देखी - महान संत कवि कबीर दास का यह कथन हमारा आदर्श है ।इस साइट को प्रारम्भ करने का उद्देश्य साहित्य . संस्कृति . कला . विज्ञान और अन्यान्य विधाओं के साम्प्रतिक रूप से पाठकों को अवगत कराना ही नही अपितु उनकी साझेदारी भी सुनिश्चित कराना है ।इन्कलाब एक खुला मंच है . इसमे प्रत्येक विधा और क्षेत्र के रचनाधर्मियों एवं समीक्षकों के लेखकीय सहयोग का स्वागत है । यह हमारा . आपका , सबका मंच है - जो जहाँ . जैसा . जिस तरह है . प्रस्तुत करने के लिए . और अच्छा बनाने के लिए ।

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